52 | अव्यक्त मुरली | 02-02-1970

“आत्मिक पावर की परख”

आज बापदादा हरेक का प्रोजेक्टर शो देख रहे हैं। आप लोग भी प्रोजेक्टर शो रखते हो? प्रोजेक्टर कौन सा है, जिस द्वारा चित्र देखते हो? हरेक के नयन प्रोजेक्टर हैं। इस प्रोजेक्टर द्वारा कौन-सा चित्र दुनिया को दिखला सकते हो? वह है साइंस की शक्ति का प्रोजेक्टर और यह है ईश्वरीय शक्ति का प्रोजेक्टर। जितना-जितना प्रोजेक्टर पावरफुल होता है उतना ही दृश्य क्लीयर देखने में आता है। वैसे ही तुम सभी बच्चों के यह दिव्य नेत्र जितना-जितना क्लीयर अर्थात् रूहानियत से सम्पूर्ण होंगे उतना ही तुम बच्चों के नयनों द्वारा कई चित्र देख सकते हैं। और ऐसे ही स्पष्ट दिखलाई देंगे जैसे प्रोजेक्टर द्वारा स्पष्ट दिखाई देते हैं। तो इन नयनों द्वारा बापदादा और पूरी रचना के स्थूल, सूक्ष्म, मूल तीनों लोकों के चित्र दिखाई दे सकते हैं। कोई भी आपके सामने आये तो सर्व साक्षात्कार तुम्हारे नयनों द्वारा कर सकते हैं। जितनी-जितनी लाइट तेज होगी उतना चित्र क्लीयर। बल्ब पावरफुल कितना है, वह फिर बापदादा कैसे देखते हैं, मालूम है? अपना बल्ब देखा है कि कितने पावर का है? हरेक ने अपने बल्ब की पावर देखी है? जो समझते हैं हम अपनी लाइट की परसेन्टेज को जानते हैं कि हमारा बल्ब किस प्रकार का है, वह हाथ उठायें। हमारी आत्मा कितनी पावरफुल है इसकी परख किस आधार से कर सकते हो? (चार्ट से) वह भी टोटल बात हो गई कौन-सी बात से अपनी परख कर सकते हो? लाइट में विशेषता क्या होती है? उनमें विशेष गुण यह होता है जो चीज़ जैसी है वैसे ही स्पष्ट देखने में आती है। अन्धियारे में जो जैसी वस्तु है वैसे देखने में नहीं आती है। तो लाइट का विशेष गुण है अस्पष्ट को स्पष्ट करना। इस रीति से अपनी लाइट की परसेन्टेज़ परखने का तरीका यही है। एक तो अपने पुरुषार्थ का मार्ग स्पष्ट होगा अर्थात् लाइन क्लीयर देखने में आयेगी। दूसरी बात अपना भविष्य स्टेट्स भी देखने में आयेगा। तीसरी बात जिन्हों की सर्विस करते हो तो जितनी खुद की रोशनी पावरफुल होगी, उन्हों को भी इतना ही सहज और स्पष्ट मार्ग दिखा सकेंगे। वह भी सहज ही अपने पुरुषार्थ में चल पड़ेगा। अपनी मंजिल सहज देखने में आयेगी। जितना लाइट की परसेन्टेज ज्यादा होगी। उतना ही सभी बातों में स्पष्ट देखने में आयेगा। अगर लाइट की परसेन्टेज कम है