8.5.1988
फ़रिश्ता बनना माना डबल लाइट बनना
आज जैसे ही मैं वतन में पहुँची तो देखा कि आप सबकी याद हमारे जाने से पहले ही बापदादा के पास पहुँच चुकी थी। जैसे ही मैं बाबा के नज़दीक जा रही थी, वैसे ही बाबा बहुत मीठी दृष्टि दे रहे थे और मैं उसी दृष्टि के स्नेह में समाती जा रही थी। पहले तो मैं अकेली थी लेकिन जब मैं बाबा के और भी नज़दीक जा रही थी, तब मुझे लगा कि मेरे पीछे-पीछे और भी है। बाबा के पास पहुँचते ही बाबा ने मुझे कहा कि – आओ बच्ची! और फिर अपने सामने खड़ा कर दृष्टि देने लगे। फिर बाबा ने कहा – बच्ची, अब देखना। तो मैं देखने लगी और बाबा भी देख रहे थे।
हमने देखा कि सिर्फ यहाँ बैठे भाई-बहन ही नहीं लेकिन देश-विदेश के अनेक भाई-बहनें दूर-दूर से बाबा के पास आ रहे थे। उन्हों के आने की रीति बड़ी न्यारी थी। वतन में सबका आकारी लाइट का रूप तो होता ही है, तो फ़रिश्ता रूप तो सबका था ही लेकिन आने की न्यारी रीति यह थी कि उनके पाँव धरती पर थे लेकिन एक लाइट के रॉड पर थे जो धरती से ऊँची थी। उसी रॉड पर सभी फ़रिश्ते दो-दो या तीन-तीन की लाइन में आ रहे थे। जैसे वे बाबा के पास आते थे वैसे वे बाबा की बाहों में समाते जाते थे। इसी प्रकार बहुत सारे देश-विदेश के बाबा की बाहों में समा गये। फिर बाबा ने पूछा – बच्ची, यह दृश्य देखा? इसका राज़ क्या था? इसका क्या रहस्य था? मैं मुस्कराई!
बाबा ने कहा कि – फ़रिश्ता बनना माना डबल लाइट बनना अर्थात् बैलेन्स में रहना। लाइट की रॉड जो दिखई यह बैलेंस की निशानी थी। रॉड पर सीधे चलकर आ रहे थे। अगर बैलेंस ज़रा भी कम होता तो डगमग होते। फिर बाबा ने कहा कि जो बच्चे फ़रिश्ता अर्थात् डबल लाइट बनते हैं वे सदा बैलेन्स में रहते हैं। वे रॉड पर होते हुए भी ऐसे चल रहे थे जैसे धरती पर चल रहे हों। फिर बाबा ने कहा कि – जिनके बुद्धि रूपी पाँव बैलेंस के रॉड पर रहते हैं वे बहुत सहज धरती के आकर्षण से परे रहते हैं। रॉड धरती से ऊपर था ना! जो बच्चे याद और सेवा के बैलेंस में रहते हैं वे एक तो डबल लाइट फ़रिश्ता बनते हैं और दूसरा फ़रिश्ता बन बैलेंस में रहने से वे सदा प्रकृति रूपी धरनी के आकर्षण से, पाँच विकारों के आकर्षण से या व्यक्ति और वस्तु के आकर्षण से ऊँचे होते हैं। यह बाबा ने इस दृश्य में दिखाया। तो इस प्रकार बाबा ने बच्चों का स्वागत किया और स्वागत के दृश्य का रहस्य सुनाया। फिर बाबा ने सभी बच्चों को अपनी बाहों में समा लिया। पहले तो सब बच्चे बाबा की बाहों में समा गये। बाबा की बाँहें भी इतनी लम्बी होती गईं तो सबको समा लिया। फिर तो बाबा ने एक-एक बच्चे के सिर पर प्यार का हाथ फेरा। लास्ट बच्चे के ऊपर भी बाबा का हाथ ऐसे पहुँच रहा था जैसे वह एकदम नज़दीक हो। ऐसे नहीं लग रहा था कि इतने बच्चों के सिर पर कैसे बाबा का हाथ पहुँचेगा। फिर बाबा ने एक-एक बच्चे को दृष्टि देते हुए सिर पर प्यार का अव्यक्त संदेश
