24.10.1991
ग्लोबल हॉस्पिटल के उद्घाटन अवसर पर अव्यक्त वतन से प्राप्त त्रिकालदर्शी बापदादा का अव्यक्त संदेश
आज के शुभ दिवस पर प्यारे बापदादा ने कहा कि यह हॉस्पिटल नहीं लेकिन यह होली स्थल है. होली प्लेस है। जैसे किसी भी होली प्लेस में अपने किये हुए पाप कर्म माफ कराने के लिए जाते है. यह हॉस्पिटल प्रैक्टिकल होली प्लेस का काम करेगा। क्योंकि यहाँ पिछले किये हुए कर्मों का हिसाब-किताब शरीर से भी चुक्तू होगा। जैसे होली प्लेस की यात्रा पर जाते हैं तो हॉस्पिटल भी यात्रा ही है जहाँ कर्म के हिसाब को हल्का करने के लिए आयेगे। बाबा ने कहा कि हॉस्पिटल को जब होली स्थल समझेंगे तब वह वायब्रेशन्स सबको आयेंगे। दूसरा- यहाँ पर जो भी आत्माएँ पेशेन्ट (मरीज) बनकर आयेंगे वे इस हॉस्पिटल में पेशेन्स (धीरज) में रहने की शक्ति धारण करके जायेगी। तीसरा – यह हॉस्पिटल दूसरे हॉस्पिटल से भिन्न होगा। भिन्न-भिन्न कमरे व मशीनरी तो वहाँ भा होती लेकिन यहाँ एक ऐसा भी कमरा है जहाँ अनेक जन्मों के लिए बीमारी से विदाई मिल सकती है। राजयोग का कमरा सदाकाल के लिए हर एक को बीमारी से मुक्त करेगा। पिछले कर्मों के हिसाब-किताब तो कुछ योग से, कुछ भोग से चुक्तू करने पड़ेंगे लेकिन अनेक जन्मों के लिए एवर हेल्दी और वेल्दी बनने के लिए, यह जो कमरा बनाया है, यह सदा के लिए बीमारियों से विदाई और परमात्मा पिता से बधाई लेने का कमरा है, इसलिए यह दूसरे स्थानों से न्यारा है।फिर बाबा ने सभी आये हुए सहयोगी-सो-योगी बच्चों को याद-प्यार दी और कहा कि – जिन बच्चों ने भी संकलप से, बोल से, कर्म से जो भी सेवा की है, निमित्त बने हैं, इस शुभ कार्य के निमित्तबनने वाले बच्चों को बधाई देना। जो भी निमित्त बने हैं, उन्हें बापदादा की, ब्राह्मण परिवार की दुआएँ मिलती हैं। बाबा ने कहा कि इस हॉस्पिटल में नई विधि से ट्रीटमेंट करना। वह नई विधि है – अपनी शुभ भावना और शुभ कामना के वायब्रेशन्स। इन वायब्रेशन्स से ट्रीटमेंट करेंगे तो हर एक हेल्दी, वेल्दी और हैपी बन जायेगा। ऐसा कहते बाबा ने कहा कि सफलता आप ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है, इसलिए सफलता तो है ही।
ग्लोबल हॉस्पिटल — एक होली प्लेस
दिनांक: 24 अक्टूबर 1991
ग्लोबल हॉस्पिटल के उद्घाटन अवसर पर अव्यक्त वतन से प्राप्त त्रिकालदर्शी बापदादा का अव्यक्त संदेश
प्रस्तावना
ग्लोबल हॉस्पिटल के उद्घाटन के शुभ अवसर पर बापदादा ने इस हॉस्पिटल को केवल इलाज का स्थान नहीं, बल्कि होली प्लेस अर्थात् पवित्र स्थल बताया।
बाबा ने समझाया कि यहाँ आने वाली आत्माओं को शारीरिक उपचार के साथ धैर्य की शक्ति भी प्राप्त होनी चाहिए। हॉस्पिटल में राजयोग का एक ऐसा विशेष कमरा है, जहाँ आत्माएँ अनेक जन्मों के लिए बीमारी से मुक्ति पाने का अनुभव कर सकती हैं।
बापदादा ने उपचार की एक नवीन विधि भी बताई—अपनी शुभ भावना और शुभ कामना के वायब्रेशन्स द्वारा सेवा करना।
1. हॉस्पिटल नहीं, होली प्लेस
बापदादा ने कहा कि यह हॉस्पिटल नहीं, बल्कि होली स्थल है।
जैसे लोग अपने पाप कर्मों की क्षमा प्राप्त करने के लिए होली प्लेस में जाते हैं, वैसे ही यह हॉस्पिटल भी प्रैक्टिकल होली प्लेस का कार्य करेगा।
यहाँ शरीर के माध्यम से पिछले कर्मों के हिसाब-किताब भी चुक्तू होंगे।
मुख्य शिक्षा: हॉस्पिटल को केवल इलाज का स्थान नहीं, बल्कि पवित्र वायब्रेशन्स देने वाला होली प्लेस समझना है।
2. कर्मों का हिसाब-किताब चुक्तू करने की यात्रा
बाबा ने हॉस्पिटल को एक यात्रा के समान बताया।
