24.10.1991
एवर रेडी बनो तो प्रकृति आपका स्वागत करे
आज अमृतवेले आप सबका याद-प्यार लेते हुए वतन में पहुंची तो हमारे जाने से पहले ही सभी की याद-प्यार बापदादा के पास पहुँच गई थी। फिर भी विधिपूर्वक मैंने भी याद-प्यार दी और वतन में बहुत सुन्दर न्यारा दृश्य देखा सामने एक बहुत अच्छा लाइट का सिंहासन था और वह लाइट से ही सजा हुआ था। सिंहासन देखते हुए मैं सोचने लगी कि बाबा कहाँ है? इतने में ही देखा कि सिंहासन के ऊपर बाबा का फेस दिखाई दिया जो बहुत ही सूक्ष्म लाइट माइट स्वरूप था। वह सिहासन हार्ट के शेप (आकार) का था, उसके बीच में बापदादा मुस्करा रहे थे।
बाबा ने देखते ही कहा – आओ मेरे बेफिक्र बादशाह, आओ। मैं मुस्करा भी रही थी और ऐसे मधुर मिलन में मगन थी। कुछ समय के बाद फिर बाबा ने कहा कि मेरे बादशाह बच्चे, तख्तनशीन बन जाओ। तो मैं जब आगे बढ़ी तो मैने देखा- मैं अकेली नहीं हूँ, आप सभी में से कई हमारे साथी बन गये और जैसे हम संगठित रूप में ही के तख्त पर बैठी तो बाबा के हाथ फैलते हुए सबके सिर पर आ गये। फिर बाबा ने कहा- देखो, बाबा तो बेफिक्र बादशाह है ही लेकिन रोयल बादशाह तो आप बच्चे ही बनते हो। मैंने कहा बाबा, बादशाह बनाने वाला तो और भी बड़ा बादशाह हो गया। तो बाबा ने कहा- नहीं बच्ची, मैं तो वर्ल्ड सर्वेन्ट हूँ। तुम मेरे बच्चे बादशाह हो। मैं मुस्कराती रही। फिर बाबा बोले- तुम्हें पता है कि बादशाहों का स्वगात कैसे होता है? मेरा संकल्प चला कि वह तो कईबार देखा है। हम लोग तो कई बार सतयुग में उसी प्रैक्टिकल लाइफ से होकर आये हैं। फिर बाबा ने कहा- तुमने जो देखा है, उससे यह भिन्न है। आज मैं तुमको उससे न्यारा दिखाऊँगा। इतने में दृश्य चेंज हो गया।
हम सभी जैसे तख्त से नीचे चल रहे थे। तीन तीन प्रकार का स्वागत देखा। पहला-पहला स्वगात देखा – प्रकृति के 5 तत्व, 5 फ़रिश्तों के रूप में हम सबका स्वागत कर रहे थे। उनके हाथ में बहुत सुन्दर मालाएँ थीं और वे ऐसी वण्डरफुल मालाएँ थीं जो जितना आगे जाए उतनी बड़ी माला हम सबको पड़ती जाए। फिर हम आगे बढ़े तो दूसरा स्वागत देखा सेवा की सफलता के हार, सफलता जैसे हमारा स्वागत कर रही है। फिर उसके आगे बढ़े तो तीसरा जो स्वागत था वह थी हमारी ही सम्पूर्ण स्टेज, जो हमारा स्वागत कर रही थी। जैसे दो व्यक्ति गले मिलते हैं तो आपस में मिलकर दो, एक हो जाते। इसी रीति ‘सम्पूर्ण स्टेज’ संगमवासियों का स्वागत कर रही थी और मिलकर जैसे कि एक हो रहे थे। यह तीनों रूपों की स्वागत बाबा ने दिखाई और कहा- बताओ, ऐसा स्वागत सतयुग में होगा? मैंने कहा बाबा, संगम तो है ही अलौकिक। बाबा ने कहा- यह है बेफिक्र बादशाहों का स्वागत। अभी तो प्रकृति हलचल मचाती है ना लेकिन यह प्रकृति भी आपका 102स्वागत करेगी, सफलता भी स्वागत करेगी और सम्पूर्ण स्टेज भी स्वागत करेगी। फिर बाबा ने पूछा बताओ ऐसे बेफिक बादशाहों का स्वागत अभी कितना नजदीक है? 