हाथ घुमाया। बच्चे भी बाबा से दृष्टि लेते बाबा के प्यार में खोते जा रहे थे। फिर बाबा ने कहा कि – बाबा, बच्चों को इतना प्यार क्यों दे रहे हैं? क्योंकि बाबा देखते हैं कि ये मेरे मददगार बच्चे हैं। तुम बाबा की बाँहें हो ना! बाँहें सहयोग की निशानी होती है ना! इसलिए बाबा ने बच्चों को बाहों में समा लिया है और अपने हस्तों से ही मस्तक पर प्यार कर रहे हैं।
बाबा ने कहा कि – चारों ओर बाबा देख रहे हैं कि बच्चे बड़े उमंग-उत्साह से सेवा की धुन में
लगे हुए हैं। मैजॉरिटी बच्चों के दिल में यही उमंग है कि बस, जैसे बाबा की आश है हमारे लिए, वैसे ही बाबा को प्रत्यक्ष करके ही दिखाएँ। अभी ही, जल्दी-से-जल्दी बाबा को प्रत्यक्ष करें। बच्चों के ये उमंग-उत्साह के संकल्प के वायब्रेशन्स बाबा के पास पहुँच रहे हैं, इसलिए बाबा रिटर्न दे रहे हैं। वैसे तो बच्चे निष्कामी हैं। बच्चे नहीं कहते हैं कि रिटर्न चाहिए, लेकिन बाप स्वयं दे रहे हैं। क्योकि बाबा जानते हैं कि बच्चों ने बहुत मेहनत की है और बड़े उमंग-उत्साह से सेवा में आगे बढ़ रहे हैं। बच्चे ग्लोबल को-ऑपरेशन का कार्य कर रहे हैं और बाप स्नेह देने का कार्य कर रहे हैं। आप सर्व को सहयोगी बना रहे हो और रिटर्न में बाप आपको स्नेह दे रहे हैं। तो यह रिटर्न बाबा का जैसे दिखाई दे रहा था। बाबा ऐसे ही नहीं मिल रहे थे लेकिन एक-एक के सिर पर बड़े प्यार से हाथ घुमा रहे थे। जैसे कोई बहुत काम करके आता है तो उसकी थकावट मिटाने के लिए सिर पर हाथ घुमाते हैं। वैसे ही बाबा सबकी थकावट मिटा रहे थे।
उसके बाद बाबा ने कहा कि बच्ची, यह बाबा का प्यार है ना! जहाँ प्यार है वहाँ सब बातों को सेकण्ड में और सहज पार कर लेते हैं। बाबा का प्यार छोटी-मोटी बातों को सहज पार करा देता है। जो प्यार में सब बातों को पार कर देते हैं वे अपार प्राप्तियों के झूले में झूलते हैं। तो आज बाबा सभी बच्चों को तीन शब्दोंकी गिफ्ट दे रहे हैं 1. प्यार में रहो, 2. जो बातें सामने आती हैं उन्हें प्यार से सहज पार कर लो और 3. सदा अपार खुशी में, सुख में, आनन्द में, प्रेम में, ज्ञान में अपार प्राप्तियों के झूलों में झूलो। जब बच्चे ये तीनों शब्द याद रखेंगे तब बैलेंस रहेगा और जहाँ बैलेंस है वहाँ सभी फ़रिश्ते के माफिक ऊँचे होंगे तो कोई भी प्रकार का आकर्षण नहीं होगा। तो इसी रीति आज बाबा ने हम सब बच्चों को बहुत-बहुत प्यार किया, स्वागत भी किया और इन तीनों शब्दों की गिफ्ट भी दी। बाबा ने कहा कि इन तीन शब्दों को सदा साथ रखना। प्यार के कारण कोई भी चीज़ पार करने में मुश्किल नहीं होगी। मीटिंग वालों के लिए बाबा ने कहा कि वर्गीकरण की मीटिंग हो रही है। क्योंकि प्रोग्राम ही वर्गीकरण का हो रहा है। वर्गीकरण का अर्थ वर्गों में फँसना नहीं है लेकिन अपनी सेवा की मौज़ में आगे बढ़ते रहना है। यह निमित्त मात्र वर्ग बनाए जाते हैं, लेकिन बेहद का बाबा है, बेहद की सेवा है, बेहद का नशा है और बेहद की सफलता को पाना है।