जैसे होली प्लेस की यात्रा पर जाते हैं, वैसे ही हॉस्पिटल में आने वाली आत्माएँ अपने कर्मों के हिसाब-किताब को हल्का करने के लिए आती हैं।
कुछ हिसाब-किताब योग से और कुछ भोग से चुक्तू करने पड़ेंगे।
मुख्य शिक्षा: कर्मों के हिसाब-किताब को हल्का करने के लिए योग की शक्ति धारण करनी है।
3. पेशेन्ट से पेशेन्स की शक्ति लेकर जाना
बाबा ने एक सुन्दर बात समझाई कि इस हॉस्पिटल में जो भी आत्माएँ पेशेन्ट अर्थात् मरीज बनकर आएँगी, वे यहाँ से पेशेन्स अर्थात् धैर्य की शक्ति लेकर जाएँगी।
यह हॉस्पिटल केवल बीमारी के उपचार का स्थान नहीं होगा, बल्कि धैर्य धारण करने की शक्ति देने वाला स्थान भी होगा।
मुख्य शिक्षा: यहाँ आने वाली प्रत्येक आत्मा धैर्य की शक्ति प्राप्त करके जाए।
4. राजयोग का विशेष कमरा
बाबा ने बताया कि इस हॉस्पिटल में अनेक कमरों और मशीनों के साथ एक विशेष कमरा भी है।
यह राजयोग का कमरा है।
दूसरे हॉस्पिटल में शरीर की बीमारी का उपचार होता है, लेकिन इस कमरे में राजयोग द्वारा आत्मा को अनेक जन्मों के लिए बीमारी से मुक्त होने का अनुभव कराया जाएगा।
मुख्य शिक्षा: राजयोग का कमरा आत्मा को सदाकाल के लिए स्वस्थ बनने का मार्ग दिखाने वाला है।
5. एवर हेल्दी और वेल्दी बनने का साधन
बाबा ने कहा कि अनेक जन्मों के लिए एवर हेल्दी और वेल्दी बनने के लिए यह विशेष कमरा बनाया गया है।
यहाँ आत्मा को सदा के लिए बीमारियों से विदाई और परमात्मा पिता से बधाई लेने का अवसर मिलता है।
इसी कारण यह हॉस्पिटल दूसरे स्थानों से न्यारा है।
मुख्य शिक्षा: राजयोग द्वारा आत्मा को अनेक जन्मों के लिए स्वस्थ और सम्पन्न बनाने का पुरुषार्थ करना है।
6. सहयोगी और सो-योगी बच्चों को बधाई
बापदादा ने सभी सहयोगी-सो-योगी बच्चों को याद-प्यार दिया।
जिन बच्चों ने संकल्प, बोल और कर्म से इस शुभ कार्य में सेवा की, उन्हें विशेष बधाई दी।
बाबा ने कहा कि इस शुभ कार्य के निमित्त बनने वाले बच्चों को बापदादा और ब्राह्मण परिवार की दुआएँ मिलती हैं।
मुख्य शिक्षा: शुभ कार्य में संकल्प, बोल और कर्म से सहयोग देना श्रेष्ठ भाग्य है।
7. उपचार की नई विधि — शुभ भावना और शुभ कामना
बाबा ने हॉस्पिटल में उपचार की एक नई विधि बताई।
यह विधि है—अपनी शुभ भावना और शुभ कामना के वायब्रेशन्स द्वारा सेवा करना।
जब उपचार करने वाले अपनी शुभ भावना और शुभ कामना के वायब्रेशन्स देंगे, तो आने वाली आत्माएँ हेल्दी, वेल्दी और हैपी बनेंगी।
मुख्य शिक्षा: शुभ भावना और शुभ कामना के शक्तिशाली वायब्रेशन्स द्वारा सेवा करनी है।
8. हेल्दी, वेल्दी और हैपी बनाना
बाबा ने इस हॉस्पिटल का उद्देश्य स्पष्ट किया कि यहाँ आने वाली प्रत्येक आत्मा को हेल्दी, वेल्दी और हैपी बनाने की सेवा करनी है।
इसके लिए केवल बाहरी उपचार नहीं, बल्कि शुभ संकल्पों और श्रेष्ठ वायब्रेशन्स का भी सहयोग देना है।
मुख्य शिक्षा: हर आत्मा को स्वास्थ्य, सम्पन्नता और खुशी का अनुभव कराने का निमित्त बनना है।
9. सफलता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार
बाबा ने अन्त में कहा कि सफलता आप ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है।
इसलिए सफलता तो है ही।
इस शुभ कार्य में निमित्त बने सभी बच्चों को बाबा ने बधाई और दुआएँ दीं।
मुख्य शिक्षा: अपने जन्म-सिद्ध अधिकार को स्मृति में रखकर सेवा में सफलता प्राप्त करनी है।
मुरली पर आधारित 30 छोटे प्रश्न और उत्तर
भाग 1: हॉस्पिटल का आध्यात्मिक महत्व
प्रश्न 1. बापदादा ने ग्लोबल हॉस्पिटल को क्या कहा?