10साल या 5 साल, कितना समय लगेगा? मैं मुस्कराती रही। बाबा ने कहा ऐसा स्वागत अभी इना कि हुआ। बस सिर्फ तुम बच्चे कहो बाबा एवररेडी। सिर्फ एवररेडी का स्विच ऐसे करी तो के अभी दृश्य देख रही थी वह सब प्रैक्टिकल सेकण्ड में हो जायेगा देरी नहीं लगेगी। परिवर्तन में भर थोड़ी देरी लगेगी लेकिन आपके स्वागत में देरी नहीं लगेगी। परन्तु सभी बच्चे एवररेडी चाहिए। अपनी-अपनी स्टेज अनुसार जब सभी एवररेडी बने, तब यह दृश्य प्रक्टिकल में हो। फिर बाबा ने क्योंकि मेरे को तो सबको साथ ले जाना है. एक को भी छोड़कर नहीं जाऊँगा। इसलिए यथाशक्ति, एवररेडी बनने के लिए तीन शब्दों की स्मृति दिलाई और कहा यह तीन शब्द सदा अपनी दिनचर्क में याद रखना 1 स्वयं की समृति 2. संयम की और 3. समय की स्मृति। रोज स्वयं को स्मृति का तिलक लगाओ, संयम जो है उनका श्रृंगार करो और बापदादा के साथ-साथ समय को भी सामने रखो कि समय क्या बता रहा है, किस गति से चल रहा है। जब यह तीनों ही पहचान सम्पूर्ण हो जायेंगी तब यह स्वागत प्रैक्टिकल में हो जायेगा।फिर तो बाबा ने समाचार पूछा कि क्या-क्या तैयारियाँ कर रहे हो? हमने कहा- बाबा हॉस्पिटल की बहुत अच्छी तैयारियाँ हो गई हैं। बाबा ने कहा- समय पर बच्चों ने सब तैयारियों की इसलिए दिल व जान, सिक व प्रेम की मुबारक हो। जिन बच्चों ने समय पर सफलता प्राप्त की है, ऐसे बच्चों को बापदादा अपने हस्तों से मसाज़ कर रहा है। बाबा ने कहा – सभी को मेरी याद-प्यार देना। फिर आप जो भी आये हैं उन्हों की याद-प्यार दी। बाबा ने कहा- यह मेरे बड़े चतुरसुजान बच्चे भाग-भाग कर आये हैं। यह बच्चे इनश्योर करने में बड़े होशियार हैं। बाबा ने कहा – पता है यह कौन-सी इनश्योरेन्स कम्पनी है? यह है फॉर एवर इनश्योरेन्स कम्पनी, जन्म-जन्म के लिए इनश्योर करने वाली कम्पनी। ऐसी कम्पनी आपको और कोई भी नहीं मिलेगी। वहाँ एक जन्म के लिए सो इनश्योर कर लेंगे, परन्तु यह है अनेक जन्मों के इनश्योरेन्स की गारण्टी। जिन्होंने भी इनश्योरेन्स कम्पनी में अपना इनश्योर कराने में होशियारी दिखाई है, ऐसे स्नेही, सहयोगी और सदा योगी बच्चों को मुबारक देना, याद-प्यार देना। जो देश-विदेश के बच्चे यहाँ नहीं आये हैं, उन सबको भी बाबा ने याद किया। बाबा ने कहा चाहे शरीर से यहाँ नहीं हैं, लेकिन बाबा के साथ हैं। वतन में वह भी बैठकर मेरे साथ सब देखेंगे। तुम बच्चों ने तो थोड़ों को निमंत्रण दिया है लेकिन मैं सभी को वतन में निमंत्रण देकर अपने साथ सब दिखाऊँगा। फिर बाबा ने देश-विदेश के सभी बच्चों को बहुत-बहुत याद-प्यार दी और कहा – तपस्या वर्ष की मुबारक देना। तपस्या वर्ष के सफलता की, सेवा को मुबारक हो।
एवररेडी बनो तो प्रकृति आपका स्वागत करे