अव्यक्त दिव्य संदेश–18
8 मई 1988
फ़रिश्ता बनना माना डबल लाइट बनना
- वतन में बाबा का मधुर स्वागत
जब वतन में पहुँची, तो देखा कि सभी भाई-बहनों की याद पहले ही बापदादा के पास पहुँच चुकी थी। बाबा की मधुर दृष्टि और स्नेह में समाते हुए मिलन का अनुभव हुआ।
जैसे-जैसे बाबा के नज़दीक पहुँची, वैसे-वैसे अनुभव हुआ कि पीछे अनेक भाई-बहन भी आ रहे हैं। बाबा ने सामने खड़ा करके कहा — “बच्ची, अब देखना।”
तब एक अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। केवल वहाँ उपस्थित भाई-बहन ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के अनेक भाई-बहन बाबा के पास आ रहे थे।
- लाइट की रॉड पर चलते फ़रिश्ते
सभी फ़रिश्तों का रूप आकारी लाइट का था, लेकिन उनके आने की रीति विशेष थी।
उनके पाँव धरती पर थे, पर वे धरती से ऊँची एक लाइट की रॉड पर चल रहे थे। सभी दो-दो या तीन-तीन की पंक्तियों में बाबा की ओर बढ़ रहे थे।
वे सीधे चलते हुए बाबा के पास पहुँचते और उनकी बाहों में समाते जाते थे।
बापदादा ने इस दृश्य का रहस्य समझाया कि लाइट की रॉड पर सीधे चलना बैलेंस की निशानी है। यदि बैलेंस थोड़ा भी कम होता, तो चलने में डगमगाहट होती।
- फ़रिश्ता बनना अर्थात् डबल लाइट बनना
बापदादा ने कहा कि फ़रिश्ता बनना माना डबल लाइट बनना।
डबल लाइट बनने का अर्थ है — बैलेन्स में रहना।
जिस प्रकार लाइट की रॉड पर चलने के लिए संतुलन आवश्यक था, उसी प्रकार जीवन में भी संतुलन आवश्यक है।
जो बच्चे याद और सेवा दोनों में बैलेंस रखते हैं, वे डबल लाइट फ़रिश्ता बनते हैं।
याद में रहना और सेवा करना — दोनों का उचित संतुलन ही इस संदेश का मुख्य आधार है।
- बुद्धि रूपी पाँव बैलेंस की रॉड पर रहें
बापदादा ने समझाया कि जिनके बुद्धि रूपी पाँव बैलेंस की रॉड पर रहते हैं, वे धरती के आकर्षण से सहज ही ऊँचे रहते हैं।
यहाँ धरती से ऊँची रॉड पर चलना एक आध्यात्मिक संकेत है।
जीवन में संतुलन रखने वाला व्यक्ति प्रकृति, पाँच विकारों, व्यक्तियों और वस्तुओं के आकर्षण से ऊपर रहने का पुरुषार्थ करता है।
इसलिए केवल फ़रिश्ता रूप की कल्पना नहीं करनी है, बल्कि बुद्धि को संतुलित रखकर व्यवहार में भी न्यारे और हल्के रहना है।
- याद और सेवा का संतुलन
मुरली में विशेष रूप से बताया गया है कि जो बच्चे याद और सेवा में बैलेंस रखते हैं, वे डबल लाइट बनते हैं।
यदि सेवा की व्यस्तता में याद की अचल स्थिति कम हो जाए, तो संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसी प्रकार केवल याद में रहने के लक्ष्य के साथ सेवा की जिम्मेदारी को भूलना भी संतुलन नहीं है।
इसलिए दोनों को साथ लेकर चलना है।
याद में स्थिरता और सेवा में सक्रियता — यही डबल लाइट बनने की विधि है।
- बाबा की बाहों में समाने का रहस्य
जब सभी फ़रिश्ते बाबा के पास पहुँचे, तो बाबा की बाहें जैसे-जैसे बढ़ती गईं और सभी बच्चे उनमें समाते गए।
बाबा ने एक-एक बच्चे के सिर पर प्यार से हाथ फेरा और दृष्टि दी।
