11.8.1990
सबसे बड़ी शक्ति है – संकल्प शक्ति
आज अमृतवेले बाबा के पास गई तो इस बारी का विशेष दृश्य देखा कि बाबा एक बहुत ऊँची पहाड़ी के ऊँची प्वाइंट पर फ़रिश्ते रूप में खड़े थे। पहाड़ी के एक तरफ कई बच्चे पहाड़ी के ही आधार पर झूले में झूल रहे थे। दूसरी तरफ एक लिफ्ट थी, जिस लिफ्ट के आधार पर ऊपर पहुँचने का प्रयन्त कर रहे थे। झूले पर भी जो मस्ती से झूल रहे थे वे भी ऊँचा पहुँचने का ही प्रयत्न कर रहे थे। बीच में जिस स्थान पर बाबा खड़े थे वहाँ से दो किरणें निकल रही थीं और वे किरणें बड़ी सूक्ष्म और शक्तिशाली थीं। जब मैं पहुँची तो बाबा ऊपर थे और हम नीचे। तो हमारे पहुँचते ही बाबा ने कहा – आओ मेरे संकल्प शक्ति पर विजय प्राप्त करने वाले राजदुलारे बच्चे, आओ। तो हम बाबा की तरफ ही देख रहे थे। बाबा ने नयनों का इशारा किया। थोड़े समय के बाद बाबा बोले- बच्ची, संकल्प की भाषा जानती हो? मैं तो बाबा की तरफ देख ही रही थी। बाबा ने कहा- इस समय बाबा के क्या संकल्प है, वह तुम कैच कर सकती हो? तो हम कैच करने का प्रयत्न कर रही थी। उसके बाद ऐसा बोलते हुए फिर बाबा डेड साइलेंस के स्वरूप में चले गये, वह बहुत पॉवरफुल स्टेज थी।
हमने कैच किया कि जैसे बाबा हमको इशारा कर रहा है कि यह जो दो किरणें हैं – ‘लाइट’ और ‘माइट’ की हैं, इन किरणों के आधार से ऊपर आ जाओ। हमने भी यही संकल्प किया तो लगा जैसे लाइट-माइट के आधार से कोई उड़ता है, ऐसे उड़कर बाबा जहाँ खड़े थे, वहाँ उस प्वाइंट पर मैं पहुँच गई। जब ऊपर पहुंची तो बाबा ने पूछा तुम अकेली आई हो? मैंने कहा- नहीं बाबा, आज तो सभी मेरे साथ ही हैं। बाबा ने जैसे ही बच्चों के आह्वान का सिर्फ संकल्प किया तो संकल्प-शक्ति से कोई तो फौरन पहुँच गये, कोई थोड़ा पीछे-पीछे पहुँचे। जब सारा संगठन पहुँच गया तो बाबा संगठन को बहुत मीठी दृष्टि दे रहे थे। दृष्टि देते हुए सभे नीचे इमर्ज हो गये। 3 वहाँ से ऊपर आना था। बाबा ने सभी से इशारे से ही पूछा- संकल्प कैच कर सकते हो? कोई सकल्प कैच करते ही लाइट-माइट की किरणों के आधार से ऊपर पहुँच गये। कोई झूले तक पहुँचे, कोई लिफ्ट तक पहुँचे। झूले वाले इतना ऊँचा नहीं पहुँच रहे थे और लिफ्ट वाले उनसे थोड़ा ऊँचा पहुंच रहे थे लेकिन उस प्वाइंट तक नहीं पहुँच सकते थे और जो लाइट-माइट की किरणों के आधार पर थे वे टॉप पर पहुँच रहे थे।
बाबा ने झूले तथा लिफ्ट का रहस्य सुनाते हुए कहा कि “यह जो झूला दिखाया, यह वे बच्चे हैं जो सदा खुशी में झूलते रहते हैं। ‘बाबा मिला’ बस, इतना ही बहुत है। ऐसे खुशी के झूले से अव्यक्त संदेश