तो खुद भी पुरुषार्थ में स्पष्ट नहीं होगा और जिसको मार्ग बताते हैं वह भी सहज और स्पष्ट अपने मार्ग और मंजिल को जान नहीं सकेंगे। जिसकी लाइट पावरफुल होगी वह न खुद उलझते न दूसरे को उलझाते हैं। तो अपने पुरुषार्थ अपनी सर्विस से देख सकते हो कि जिन्हों की सर्विस करते हो उन्हों का मार्ग स्पष्ट होता है। अगर मार्ग स्पष्ट नहीं होता है तो अपनी लाइट की परसेन्टेज की कमी है। कई खुद कभी कदम-कदम पर ठोकर खाते हैं और उनकी रचना भी ऐसी होती है। अभी आप एक-एक मास्टर रचयिता हो। तो मास्टर रचयिता अपनी रचना से भी अपने पावर को परख सकते हैं। जैसा बीज होता है वैसा ही फल निकलता है। अगर बीज पावरफुल नहीं होता है तो कहाँ-कहाँ फूल निकलेंगे, फल निकलेंगे लेकिन स्वीकार करने योग्य नहीं होते हैं। जो बहुत सुन्दर वा खुशबूदार होंगे, जो फल अच्छा होगा उनको ही खरीद करेंगे ना। अगर बीज ही पावरफुल नहीं होता है तो रचना भी जो पैदा होती है वह स्वीकार करने योग्य नहीं होती। इसलिए अपने लाइट की परसेन्टेज को बढ़ाओ। दिन प्रतिदिन सभी के मस्तक और नयन ऐसे ही सर्विस करें जैसे आप का प्रोजेक्टर शो सर्विस करता है। कोई भी सामने आयेंगे वह चित्र आपके नयनों में देखेंगे, नयन को देखते ही बुद्धियोग द्वारा अनेक साक्षात्कार होंगे। ऐसे साक्षात्कार मूर्त अपने को बनाना है। लेकिन साक्षात्कार मूर्त वह बन सकेंगे जो सदैव साक्षी स्थिति में स्थित होंगे। उनके नयन प्रोजेक्टर का काम करेंगे। उनका मस्तक सदैव चमकता हुआ दिखाई पड़ेगा। होली के बाद सांग बनाते हैं ना। देवताओं को सजाकर मस्तक में बल्ब जलाते हैं। यह सांग क्यों बनाते हैं? यह किस समय का प्रैक्टिकल रूप है? इस समय का। जो फिर आपके यादगार बनाते आते हैं। तो एक-एक के मस्तक में लाइट देखने आये। विनाश के समय भी यह लाइट रूप आपको बहुत मदद देगी। कोई किस भी वृत्ति वाला आपके सामने आयेंगे। वह इस देह को न देख आपके चमकते हुए इस बल्ब को देखेंगे। जो बहुत तेज लाइट होती है और उसको जब देखने लगते हैं तो दूसरी सारी चीज़ें छिप जाती हैं। वैसे ही जितनी-जितनी आप सभी की लाइट तेज होगी उतना ही उन्हों को आपकी देह देखते हुए भी नहीं देखने आयेगी। जब देह को देखेंगे ही नहीं तो तमोगुणी दृष्टि और वृत्ति स्वत: ही खत्म हो जायेगी। यह परीक्षाएं आनी है। सभी प्रकार की परिस्थितियां पास करनी हैं।