उत्तर: होली प्लेस अर्थात् पवित्र स्थल।
प्रश्न 2. हॉस्पिटल को होली प्लेस क्यों कहा गया?
उत्तर: क्योंकि यह पिछले कर्मों के हिसाब-किताब को हल्का करने का स्थान भी बनेगा।
प्रश्न 3. होली प्लेस में लोग किस उद्देश्य से जाते हैं?
उत्तर: अपने पाप कर्मों की क्षमा प्राप्त करने के लिए।
प्रश्न 4. हॉस्पिटल में शरीर के माध्यम से क्या चुक्तू होगा?
उत्तर: पिछले कर्मों का हिसाब-किताब।
प्रश्न 5. बाबा ने हॉस्पिटल को किसके समान बताया?
उत्तर: एक यात्रा के समान।
भाग 2: पेशेन्ट और पेशेन्स
प्रश्न 6. पेशेन्ट का अर्थ क्या है?
उत्तर: मरीज।
प्रश्न 7. पेशेन्स का अर्थ क्या है?
उत्तर: धैर्य।
प्रश्न 8. हॉस्पिटल में आने वाली आत्माएँ कौन-सी शक्ति लेकर जाएँगी?
उत्तर: धैर्य की शक्ति।
प्रश्न 9. कर्मों का हिसाब-किताब किन दो विधियों से चुक्तू होगा?
उत्तर: कुछ योग से और कुछ भोग से।
प्रश्न 10. हॉस्पिटल की विशेषता दूसरे हॉस्पिटल से भिन्न क्यों है?
उत्तर: क्योंकि यहाँ राजयोग का विशेष कमरा भी है।
भाग 3: राजयोग का विशेष कमरा
प्रश्न 11. हॉस्पिटल में विशेष कमरा कौन-सा है?
उत्तर: राजयोग का कमरा।
प्रश्न 12. राजयोग का कमरा किस उद्देश्य से बनाया गया है?
उत्तर: अनेक जन्मों के लिए बीमारी से मुक्ति का अनुभव कराने के लिए।
प्रश्न 13. अनेक जन्मों के लिए कैसा बनने का लक्ष्य है?
उत्तर: एवर हेल्दी और वेल्दी।
प्रश्न 14. राजयोग के कमरे से किससे बधाई लेने की बात कही गई?
उत्तर: परमात्मा पिता से।
प्रश्न 15. यह हॉस्पिटल दूसरे स्थानों से न्यारा क्यों है?
उत्तर: क्योंकि यहाँ शारीरिक उपचार के साथ राजयोग द्वारा आत्मिक उन्नति की सेवा भी है।
भाग 4: सेवा और सहयोग
प्रश्न 16. बाबा ने किन बच्चों को याद-प्यार दिया?
उत्तर: सहयोगी-सो-योगी बच्चों को।
प्रश्न 17. बच्चों ने किन तीन माध्यमों से सेवा की?
उत्तर: संकल्प, बोल और कर्म से।
प्रश्न 18. शुभ कार्य के निमित्त बनने वाले बच्चों को किसकी दुआएँ मिलती हैं?
उत्तर: बापदादा और ब्राह्मण परिवार की।
प्रश्न 19. बाबा ने उपचार की कौन-सी नई विधि बताई?