ऊपर जाने चाहते हैं। शक्ति नहीं है, खुशी है। खुशी के झूले में झूलते रहते हैं। शक्ति नहीं है जो ऊपर तक पहुँच सकें। लिफ्ट वाले जो है वे कोई-न-कोई आधार पर है। सेवा की या कोई-न-कोई सहयोग मिला तो ऊँचे चढ़ेंगे, नहीं तो बीच में होंगे। यह जो लाइट-माइट की किरणें हैं, वो हैं स्व की ऊँची स्थिति व सूक्ष्म शक्ति द्वारा ऊपर पहुँचना। यह दृश्य दिखाने के बाद बाबा ने कहा -अच्छा, आओ बच्चे, अभी सब ऊपर आ जाओ। सारा संगठन लाइट बन, फरिश्ते रूप में एकदम ऊपर पहुँच गया। फिर क्या देखा कि टी.वी. के माफिक हर एक के मस्तक पर मन और बुद्धि की जो गति थी, वह चलती हुई दिखाई दे रही थी।
फिर बाबा ने कहा – “देखो, आप जो निमित्त बने हुए बच्चे हो, उन्हों की विशेषता क्या होनी बाहिए? अभी बहुत समय बीत चुका, इसमें कर्मणा सेवा भी की तो वाचा सेवा भी की। यह सेवा ऐसी है जैसे साइंस के एटॉमिक बाम्बस या हाइड्रोजन बाम्बस है, यह मोटे यंत्र हैं। इसे कहेंगे आपकी वाणी के यंत्र। लेकिनि आजकल साइस वाले भी सूक्ष्म में जा रहे हैं। वह भी लाइट की सूक्ष्म किरणों से (लेज़र किरणों से) कितने भिन्न-भिन्न अनुभव करा देते हैं। कभी सागर के किनारे का अनुभव करा देते हैं, कभी झूले का अनुभव करा देते हैं, कभी साइलेंस का अनुभव, कभी जंगल का अनुभव करा देते हैं। आजकल की इन्वेन्शन बहुत सूक्ष्म है। इसी रीति से जैसे यह लाइट की रेज़ेस (किरणों) के द्वारा सब अनभूति करा सकते हैं, कहाँ भी पहुँचा सकते हैं और कहाँ से भी कनेक्शन जोड़ सकते हैं। अब ऐसे ही आप जो निमित्त आत्माएँ हो, उन्हें अभी किरणों द्वारा सेवा करनी चाहिए। सबसे बड़े-ते-बडी शक्तिशाली जो किरणें है, वे हैं संकलप-शक्ति की। इस समय बच्चों को संकल्प-शक्ति को यूज़ करना चाहिए।
बाबा ने कहा – “देखो, ब्रह्मा की दो रचनाएँ गाई हुई हैं। एक मुख-वंशावली और दूसरा कहते हैं ब्रह्मा ने संकल्प से सृष्टि रची। तो रचना रचने की पॉवर संकल्प में भी है। तो पहले मुख-वंशावली मोटा रूप रहा और अभी संकल्प-शक्ति से रचना हो रही है। अभी जो सारी सेवाएँ बढ़ रही हैं वह संकल्प-शक्ति से बढ़ रही हैं। जैसे ब्रह्मा ने संकल्प से सृष्टि रची, वैसे आप विशेष ब्राह्मण आत्माओं को भी यही सेवा अभी करनी है। संकल्प-शक्ति जो महान शक्ति है, उसे अभी तक कम यूज़ करते हो। वाणी की शक्ति से तो सेवा हो ही रही है लेकिन अभी इस सूक्ष्म शक्ति को बढ़ाना है। जैसे साइंस के साधन ‘टेलीफोन’ द्वारा किसी को भी मैसेज दे सकते हो, बुला सकते हो। साइंस के साधनों द्वारा कोई भी कार्य कर सकते हो। वैसे आप संकल्प-शक्ति से भी कर सकते हो। यह वायरलेस का काम संकल्प-शक्ति कर सकती है। आखरीन में यही संकल्प-शक्ति सेवा के निमित्त बनेगी। बेहद की फटाफट जो विहंग-मार्ग की सेवा होनी है. वह भी संकल्प-शक्ति से होगी और एक-दो को आप जो देना चाहते हो. वह संकल्प-शक्ति से जितना दे सकते हो उतना वाणी से नहीं दे सकते”। इसी रीति से बाबा संकल्प शक्ति का
महत्त्व सुना रहे थे।