यह जो ग्रुप है इन्हों का हंसी में एक नाम रखा है। आज वतन में चिट-चैट चल रही थी इसी बात पर। कोई ने हंसी में कहा था बड़ी बहनें हमारी हेड्स हैं और हम फिर लेग (टांगे) हैं। तो बापदादा ने फिर नाम रखा है इन्हों के बड़े तो हैं हेड्स। लेकिन यह हैंडिल हैं। मोटर में हैंडिल बिगर काम चल न सके। हैंडिल द्वारा ही मोटर को मोड़ सकते हैं। तो हेड्स भी इन हैंडिल के बिना सर्विस को हैंडिल नहीं कर सकते हैं। यह जो ग्रुप है यह है हैंडिल्स। इनके बिना हेड्स कुछ भी कर नहीं सकते। जो भी आते हैं उनको पहले-पहले हैंडिल करने वाले यह हैंडिल हैं ना। तो आप लोगों के ऊपर इतनी जिम्मेवारी है। अगर आप हैंडिल ठीक नहीं, तो सर्विस की हैंडलिंग भी ठीक नहीं होगी। लेकिन यह सिर्फ देखना हैंडिल तो है लेकिन हेड्स को कभी हैंडिल नहीं करना। हेड का हैंड बन कर रहना। बापदादा के भी राइट हैंड हैं ना, लेफ्ट हैंड भी हैं। राईट हैंड को फुल पावर होती है, लेकिन होता हैंड है। हेड नहीं होता। हैंडिल तो हैं ना। लेकिन कैसे हैंडिल करना है और कैसे बापदादा के राइट हैंड बनें, इसके लिए यहाँ आये हो। यह ग्रुप ऐसा है जो एक-एक कमाल कर सकते हैं। सर्विस को सफलता के रूप में ला सकते हैं। सर्विस में सफलता लाने के लिए दो बातें ध्यान में रखनी हैं। सर्व बातों में सहयोगी तो हो लेकिन सर्विस में सफलता लाने के निमित्त विशेष यह ग्रुप है। इसके लिए दो बातें विशेष ध्यान में रखना है – एक है निशाना पूरा और दूसरा नशा भी पूरा होना। नशा और निशाना यह दो बातें इस ग्रुप में विशेष आनी चाहिए। जब निशाना ठीक होता है तो एक धक से किसको मरजीवा बना सकते हो। जो निशानेबाज होते हैं वह एक ही गोली से ठीक निशाना करते हैं। जिनको निशाना नहीं आता, उनको 3-4 बारी गोली चलानी पड़ती है। अगर अपनी स्थिति का भी निशाना और दूसरे की सर्विस करने का भी निशाना ठीक होगा और साथ-साथ नशा भी सदैव एकरस रहता होगा तो सर्विस में सफलता ज्यादा पा सकते हो। कभी नशा उतर जाता, कभी निशाना छूट जाता, यह दोनों बातें ठीक होनी चाहिए। जिसमें जितना खुद नशा होगा उतना ही निशाना ठीक कर सकेंगे। सर्विसएबुल तो हो लेकिन सर्विस में अब क्या विशेषता लानी है? सर्विसएबुल उनको कहा जाता है जिनका एक सेकेण्ड और एक संकल्प भी बिना सर्विस के ना जाय, हर सेकेण्ड सर्विस के प्रति हो। चाहे अपनी सर्विस चाहे दूसरों की सर्विस। लेकिन जब हो ही सर्विसएबुल, तो समय और संकल्प सर्विस के बिगर नहीं जाना चाहिए। फरमानबरदार का अर्थ ही है फरमान पर चलना। मुख्य फरमान है निरन्तर याद में रहो। अगर इस फरमान पर नहीं चलते तो क्या कहेंगे? जितना-जितना इस फरमान को प्रैक्टिकल में लायेंगे उतना ही प्रत्यक्ष फल मिलेगा। पुरुषार्थ में चलते हुए कौनसा विघ्न देखने में आता हैं, जो सम्पूर्ण होने में रुकावट डालता है? विशेष विघ्न व्यर्थ संकल्पों के रूप में देखा गया है। तो इससे बचने के लिये क्या करना है? एक तो कभी अन्दर की वा बाहर की रेस्ट न लो। अगर रेस्ट में नहीं होंगे तो वेस्ट नहीं जायेगा। और दूसरी बात अपने को सदैव गेस्ट समझो। अगर गेस्ट समझेंगे और रेस्ट नहीं करेंगे तो वेस्ट नहीं जायेगा। चाहे संकल्प, चाहे समय, यह है सहज तरीका। अच्छा अब फिर समाप्ती के दिन सभी के मस्तक के बल्ब कितने पावर के हैं वह देखेंगे। और पावरफुल होंगे तो माया उस पावर के आगे आने का साहस नहीं रखेगी। जितना बल्ब की पावर होती है उतना सामना कोई नहीं कर सकता। ऐसी पावरफुल स्थिति देखेंगे। सर्विसएबुल हो, अब पावरफुल बनो। एक्टिव हो, लेकिन एक्यूरेट बनो। तो इस ग्रुप को विशेष छाप कौन-सा लगना है? एक्यूरेट। कोई भी बात में सदैव एक्यूरेट। चाहे मनसा, चाहे वाचा, चाहे कर्मणा – तीनों में एक्यूरेट। 