बापदादा ने बताया कि बच्चे उनके मददगार हैं। बाँहें सहयोग की निशानी होती हैं, इसलिए बच्चों को बाहों में समाया।
यह दृश्य बच्चों के प्रति बाबा के स्नेह और सहयोग की भावना को प्रकट करता है।
- सेवा के उमंग-उत्साह का रिटर्न — बाबा का प्यार
बापदादा देख रहे हैं कि चारों ओर बच्चे उमंग-उत्साह से सेवा कर रहे हैं।
बहुत-से बच्चों के दिल में यही संकल्प है कि बाबा की आशाओं को पूरा करके उन्हें प्रत्यक्ष करके दिखाएँ।
बच्चे ग्लोबल को-ऑपरेशन के कार्य में लगे हैं और बाप स्नेह देने का कार्य कर रहे हैं।
बच्चे निष्कामी भाव से सेवा करते हैं; वे रिटर्न की अपेक्षा नहीं रखते। फिर भी बाबा उनकी मेहनत और लगन देखकर उन्हें प्यार देते हैं।
बाबा का प्यार बच्चों की थकावट मिटाने और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला रिटर्न है।
- प्यार से हर बात सहज पार होती है
बापदादा ने कहा कि जहाँ प्यार है, वहाँ छोटी-मोटी बातों को सेकण्ड में और सहज पार किया जा सकता है।
जब व्यक्ति प्यार में रहता है, तो परिस्थितियाँ उसे उतनी कठिन नहीं लगतीं। वह समस्याओं में उलझने के बजाय उन्हें सहजता से पार करने का पुरुषार्थ करता है।
जो प्यार में रहकर बातों को पार करते हैं, वे अपार प्राप्तियों के झूले में झूलते हैं।
इसलिए प्यार केवल भावना नहीं, बल्कि जीवन की परिस्थितियों को पार करने का आधार भी है।
- बाबा की तीन शब्दों की गिफ्ट
बापदादा ने सभी बच्चों को तीन शब्दों की गिफ्ट दी:
पहला — प्यार में रहो
अपने मन और व्यवहार में प्यार बनाए रखना है।
दूसरा — सामने आने वाली बातों को प्यार से सहज पार करो
समस्याओं और परिस्थितियों को प्यार के आधार पर सहजता से पार करना है।
तीसरा — अपार प्राप्तियों के झूले में झूलो
सदा खुशी, सुख, आनन्द, प्रेम, ज्ञान और अपार प्राप्तियों का अनुभव करते रहना है।
इन तीनों शब्दों को सदा स्मृति में रखने से बैलेंस बना रहेगा।
- जहाँ बैलेंस है, वहाँ आकर्षण से ऊँचे हैं
बापदादा ने स्पष्ट किया कि जब बच्चे इन तीन शब्दों को साथ रखते हैं, तो बैलेंस बना रहता है।
जहाँ बैलेंस है, वहाँ फ़रिश्ते के समान ऊँची स्थिति होती है और किसी भी प्रकार का आकर्षण प्रभावित नहीं करता।
यहाँ ऊँचा रहने का भाव है — याद और सेवा में संतुलन बनाए रखना तथा परिस्थितियों के बीच अपनी स्थिति को हल्का और स्थिर रखना।
- वर्गीकरण की मीटिंग का वास्तविक अर्थ
मिलन के समय वर्गीकरण की मीटिंग का भी उल्लेख हुआ।
बापदादा ने समझाया कि वर्गीकरण का अर्थ अलग-अलग वर्गों में फँस जाना नहीं है। वर्ग केवल सेवा के निमित्त बनाए जाते हैं।
मुख्य लक्ष्य है कि सभी अपनी सेवा की मौज में आगे बढ़ते रहें।
बाबा बेहद का है, सेवा बेहद की है, उमंग बेहद का है और सफलता भी बेहद की प्राप्त करनी है।
इसलिए किसी वर्ग की सीमाओं में उलझने के बजाय व्यापक दृष्टिकोण से सेवा करनी है।
- आत्म-चेकिंग: क्या मैं डबल लाइट हूँ?