दिनांक: 24 अक्टूबर 1991
प्रस्तावना
इस अव्यक्त संदेश में बापदादा ने बच्चों को “बेफिक्र बादशाह” बनने की प्रेरणा दी है। बाबा ने एक अलौकिक दृश्य दिखाया जिसमें प्रकृति के पाँच तत्व, सेवा की सफलता और आत्मा की सम्पूर्ण स्टेज—तीनों ही बच्चों का स्वागत कर रहे थे।
बाबा ने स्पष्ट किया कि ऐसा श्रेष्ठ स्वागत प्रैक्टिकल में तभी होगा जब सभी बच्चे एवररेडी बनेंगे। इसके लिए तीन बातों की स्मृति आवश्यक है—स्वयं की स्मृति, संयम की स्मृति और समय की स्मृति।
1. बेफिक्र बादशाह बनो
बापदादा ने बच्चों को “मेरे बेफिक्र बादशाह” कहकर बुलाया और तख्तनशीन बनने का निमंत्रण दिया।
बाबा ने बताया कि वे स्वयं वर्ल्ड सर्वेन्ट हैं और बच्चे रोयल बादशाह हैं। बाबा के हाथ सभी बच्चों के सिर पर थे और सभी संगठित रूप में तख्त पर विराजमान थे।
मुख्य शिक्षा: बेफिक्र बादशाह बनकर तख्तनशीन स्थिति का अनुभव करना है।
2. बादशाहों का अलौकिक स्वागत
बाबा ने बच्चों को सतयुग के स्वागत से भिन्न एक अलौकिक स्वागत का दृश्य दिखाया।
इस स्वागत में तीन विशेष बातें थीं:
- प्रकृति के पाँच तत्व पाँच फ़रिश्तों के रूप में स्वागत कर रहे थे।
- सेवा की सफलता हारों के रूप में स्वागत कर रही थी।
- बच्चों की अपनी सम्पूर्ण स्टेज उनका स्वागत कर रही थी।
बाबा ने समझाया कि यह संगमयुग का अलौकिक स्वागत है।
मुख्य शिक्षा: ऐसा पुरुषार्थ करना है कि प्रकृति, सफलता और सम्पूर्ण स्टेज स्वयं हमारा स्वागत करें।
3. प्रकृति के पाँच तत्वों द्वारा स्वागत
पहले दृश्य में प्रकृति के पाँच तत्व पाँच फ़रिश्तों के रूप में दिखाई दिए।
उनके हाथों में सुन्दर मालाएँ थीं। वे मालाएँ ऐसी थीं कि जितना आगे बढ़ते जाते, उतनी ही बड़ी होती जाती थीं और सभी बच्चों को पहनाई जाती थीं।
बाबा ने बताया कि अभी प्रकृति हलचल मचाती है, लेकिन सम्पूर्ण अवस्था में वही प्रकृति बच्चों का स्वागत करेगी।
मुख्य शिक्षा: प्रकृति पर विजय प्राप्त करके प्रकृतिजीत बनना है।
4. सेवा की सफलता का हार
दूसरे स्वागत में सेवा की सफलता हार के रूप में सामने आई।
सफलता स्वयं बच्चों का स्वागत कर रही थी। इसका अर्थ है कि सेवा का श्रेष्ठ परिणाम भी आत्मा के स्वागत का निमित्त बनता है।
मुख्य शिक्षा: सेवा ऐसी हो जिसकी सफलता प्रत्यक्ष रूप में दिखाई दे।
5. सम्पूर्ण स्टेज द्वारा स्वागत
तीसरा स्वागत बच्चों की अपनी सम्पूर्ण स्टेज कर रही थी।
बाबा ने दो व्यक्तियों के गले मिलने का उदाहरण दिया। जैसे मिलकर दो एक हो जाते हैं, वैसे ही सम्पूर्ण स्टेज संगमवासियों का स्वागत कर रही थी और उनके साथ एक हो रही थी।
मुख्य शिक्षा: अपनी सम्पूर्ण अवस्था को प्राप्त करना ही श्रेष्ठ स्वागत का आधार है।
6. एवररेडी बनो — स्वागत में देरी नहीं होगी
बाबा ने पूछा कि ऐसा स्वागत कितना नजदीक है—दस साल या पाँच साल?