आत्मिक पावर की परख — मेरी लाइट कितनी पावरफुल है?

अस्पष्ट को स्पष्ट करने वाली आत्मिक शक्ति का रहस्य

2 फरवरी 1970 | अव्यक्त मुरली


आज का मुख्य विषय: आत्मिक पावर की परख

आज का मुख्य प्रश्न है—

“मेरी आत्मिक लाइट कितनी पावरफुल है?”

आत्मिक शक्ति की परख केवल इस बात से नहीं करनी है कि मुझे योग अच्छा लगता है या नहीं। असली परख यह है कि मेरी आत्मिक शक्ति मेरे जीवन में कितनी स्पष्टता, शक्ति और सफलता के रूप में दिखाई दे रही है।

यदि आत्मिक लाइट पावरफुल है, तो जो बात पहले अस्पष्ट थी, वह स्पष्ट दिखाई देने लगेगी।


नयन ही हमारे प्रोजेक्टर हैं

मुरली में नयनों को प्रोजेक्टर के समान बताया गया है।

जैसे प्रोजेक्टर की लाइट जितनी पावरफुल होगी, चित्र उतना ही स्पष्ट दिखाई देगा, वैसे ही आत्मिक लाइट जितनी शक्तिशाली होगी, हमारी दृष्टि उतनी ही स्पष्ट होगी।

नयन = प्रोजेक्टर

आत्मिक शक्ति = उसकी लाइट

इसलिए प्रश्न है—

क्या मेरे नयन केवल बाहरी रूप देखते हैं, या उनमें आत्मिक दृष्टि की स्पष्टता भी दिखाई देती है?


अस्पष्ट दृष्टि से स्पष्ट दृष्टि की ओर

जब ज्ञान की तीसरी आँख स्पष्ट होती है, तब ऐसी बातें भी समझ में आने लगती हैं जो केवल बाहरी आँखों से दिखाई नहीं देतीं।

पहले जो अस्पष्ट था, वह स्पष्ट होने लगता है।

मार्ग स्पष्ट

मंजिल स्पष्ट

पुरुषार्थ स्पष्ट

और जब स्वयं का मार्ग स्पष्ट होता है, तभी हम दूसरे को भी उसका मार्ग स्पष्ट दिखा सकते हैं।

इसलिए—

“ना खुद उलझो और ना दूसरों को उलझाओ।”


आत्मिक लाइट की विशेषता: अस्पष्ट को स्पष्ट करना

लाइट का विशेष गुण है—अस्पष्ट को स्पष्ट करना।

इसी आधार पर अपनी आत्मिक लाइट की परख करनी है।

यदि मेरी आत्मिक लाइट पावरफुल है तो:

  • मेरा पुरुषार्थ स्पष्ट होगा।
  • मेरा भविष्य का लक्ष्य स्पष्ट होगा।
  • मेरी सेवा स्पष्ट और प्रभावशाली होगी।
  • जिनकी मैं सेवा करता हूँ, उनका मार्ग भी स्पष्ट होगा।

लेकिन यदि मेरी लाइट कमजोर है, तो मैं स्वयं भी उलझ सकता हूँ और दूसरों को भी उलझा सकता हूँ।


आत्मिक पावर की वास्तविक परख

अपनी आत्मिक शक्ति की परख केवल अनुभव या भावना से नहीं करनी है।

अपने आप से पूछना है—

क्या मेरा पुरुषार्थ स्पष्ट है?