प्रतिदिन स्वयं से ये प्रश्न पूछें:
क्या मेरी याद और सेवा में संतुलन है?
क्या मैं सेवा करते हुए भी अपनी आत्मिक स्थिति स्थिर रखता हूँ?
क्या मैं परिस्थितियों में डगमगाने के बजाय संतुलित रहता हूँ?
क्या मैं व्यक्तियों और वस्तुओं के आकर्षण से न्यारा रहने का पुरुषार्थ करता हूँ?
क्या मैं सेवा करने वाले सहयोगी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाता हूँ?
क्या मैं सेवा के बाद बाबा के स्नेह और शक्ति का अनुभव करता हूँ?
क्या मैं समस्याओं को प्यार से सहज पार करता हूँ?
क्या मैं खुशी, सुख, आनन्द, प्रेम और ज्ञान की प्राप्तियों का अनुभव करता हूँ?
क्या मैं वर्गीकरण में उलझने के बजाय बेहद की सेवा को महत्व देता हूँ?
क्या मैं अपने जीवन में डबल लाइट फ़रिश्ते की निशानियाँ प्रत्यक्ष कर रहा हूँ?
निष्कर्ष
8 मई 1988 के इस अव्यक्त दिव्य संदेश का मुख्य विषय है — फ़रिश्ता बनना माना डबल लाइट बनना।
डबल लाइट बनने के लिए याद और सेवा का संतुलन बनाए रखना है। संतुलित बुद्धि व्यक्तियों, वस्तुओं, प्रकृति और पाँच विकारों के आकर्षण से ऊपर रहने का पुरुषार्थ करती है।
बापदादा की तीन शब्दों की गिफ्ट — प्यार में रहो, बातों को प्यार से सहज पार करो और अपार प्राप्तियों के झूले में झूलो — इस संतुलन को बनाए रखने की विशेष विधि है।
इसलिए सदा प्यार में रहकर, सेवा में सक्रिय रहते हुए और याद में स्थिर रहकर डबल लाइट फ़रिश्ता बनना है।
छोटे प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. इस संदेश का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: फ़रिश्ता बनना माना डबल लाइट बनना।
प्रश्न 2. डबल लाइट बनने का अर्थ क्या है?
उत्तर: बैलेंस में रहना।
प्रश्न 3. लाइट की रॉड किसकी निशानी थी?
उत्तर: बैलेंस की।
प्रश्न 4. फ़रिश्ते किस प्रकार बाबा के पास आ रहे थे?
उत्तर: धरती से ऊँची लाइट की रॉड पर दो-दो या तीन-तीन की पंक्तियों में।
प्रश्न 5. बुद्धि रूपी पाँव किस पर रहने चाहिए?
उत्तर: बैलेंस की रॉड पर।
प्रश्न 6. याद और सेवा में क्या रखना है?
उत्तर: संतुलन।
प्रश्न 7. संतुलन रखने वाले बच्चे किस रूप में बनते हैं?