बाबा ने समझाया कि यह दृश्य प्रैक्टिकल में आने में देर नहीं लगेगी, केवल बच्चों का एवररेडी होना आवश्यक है।
परिवर्तन में भले थोड़ी देरी लगे, लेकिन स्वागत में देरी नहीं लगेगी।
बाबा ने कहा कि उन्हें सभी बच्चों को साथ लेकर जाना है, एक को भी छोड़कर नहीं जाना है।
मुख्य शिक्षा: अपनी यथाशक्ति पुरुषार्थ करते हुए एवररेडी बनना है।
7. एवररेडी बनने के तीन आधार
बाबा ने बच्चों को तीन शब्दों की स्मृति दिलाई:
- स्वयं की स्मृति — रोज स्वयं को स्मृति का तिलक लगाना।
- संयम की स्मृति — संयम को जीवन का श्रृंगार बनाना।
- समय की स्मृति — समय की गति और संकेत को सामने रखना।
जब ये तीनों बातें सम्पूर्ण होंगी, तब श्रेष्ठ स्वागत का दृश्य प्रैक्टिकल में दिखाई देगा।
मुख्य शिक्षा: स्वयं, संयम और समय—इन तीनों की स्मृति सदा रखनी है।
8. स्वयं की स्मृति का तिलक
बाबा ने कहा कि रोज स्वयं को स्मृति का तिलक लगाओ।
अपने वास्तविक स्वरूप और अपने श्रेष्ठ लक्ष्य को याद रखते हुए दिनचर्या चलानी है।
स्वयं की स्मृति से आत्मा अपने पुरुषार्थ के प्रति जागरूक रहती है।
मुख्य शिक्षा: हर दिन स्वयं को स्मृति का तिलक लगाकर आगे बढ़ना है।
9. संयम का श्रृंगार
बाबा ने संयम को श्रृंगार करने की बात कही।
संयम केवल किसी एक समय की बात नहीं, बल्कि जीवन में धारण करने योग्य विशेषता है।
स्वयं की स्मृति के साथ संयम का श्रृंगार भी आवश्यक है।
मुख्य शिक्षा: संयम को अपने जीवन का स्थायी श्रृंगार बनाना है।
10. समय की स्मृति
बाबा ने कहा कि बापदादा के साथ-साथ समय को भी सामने रखो।
समय क्या बता रहा है और किस गति से चल रहा है, इस पर ध्यान देना है।
समय की पहचान के अनुसार अपने पुरुषार्थ को एवररेडी बनाना है।
मुख्य शिक्षा: समय की गति को पहचानकर पुरुषार्थ में तत्पर रहना है।
11. समय पर सेवा की सफलता
बाबा ने समाचार पूछा कि क्या-क्या तैयारियाँ हो रही हैं।
हॉस्पिटल की अच्छी तैयारियों का समाचार सुनकर बाबा ने बच्चों को मुबारक दी।
बाबा ने कहा कि बच्चों ने समय पर तैयारियाँ पूरी कीं। ऐसे बच्चों को दिल, जान, सिक और प्रेम से मुबारक हो।
बाबा ने समय पर सफलता प्राप्त करने वाले बच्चों को अपने हाथों से मसाज करने का दृश्य भी सुनाया।
मुख्य शिक्षा: जिम्मेदारी को समय पर पूरा करके सेवा में सफलता प्राप्त करनी है।
12. फॉर एवर इनश्योरेन्स कम्पनी
बाबा ने बच्चों को बहुत चतुर और समझदार बताया, जो भाग-भागकर आए और इनश्योर कराने में होशियार हैं।
बाबा ने इसे “फॉर एवर इनश्योरेन्स कम्पनी” कहा।
यह ऐसी कम्पनी है जो एक जन्म के लिए नहीं, बल्कि अनेक जन्मों के लिए इनश्योर करने वाली है।
इसमें स्नेही, सहयोगी और सदा योगी बच्चे शामिल हैं।
मुख्य शिक्षा: स्नेही, सहयोगी और सदा योगी बनकर अनेक जन्मों की श्रेष्ठ प्रालब्ध जमा करनी है।
13. देश-विदेश के सभी बच्चों को निमंत्रण
बाबा ने उन सभी बच्चों को भी याद किया जो शरीर से वहाँ उपस्थित नहीं थे।
बाबा ने कहा कि वे शरीर से यहाँ नहीं हैं, लेकिन बाबा के साथ हैं।
बाबा सभी को वतन में निमंत्रण देकर अपने साथ यह दृश्य दिखाएँगे।
मुख्य शिक्षा: शरीर से दूर होने पर भी बाबा के साथ रहने का अनुभव करना है।
14. तपस्या वर्ष की मुबारक
बाबा ने देश-विदेश के सभी बच्चों को बहुत-बहुत याद-प्यार दिया।
साथ ही तपस्या वर्ष की सफलता और सेवा के लिए मुबारक दी।
बाबा ने बच्चों के उमंग-उत्साह और पुरुषार्थ की सराहना की।
मुख्य शिक्षा: तपस्या और सेवा दोनों में सफलता प्राप्त करते हुए आगे बढ़ना है।
मुरली पर आधारित 30 छोटे प्रश्न और उत्तर
भाग 1: बेफिक्र बादशाह और अलौकिक स्वागत
प्रश्न 1. बाबा ने बच्चों को किस नाम से बुलाया?