क्या मेरा भविष्य का लक्ष्य स्पष्ट है?

क्या मेरी सेवा से दूसरे का मार्ग स्पष्ट होता है?

क्या मैं स्वयं उलझता हूँ?

क्या मेरी वजह से दूसरे भी उलझते हैं?

क्या मेरे नयन और मस्तक आत्मिक शक्ति की झलक देते हैं?

क्या मैं साक्षी स्थिति में रहता हूँ?

क्या मेरे संकल्प व्यर्थ जाते हैं?

क्या मेरा हर सेकण्ड और हर संकल्प सेवा में लग रहा है?

यही आत्मिक पावर की practical checking है।


साक्षी स्थिति और वर्तमान में रहना

साक्षी का अर्थ केवल देखने वाला होना नहीं है।

साक्षी = उपस्थित और वर्तमान में स्थित।

जब मन अतीत की बातों या भविष्य की कल्पनाओं में चला जाता है, तो वर्तमान की शक्ति कम हो जाती है।

इसलिए आत्मिक पावर को बढ़ाने के लिए वर्तमान में रहना आवश्यक है।

वर्तमान में रहो → संकल्प स्पष्ट करो → स्थिति पावरफुल बनाओ।


ज्ञान बहुत होना पर्याप्त नहीं

सिर्फ ज्ञान का डेटा बढ़ जाना पर्याप्त नहीं है।

ज्ञान को:

समझना → मंथन करना → स्पष्ट करना → जीवन में धारण करना

जरूरी है।

यदि मुरली सुनते समय बुद्धि किसी दूसरी समस्या, परिवार या भविष्य की चिंता में उलझी हुई है, तो ज्ञान सामने होते हुए भी उसकी स्पष्टता कम हो सकती है।

इसलिए ज्ञान की लाइट को स्पष्ट करने के लिए स्थिर बुद्धि आवश्यक है।


आत्मिक लाइट और सेवा की सफलता

आत्मिक लाइट जितनी तेज होगी:

स्पष्टता उतनी अधिक होगी।

स्पष्टता अधिक होगी तो:

पुरुषार्थ अधिक स्पष्ट होगा।

पुरुषार्थ स्पष्ट होगा तो:

सेवा अधिक प्रभावशाली होगी।

और सेवा प्रभावशाली होगी तो:

दूसरों का मार्ग भी स्पष्ट होगा।

आत्मिक लाइट → स्पष्टता → पुरुषार्थ → प्रभावशाली सेवा → दूसरों का स्पष

“आत्मिक पावर की परख”

1. आज की मुरली का मुख्य विषय क्या है?

आत्मिक पावर की परख।

2. आत्मिक पावर की मुख्य पहचान क्या है?

अस्पष्ट को स्पष्ट करना।

3. नयनों को किसके समान बताया गया है?

प्रोजेक्टर के समान।

4. प्रोजेक्टर की लाइट किसका प्रतीक है?

आत्मिक शक्ति का।

5. लाइट जितनी पावरफुल होगी, क्या होगा?

दृश्य उतना ही स्पष्ट दिखाई देगा।

6. दिव्य नेत्र कब क्लियर होते हैं?

जब रूहानियत से सम्पूर्ण होते हैं।

7. आत्मिक लाइट का विशेष गुण क्या है?

अस्पष्ट को स्पष्ट करना।

8. आत्मिक शक्ति पावरफुल होने पर क्या स्पष्ट होता है?

मार्ग और मंजिल।

9. अपनी आत्मिक पावर की परख किससे करनी है?

अपने पुरुषार्थ और सेवा से।

10. केवल योग अच्छा लगना क्या पर्याप्त है?

नहीं।

11. आत्मिक पावर की practical परख क्या है?

क्या मेरा पुरुषार्थ स्पष्ट है?