उत्तर: डबल लाइट फ़रिश्ता।
प्रश्न 8. धरती से ऊँची रॉड किस बात का प्रतीक थी?
उत्तर: आकर्षणों से ऊपर रहने का।
प्रश्न 9. किन आकर्षणों से ऊपर रहने का पुरुषार्थ करना है?
उत्तर: प्रकृति, पाँच विकारों, व्यक्तियों और वस्तुओं के आकर्षण से।
प्रश्न 10. बाबा की बाहें किसकी निशानी थीं?
उत्तर: सहयोग की।
प्रश्न 11. बाबा बच्चों को प्यार क्यों दे रहे थे?
उत्तर: क्योंकि बच्चे उनके मददगार हैं और सेवा में मेहनत कर रहे हैं।
प्रश्न 12. बच्चे किस प्रकार सेवा कर रहे थे?
उत्तर: उमंग-उत्साह और ग्लोबल को-ऑपरेशन के भाव से।
प्रश्न 13. सेवा के रिटर्न में बाबा क्या दे रहे थे?
उत्तर: स्नेह और प्यार।
प्रश्न 14. बाबा का प्यार बच्चों के लिए क्या करता है?
उत्तर: उनकी थकावट मिटाता और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
प्रश्न 15. प्यार में रहने से क्या लाभ होता है?
उत्तर: छोटी-मोटी बातों को सहज पार कर सकते हैं।
प्रश्न 16. बाबा की तीन शब्दों की गिफ्ट क्या थी?
उत्तर: प्यार में रहो, बातों को प्यार से पार करो और अपार प्राप्तियों के झूले में झूलो।
प्रश्न 17. पहली गिफ्ट क्या है?
उत्तर: प्यार में रहो।
प्रश्न 18. दूसरी गिफ्ट क्या है?
उत्तर: सामने आने वाली बातों को प्यार से सहज पार करो।
प्रश्न 19. तीसरी गिफ्ट क्या है?
उत्तर: खुशी, सुख, आनन्द, प्रेम, ज्ञान और अपार प्राप्तियों के झूले में झूलो।
प्रश्न 20. तीनों शब्दों को याद रखने से क्या होगा?
उत्तर: बैलेंस बना रहेगा।
प्रश्न 21. जहाँ बैलेंस है, वहाँ क्या विशेषता है?
उत्तर: फ़रिश्ते के समान ऊँची स्थिति रहती है।
प्रश्न 22. वर्गीकरण की मीटिंग का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: सेवा को व्यवस्थित करके आगे बढ़ाना।
प्रश्न 23. वर्गीकरण का अर्थ क्या नहीं है?
उत्तर: अलग-अलग वर्गों में फँस जाना।
प्रश्न 24. वर्ग किसलिए बनाए जाते हैं?
उत्तर: सेवा के निमित्त।
प्रश्न 25. सेवा की दृष्टि कैसी होनी चाहिए?
उत्तर: बेहद की।
प्रश्न 26. डबल लाइट बनने के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर: याद और सेवा में बैलेंस।
प्रश्न 27. क्या बच्चे रिटर्न की अपेक्षा से सेवा करते हैं?
उत्तर: नहीं, वे निष्कामी भाव से सेवा करते हैं।
प्रश्न 28. बाबा बच्चों को किस कार्य में सहयोगी देख रहे थे?
उत्तर: ग्लोबल को-ऑपरेशन के कार्य में।
प्रश्न 29. फ़रिश्ता बनने के लिए कौन-सी स्थिति बनाए रखनी है?
उत्तर: संतुलित, हल्की और आकर्षणों से ऊँची स्थिति।
प्रश्न 30. इस संदेश की मुख्य शिक्षा क्या है?
उत्तर: प्यार में रहकर, याद और सेवा का बैलेंस बनाए रखते हुए डबल लाइट फ़रिश्ता बनना।
📝 74. साकार मुरली | 14-10-2026
20 Questions × 5 Marks = 100 Marks