इसके बाद बाबा ने कहा- भट्टी में विशेष इसी संकल्प-शक्ति पर रूह-रूहान करना। यह क्या चीज है. इसका आधार क्या है. वह निकालना। आप सभी की शुभ इच्छा व चाहना है कि हमें महीनता में जाकर स्व-उन्नति और सेवा की उन्नति करनी है। अन्तर्मुखी होकर इस सूख्म संकल्प-शक्ति की प्राप्तियों का अनुभव करो। संकल्प-शक्ति से क्या-क्या प्राप्ति हो सकती है, उसको प्रैक्टिकल यूज़ करो। जितना यूज करते जायेंगे उतना संकल्प-शक्ति की महानता का अनुभव होता जायेगा। बोल तो कॉमन हो गये हैं, बोलने द्वारा तो सभी सेवा कर सकते हैं, लेकिन यह जो सेवा है वो आप लोग कर सकते हो। अभी आवश्यकता इस सेवा की है, जिससे ही एकदम 9 लाख तैयार हो जाएँ। वाचा की सर्विस से तो 54 साल में 2 लाख तक पहुँचे हो, लेकिन इतनी जो 9 लाख की संख्या तैयार करनी है, वह इस सेवा से होगी। इसमें स्व-उन्नति, विश्व की उन्नति व सेवा की उन्नति समाई हुई है। स्व-उन्नति के प्रति अलग समय दो और सेवा के लिए अलग समय दो – अब इतना समय नहीं है। इसलिए बैलेंस से एक ही समय पर दोनों ही सेवा करो। क्योंकि जब आप संकल्प-शक्ति से दूसरों की सेवा करेंगे तो पहले आप संकल्पधारी स्वयं बनेंगे तब तो सेवा होगी, स्व-उन्नति हो ही गई। यह ऐसी पॉवर है, जिससे स्व-उन्नति और सेवा की उननति एक ही समय पर करते आगे बढ़ सकते हो”। फिर बाबा बोले- कई बच्चों के मन में संकल्प है कि भट्ठियाँ तो बहुत बार कर ली हैं। बाबा से वायदे भी कई बार कर चुके हैं, लेकिन परिवर्तन बहुत स्लो गति से दिखाई देता है, इसका कारण क्या? जब इच्छा भी है और चाहते सभी है, स्व के लिए भी चाहते हैं तो सेवा के लिए भी चाहते हैं। कई बच्चों का संकल्प बाबा के पास आ रहा है, सोचते हैं- ऐसे तो नहीं यह भट्ठी भी ऐसे ही हो जायेगी। बाबा आज इसका भी उत्तर देते हैं। जितना चाहना है उतना प्रैक्टिकल में क्यों नहीं होता?
बाबा ने कहा – एक तो कायदा बनाते हो कि यह होना चाहिए, यह नहीं होना चाहिए। दूसरा, वायदा भी करते हो। आप बच्चों के दिल के वायदे बाबा के पास पहुँचते हैं। कभी-कभी बाबा दिल के वायदे सुनकर स्नेह में डूब जाते लै, लेकिन फिर क्या होता है? बाबा ने कहा- जैसे आप सेवा करते हो तो उसका फायदा आपको दिखाई देता है। आपने सेवा की, सामने वाला खुश हुआ, अच्छा माना। यह जो फायदा मिला उस फायदे के कारण टैम्पटेशन होती है कि और आगे सर्विस करें। इसी रीति से जो वायदे करते हो इस वायदे से हमको फायदा क्या होगा, प्राप्तियाँ क्या होंगी – सूक्ष्म जो फायदे हैं, उसकी लिस्ट सामने नहीं लाते हो। स्थूल फायदे तो सामने आ जाते हैं, लेकिन इससे आत्मा को कितने फायदे होते हैं, प्राप्तियाँ व अनुभूतियाँ कितनी हैं- यह इमर्ज रूप में नहीं हैं। कायदे पर चलने व वायदा से जो फायदे है, उनकी लिस्ट सामने रखो, उन्हें इमर्ज करो। अभी वह थोड़ा-सा मर्ज है। जब यह सूक्ष्म, शक्तिशाली फायदे, अपने सामने इमर्ज रखेंगे तब वायदों को प्रैक्टिकल में ला सकेंगे। उसके बाद बाबा ने रूह-रूहान के लिए विशेष टॉपिक दी।