उत्तर: बेफिक्र बादशाह।
प्रश्न 2. बाबा ने अपने लिए कौन-सा परिचय दिया?
उत्तर: वर्ल्ड सर्वेन्ट।
प्रश्न 3. बाबा ने बच्चों को क्या बनने के लिए कहा?
उत्तर: रोयल बादशाह और तख्तनशीन।
प्रश्न 4. बाबा ने स्वागत के कितने प्रकार दिखाए?
उत्तर: तीन प्रकार के।
प्रश्न 5. पहला स्वागत किसके द्वारा हुआ?
उत्तर: प्रकृति के पाँच तत्वों द्वारा।
भाग 2: तीन प्रकार का स्वागत
प्रश्न 6. प्रकृति के पाँच तत्व किस रूप में स्वागत कर रहे थे?
उत्तर: पाँच फ़रिश्तों के रूप में।
प्रश्न 7. पाँच फ़रिश्तों के हाथों में क्या था?
उत्तर: सुन्दर मालाएँ।
प्रश्न 8. दूसरा स्वागत किस रूप में हुआ?
उत्तर: सेवा की सफलता के हार के रूप में।
प्रश्न 9. तीसरा स्वागत कौन कर रहा था?
उत्तर: बच्चों की अपनी सम्पूर्ण स्टेज।
प्रश्न 10. बाबा ने सम्पूर्ण स्टेज के मिलन को किस उदाहरण से समझाया?
उत्तर: दो व्यक्तियों के गले मिलने और एक हो जाने के उदाहरण से।
भाग 3: एवररेडी बनने की प्रेरणा
प्रश्न 11. बाबा ने स्वागत के दृश्य को प्रैक्टिकल बनाने के लिए क्या आवश्यक बताया?
उत्तर: सभी बच्चों का एवररेडी होना।
प्रश्न 12. बाबा ने कहा कि परिवर्तन में कितनी देरी लग सकती है?
उत्तर: थोड़ी देरी लग सकती है।
प्रश्न 13. बच्चों को साथ ले जाने के बारे में बाबा ने क्या कहा?
उत्तर: एक को भी छोड़कर नहीं जाना है।
प्रश्न 14. एवररेडी बनने के लिए बाबा ने कितने शब्दों की स्मृति दिलाई?
उत्तर: तीन शब्दों की।
प्रश्न 15. वे तीन शब्द कौन-से हैं?
उत्तर: स्वयं की स्मृति, संयम की स्मृति और समय की स्मृति।
भाग 4: तीन स्मृतियों का अभ्यास
प्रश्न 16. स्वयं की स्मृति के लिए बाबा ने क्या कहा?
उत्तर: रोज स्वयं को स्मृति का तिलक लगाओ।
प्रश्न 17. संयम को क्या बनाने के लिए कहा?
उत्तर: जीवन का श्रृंगार।
प्रश्न 18. समय की स्मृति में किस बात पर ध्यान देना है?
उत्तर: समय क्या बता रहा है और किस गति से चल रहा है।
प्रश्न 19. तीनों स्मृतियाँ सम्पूर्ण होने पर क्या होगा?
उत्तर: श्रेष्ठ स्वागत का दृश्य प्रैक्टिकल में होगा।
प्रश्न 20. बाबा ने बच्चों को किस स्थिति में रहने की प्रेरणा दी?
उत्तर: एवररेडी स्थिति में।
भाग 5: सेवा और इनश्योरेन्स
प्रश्न 21. बाबा ने किसकी तैयारियों का समाचार सुना?