उत्तर: शुभ भावना और शुभ कामना के वायब्रेशन्स द्वारा उपचार।
प्रश्न 20. नई विधि से उपचार करने के लिए किसका प्रयोग करना है?
उत्तर: शुभ भावना और शुभ कामना का।
भाग 5: शुभ वायब्रेशन्स और सफलता
प्रश्न 21. शुभ वायब्रेशन्स से आत्माएँ कैसी बनेंगी?
उत्तर: हेल्दी, वेल्दी और हैपी।
प्रश्न 22. हॉस्पिटल में आने वाली आत्माओं को क्या अनुभव कराना है?
उत्तर: शुभ भावना और शुभ कामना के शक्तिशाली वायब्रेशन्स।
प्रश्न 23. बाबा ने इस हॉस्पिटल का उद्देश्य क्या बताया?
उत्तर: आत्माओं को हेल्दी, वेल्दी और हैपी बनाना।
प्रश्न 24. सफलता किसका जन्म-सिद्ध अधिकार है?
उत्तर: ब्राह्मणों का।
प्रश्न 25. बाबा ने निमित्त बने बच्चों को क्या दिया?
उत्तर: बधाई, याद-प्यार और दुआएँ।
भाग 6: मुख्य शिक्षाएँ
प्रश्न 26. हॉस्पिटल को किस दृष्टि से देखना है?
उत्तर: होली प्लेस की दृष्टि से।
प्रश्न 27. राजयोग का अभ्यास किसके लिए आवश्यक है?
उत्तर: अनेक जन्मों के लिए स्वस्थ और सम्पन्न बनने के लिए।
प्रश्न 28. उपचार करने वालों को अपने संकल्प कैसे रखने हैं?
उत्तर: शुभ भावना और शुभ कामना से भरपूर।
प्रश्न 29. इस हॉस्पिटल में किस प्रकार की सेवा करनी है?
उत्तर: शरीर के उपचार के साथ आत्माओं को शुभ वायब्रेशन्स देने की सेवा।
प्रश्न 30. बाबा का अन्तिम संदेश क्या है?
उत्तर: सफलता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है।
स्व-चिंतन के प्रश्न
- क्या मैं किसी भी आत्मा के प्रति शुभ भावना और शुभ कामना रखता हूँ?
- क्या मेरे संकल्पों से दूसरों को शान्ति और शक्ति के वायब्रेशन्स मिलते हैं?
- क्या मैं कठिन परिस्थितियों में धैर्य की शक्ति धारण करता हूँ?
- क्या मैं राजयोग द्वारा अपने कर्मों के हिसाब-किताब को हल्का करने का पुरुषार्थ करता हूँ?
- क्या मैं स्वयं हेल्दी, वेल्दी और हैपी रहने का अनुभव करता हूँ?
- क्या मैं संकल्प, बोल और कर्म से श्रेष्ठ सेवा करता हूँ?
- क्या मैं किसी भी सेवा को बापदादा और ब्राह्मण परिवार की दुआएँ प्राप्त करने का अवसर समझता हूँ?
- क्या मैं अपने जन्म-सिद्ध अधिकार—सफलता—को स्मृति में रखता हूँ?
निष्कर्ष
24 अक्टूबर 1991 को ग्लोबल हॉस्पिटल के उद्घाटन अवसर पर प्राप्त इस अव्यक्त संदेश का मुख्य सार है कि ग्लोबल हॉस्पिटल केवल इलाज का स्थान नहीं, बल्कि एक होली प्लेस है।
यहाँ आने वाली आत्माओं को शारीरिक उपचार के साथ धैर्य की शक्ति, राजयोग का अनुभव और शुभ वायब्रेशन्स प्राप्त होने चाहिए।
बापदादा ने उपचार की नई विधि के रूप में शुभ भावना और शुभ कामना के वायब्रेशन्स पर विशेष बल दिया। इस विधि से प्रत्येक आत्मा को हेल्दी, वेल्दी और हैपी बनाने का लक्ष्य रखा गया।
मुख्य स्मृति-मंत्र
“मैं शुभ भावना और शुभ कामना के वायब्रेशन्स द्वारा प्रत्येक आत्मा को हेल्दी, वेल्दी और हैपी बनाने का निमित्त बनूँगा।”
नोट: यह अध्याय आपके द्वारा दिए गए मूल अव्यक्त संदेश पर आधारित है। प्रश्नोत्तर उसी पाठ की शिक्षाओं को सरल रूप में प्रस्तुत करते हैं।
📝 01.41.अव्यक्त दिव्य संदेश | 24.10.1991
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