बाबा ने कहा – एक तो संकल्प-शक्ति की टॉपिक पर रूह-रूहान करो और इसकी जो विधि है – शुभ भावना और शुभ कामना इस पर चर्चा करो और योग में फिर इसको यूज़ करके देखो।
सचमुच, शुभ भावना, शुभ कामना क्या चीज़ है और जब दूसरों को हम शुभ भावना देते हैं तो उस समय क्या स्थिति होती है, कितना इससे हम एक-दो के नज़दीक आते, आत्मा के संस्कारों में कितनी समीपता फील होती है इस अनुभव को बढ़ाओ। पहले रूह-रूहान करो,फिरप्वाइंट निकालने के बाद प्रैक्टिकल में उस स्थिति में बैठो। दूसरा, बाबा ने कहा सभी कहते तो हो कि बाबा हमारे साथ है,लेकिन प्रैक्टिकल लाइफ में सर्व सम्बन्धों का रस सारे दिन में कैसे लें अभी इस अनुभूति की कमी है। भिन्न-भिन्न दिनचर्या के अनुसार, कर्म के अनुसार बाबा के भिन्न-भिन्न सम्बन्धों का अनुभव करो, रस लो। सर्व सम्बन्धों की अनुभूति क्या होती है इस पर रूह-रूहान कर इसकी डीपनेस में जाओ। ऐसे टॉपिक सुनाते बाबा ने सभी को बहुत-बहुत याद दी।
अव्यक्त दिव्य संदेश–26
11 अगस्त 1990
सबसे बड़ी शक्ति है — संकल्प शक्ति
भाग 1 — मुख्य बिन्दु
1. लाइट और माइट की किरणों से ऊँची स्थिति
बाबा एक ऊँची पहाड़ी की चोटी पर फरिश्ते रूप में खड़े थे। वहाँ से दो सूक्ष्म और शक्तिशाली किरणें निकल रही थीं—लाइट और माइट।
बाबा ने बच्चों को इन किरणों के आधार से ऊपर आने का संकेत दिया। जो बच्चे इन किरणों के आधार से ऊपर पहुँचे, वे सबसे ऊँची स्थिति तक पहुँच गए।
शिक्षा: स्व की ऊँची स्थिति और सूक्ष्म शक्ति के आधार से आगे बढ़ना है।
2. झूले, लिफ्ट और किरणों का रहस्य
बाबा ने तीन प्रकार के प्रयासों का दृश्य दिखाया।
– झूला: वे बच्चे जो केवल खुशी में झूलते हैं—“बाबा मिला, बस इतना ही बहुत है।” उनमें खुशी है, लेकिन ऊपर तक पहुँचने की शक्ति कम है।
– लिफ्ट: वे बच्चे जो सेवा या किसी सहयोग के आधार पर आगे बढ़ते हैं।
– लाइट-माइट की किरणें: वे बच्चे जो स्व की ऊँची स्थिति और सूक्ष्म शक्ति के आधार से ऊपर पहुँचते हैं।
शिक्षा: केवल खुशी या बाहरी सहयोग पर निर्भर न रहकर अपनी आन्तरिक शक्ति को बढ़ाना है।
3. मन और बुद्धि की गति को पहचानो
जब सभी बच्चे फरिश्ते रूप में ऊपर पहुँचे, तब बाबा ने प्रत्येक के मस्तक पर मन और बुद्धि की गति को ऐसे दिखाया जैसे टी.वी. पर चलती हुई दिखाई देती है।
यह दृश्य मन और बुद्धि की गति को पहचानने तथा उसे शक्तिशाली बनाने की प्रेरणा देता है।
शिक्षा: अपने संकल्पों और बुद्धि की दिशा पर ध्यान देना है।
4. वाणी की शक्ति से आगे संकल्प शक्ति
बाबा ने वाणी की सेवा की तुलना विज्ञान के स्थूल यंत्रों से की। विज्ञान अब प्रकाश की सूक्ष्म किरणों द्वारा भी अलग-अलग अनुभव कराने लगा है।
इसी प्रकार बाबा चाहते हैं कि निमित्त बनी हुई आत्माएँ अब संकल्प की सूक्ष्म किरणों द्वारा सेवा करें।
शिक्षा:
वाणी की सेवा के साथ संकल्प शक्ति की सेवा को भी बढ़ाना है।
5. संकल्प से रचना करने की शक्ति