उत्तर: हॉस्पिटल की तैयारियों का।
प्रश्न 22. समय पर तैयारियाँ पूरी करने वाले बच्चों को बाबा ने क्या दिया?
उत्तर: मुबारक और याद-प्यार।
प्रश्न 23. बाबा ने कौन-सी इनश्योरेन्स कम्पनी का नाम बताया?
उत्तर: फॉर एवर इनश्योरेन्स कम्पनी।
प्रश्न 24. यह कम्पनी कितने जन्मों के लिए इनश्योरेन्स करती है?
उत्तर: अनेक जन्मों के लिए।
प्रश्न 25. इस कम्पनी के सदस्य कैसे बच्चे हैं?
उत्तर: स्नेही, सहयोगी और सदा योगी।
भाग 6: सभी बच्चों के प्रति बाबा का स्नेह
प्रश्न 26. बाबा ने किन बच्चों को वतन में निमंत्रण देने की बात कही?
उत्तर: देश-विदेश के सभी बच्चों को।
प्रश्न 27. जो बच्चे शरीर से वहाँ उपस्थित नहीं थे, उनके बारे में बाबा ने क्या कहा?
उत्तर: वे शरीर से यहाँ नहीं हैं, लेकिन बाबा के साथ हैं।
प्रश्न 28. बाबा सभी बच्चों को क्या दिखाना चाहते थे?
उत्तर: वतन में अपने साथ वह अलौकिक दृश्य।
प्रश्न 29. बाबा ने किस वर्ष की मुबारक दी?
उत्तर: तपस्या वर्ष की।
प्रश्न 30. बाबा ने तपस्या वर्ष के साथ किस बात की मुबारक दी?
उत्तर: तपस्या की सफलता और सेवा की सफलता की।
स्व-चिंतन के प्रश्न
- क्या मैं वास्तव में बेफिक्र बादशाह की स्थिति में रहता हूँ?
- क्या मैं स्वयं को तख्तनशीन आत्मा अनुभव करता हूँ?
- क्या मेरी सेवा से सफलता के हार तैयार हो रहे हैं?
- क्या मैं प्रकृति के पाँच तत्वों पर विजय प्राप्त करने का पुरुषार्थ कर रहा हूँ?
- क्या मैं हर दिन स्वयं को स्मृति का तिलक लगाता हूँ?
- क्या संयम मेरे जीवन का श्रृंगार बना है?
- क्या मैं समय की गति को पहचानकर अपना पुरुषार्थ करता हूँ?
- क्या मैं हर जिम्मेदारी को समय पर पूरा करता हूँ?
- क्या मैं स्नेही, सहयोगी और सदा योगी बनकर अपना श्रेष्ठ भाग्य जमा कर रहा हूँ?
- क्या मैं सभी बच्चों के साथ एवररेडी बनने का पुरुषार्थ कर रहा हूँ?
निष्कर्ष
24 अक्टूबर 1991 के इस अव्यक्त दिव्य संदेश का मुख्य सार है—एवररेडी बनो तो प्रकृति आपका स्वागत करे।
बापदादा ने बेफिक्र बादशाहों का अलौकिक स्वागत दिखाया, जिसमें प्रकृति के पाँच तत्व, सेवा की सफलता और बच्चों की सम्पूर्ण स्टेज स्वयं उनका स्वागत कर रही थी।
इस श्रेष्ठ दृश्य को प्रैक्टिकल में लाने के लिए तीन बातों को जीवन में धारण करना है—स्वयं की स्मृति, संयम की स्मृति और समय की स्मृति।
जब सभी बच्चे एवररेडी बनेंगे, तब प्रकृति भी उनका स्वागत करेगी और सम्पूर्ण स्टेज भी उनके साथ एक हो जाएगी।
मुख्य स्मृति-मंत्र
“मैं बेफिक्र बादशाह आत्मा हूँ। स्वयं की स्मृति, संयम और समय की स्मृति से एवररेडी बनकर प्रकृति, सफलता और सम्पूर्णता के स्वागत का अधिकारी बनूँगा।”
नोट: यह अध्याय आपके द्वारा दिए गए मूल अव्यक्त संदेश पर आधारित है। प्रश्नोत्तर उसी पाठ की शिक्षाओं को सरल रूप में प्रस्तुत करते हैं।
📝 01.40.अव्यक्त दिव्य संदेश | 24.10.1991
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