12. भविष्य के बारे में क्या स्पष्ट होना चाहिए?

भविष्य का लक्ष्य।

13. सेवा की सफलता की परख क्या है?

क्या मेरी सेवा से दूसरे का मार्ग स्पष्ट होता है?

14. पावरफुल आत्मा स्वयं क्या नहीं करती?

खुद नहीं उलझती और दूसरों को नहीं उलझाती।

15. आत्मिक दृष्टि कमजोर होने पर क्या हो सकता है?

स्वयं और दूसरों को उलझा सकते हैं।

16. ज्ञान का तीसरा नेत्र क्या करता है?

जो सामान्य आँखों से स्पष्ट नहीं दिखता, उसे स्पष्ट करता है।

17. नयन किस कार्य के लिए प्रोजेक्टर हैं?

दिव्य चित्र को स्पष्ट दिखाने के लिए।

18. आत्मिक लाइट तेज होने से सेवा कैसी होती है?

प्रभावशाली।

19. ज्ञान अधिक होना ही पर्याप्त है?

नहीं, ज्ञान को स्पष्ट समझना और धारण करना जरूरी है।

20. ज्ञान को स्पष्ट करने के लिए क्या चाहिए?

मंथन और स्थिर बुद्धि।

21. बुद्धि में तूफान होने से क्या होता है?

ज्ञान स्पष्ट नहीं होता।

22. मुरली सुनते समय मन कहाँ होना चाहिए?

वर्तमान में।

23. वर्तमान से निकलकर मन कहाँ चला जाता है?

भूतकाल या भविष्य में।

24. साक्षी का अर्थ क्या है?

वर्तमान में उपस्थित रहना।

25. साक्षी स्थिति में क्या नहीं होना चाहिए?

व्यर्थ संकल्प।

26. हर सेकण्ड किसमें लगना चाहिए?

सेवा में।

27. हर संकल्प किसके लिए होना चाहिए?

सेवा के लिए।

28. मनसा, वाचा और कर्मणा में क्या होना चाहिए?

एक्यूरेट।

29. “निशाना” किससे संबंधित है?

स्पष्ट लक्ष्य से।

30. “नशा” कैसा होना चाहिए?

एकरस।

31. निशाना और नशा ठीक होने से क्या मिलता है?

सेवा में सफलता।

32. आत्मिक पावर का प्रभाव कहाँ दिखाई देना चाहिए?

व्यवहार और सेवा में।

33. केवल ज्ञान सुनना पर्याप्त क्यों नहीं?

ज्ञान को जीवन में स्पष्ट और practical बनाना है।

34. आत्मिक लाइट तेज होने से पहले क्या बढ़ता है?

अंदर की स्पष्टता।

35. अंदर की स्पष्टता बढ़ने से क्या स्पष्ट होता है?

पुरुषार्थ।

36. पुरुषार्थ स्पष्ट होने से क्या प्रभाव पड़ता है?

सेवा प्रभावशाली होती है।

37. सेवा प्रभावशाली होने से दूसरे को क्या मिलता है?

मार्ग की स्पष्टता।

38. आत्मिक शक्ति की एक बड़ी परीक्षा क्या है?

क्या मेरे संपर्क में आने वाला अपनी मंजिल स्पष्ट देख सकता है?

39. अपनी लाइट पावरफुल करने के बाद क्या करना है?

दूसरों का रास्ता रोशन करना है।

40. आत्मिक पावर की परख का मुख्य प्रश्न क्या है?

“मेरी लाइट कितनी पावरफुल है?”

📝 Avyakt Murli Quiz — 02-02-1970
Series No. 50 • 20 Questions × 5 Marks = 100

सभी 20 प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है। / All 20 questions are compulsory.

BK Om Shanti - E-015.2A

Murli Type: Avyakt Murli

Master Murli Video: Watch on YouTube

Official Murli Source: Open Official Source


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“आत्मिक पावर की परख”

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