बाबा ने ब्रह्मा की दो रचनाओं का उल्लेख किया—मुख-वंशावली और संकल्पसे सृष्टि कीरचना।
बाबा के अनुसार, संकल्प में रचना करने की शक्ति है। इसलिए विशेष ब्राह्मण आत्माओं को अपनी संकल्प शक्ति का अधिक उपयोग करना है।
शिक्षा: संकल्प शक्ति को पहचानकर उसे सेवा के निमित्त बनाना है।
6. संकल्प शक्ति से विहंग-मार्ग की सेवा
बाबा ने समझाया कि संकल्प शक्ति वायरलेस की तरह कार्य कर सकती है। जिस प्रकार विज्ञान के साधनों से संदेश भेजा जा सकता है, उसी प्रकार संकल्प शक्ति से भी सेवा की जा सकती है।
बाबा ने कहा कि बेहद की फटाफट विहंग-मार्ग सेवा भी संकल्प शक्ति से होगी।
शिक्षा: संकल्प शक्ति को अभ्यास में लाकर सूक्ष्म सेवा का अनुभव बढ़ाना है।
7. स्व-उन्नति और सेवा की उन्नति साथ-साथ
बाबा ने कहा कि अब अलग-अलग समय में स्व-उन्नति और सेवा करने के बजाय दोनों का बैलेंस रखना है।
जब हम संकल्प शक्ति से दूसरों की सेवा करेंगे, तो पहले स्वयं संकल्पधारी बनना पड़ेगा। इस प्रकार सेवा करते समय स्व-उन्नति भी होगी।
शिक्षा: एक ही समय में स्वयं को शक्तिशाली बनाते हुए दूसरों की उन्नति के लिए निमित्त बनना है।
8. वायदे प्रैक्टिकल में क्यों नहीं आते?
बाबा ने बताया कि बच्चे कायदे बनाते हैं और वायदे भी करते हैं, लेकिन परिवर्तन की गति धीमी रहती है।
इसका एक कारण यह है कि वायदे और नियमों का पालन करने से होने वाले सूक्ष्म फायदे सामने नहीं रहते। स्थूल लाभ दिखाई देते हैं, लेकिन आत्मा को मिलने वाले लाभ और अनुभूतियाँ स्पष्ट नहीं होतीं।
शिक्षा: अपने वायदे और कायदे से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभों की सूची सामने रखनी है।
9. शुभ भावना और शुभ कामना का अभ्यास
बाबाने संकल्प शक्ति की विधिके रूपमें शुभभावना और शुभ कामना पररूह-रूहान करने को कहा।
पहले इस विषय पर चर्चा करनी है, फिर योग में इसका प्रयोग करके अनुभव करना है कि शुभ भावना देने के समय अपनी स्थिति कैसी होती है और आत्माओं के संस्कारों में कितनी समीपता अनुभव होती है।
शिक्षा: शुभभावना और शुभकामना को केवल विचारतक सीमित न रख करप्रैक्टिकल में लाना है।
10. सर्व सम्बन्धों का रस अनुभव करो
बाबा ने कहा कि बच्चे कहते हैं कि बाबा हमारे साथ हैं, लेकिन दिनचर्या और कर्मों में बाबा के सर्व सम्बन्धों का रस लेने की अनुभूति अभी कम है।
इसलिए दिनचर्या और कर्म के अनुसार बाबा के विभिन्न सम्बन्धों का अनुभव करना है तथा उनकी गहराई में जाना है।
शिक्षा: बाबा के साथ सर्व सम्बन्धों की अनुभूति को दैनिक जीवन में बढ़ाना है।
भाग 2
30 छोटे प्रश्न और उत्तर
खण्ड A
लाइट-माइट और ऊँची स्थिति
प्रश्न 1. इस संदेश में सबसे बड़ी शक्ति किसे बताया गया है?
उत्तर: संकल्प शक्ति को।
प्रश्न 2. बाबा के पास से कौन-सी दो किरणें निकल रही थीं?
उत्तर: लाइट और माइट की किरणें।
प्रश्न 3. बाबा ने बच्चों को ऊपर आने का क्या आधार बताया?
उत्तर: लाइट-माइट की किरणों का आधार।
प्रश्न 4. झूले पर झूलने वाले बच्चे किस बात में मस्त थे?
उत्तर: “बाबा मिला, बस इतना ही बहुत है”—इस खुशी में।
प्रश्न 5. लिफ्ट वाले बच्चे किस आधार से ऊपर बढ़ रहे थे?
उत्तर: सेवा या किसी-न-किसी सहयोग के आधार से।
प्रश्न 6. सबसे ऊँची स्थिति तक कौन पहुँचे?
उत्तर: लाइट-माइट की किरणों के आधार से चलने वाले।
खण्ड B
संकल्प शक्ति का महत्त्व
प्रश्न 7. बाबा ने मन और बुद्धि की गति कैसे दिखाई?
उत्तर: टी.वी. के समान मस्तक पर चलती हुई।
प्रश्न 8. निमित्त बनी आत्माओं को अब किस प्रकार सेवा करनी चाहिए?
उत्तर: संकल्प की किरणों द्वारा।
प्रश्न 9. बाबा ने वाणी की सेवा की तुलना किससे की?
उत्तर: विज्ञान के स्थूल यंत्रों से।
प्रश्न 10. ब्रह्मा की दो रचनाएँ कौन-सी गाई गई हैं?
उत्तर: मुख-वंशावली और संकल्प से सृष्टि की रचना।
प्रश्न 11. रचना करने की शक्ति किसमें भी है?
उत्तर: संकल्प में।
प्रश्न 12. बाबा के अनुसार संकल्प शक्ति का भविष्य में क्या महत्त्व होगा?
उत्तर: यह सूक्ष्म सेवा और विहंग-मार्ग सेवा का निमित्त बनेगी।
प्रश्न 13. संकल्प शक्ति की तुलना किस वैज्ञानिक साधन से की गई?
उत्तर: वायरलेस के कार्य से।
खण्ड C
स्व-उन्नति और सेवा
प्रश्न 14. भट्ठी में किस विषय पर विशेष रूह-रूहान करनी है?
उत्तर: संकल्प शक्ति पर।
प्रश्न 15. संकल्प शक्ति की विधि के रूप में किन दो बातों पर चर्चा करनी है?
उत्तर: शुभ भावना और शुभ कामना।
प्रश्न 16. संकल्प शक्ति की महानता का अनुभव कैसे बढ़ेगा?
उत्तर: उसे प्रैक्टिकल में उपयोग करने से।
प्रश्न 17. बाबाके अनुसार 9लाख आत्माओं कोतैयार करने के लिए किस सेवा की आवश्यकता है?
उत्तर: संकल्प शक्ति की सूक्ष्म सेवा की।
प्रश्न 18. संकल्प शक्ति से कौन-सी दो उन्नतियाँ साथ-साथ हो सकती हैं?
उत्तर: स्व-उन्नति और सेवा की उन्नति।
प्रश्न 19. संकल्प शक्ति से दूसरों की सेवा करने के लिए पहले स्वयं क्या बनना होगा?
उत्तर: संकल्पधारी।
प्रश्न 20. संकल्प शक्ति की सेवा में अलग-अलग समय देने के बजाय क्या करना है?
उत्तर: स्व-उन्नति और सेवा का बैलेंस रखना है।
खण्ड D
वायदे और सूक्ष्म लाभ
प्रश्न 21. बच्चे कायदे और वायदे करने के बाद भी परिवर्तन में धीमे क्यों रहते हैं?
उत्तर: सूक्ष्म लाभ और प्राप्तियाँ स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखते।
प्रश्न 22. बाबा के पास बच्चों के कौन-से वायदे पहुँचते हैं?
उत्तर: दिल के वायदे।
प्रश्न 23. स्थूल फायदे और सूक्ष्म फायदे में क्या अन्तर बताया गया?
उत्तर: स्थूल फायदे दिखाई देते हैं, जबकि आत्मा के सूक्ष्म लाभ अक्सर स्पष्ट नहीं होते।
प्रश्न 24. वायदे को प्रैक्टिकल में लाने के लिए क्या करना है?
उत्तर: कायदे और वायदे से होने वाले लाभों की सूची सामने रखनी है।
प्रश्न 25. बाबा ने संकल्प शक्ति के अभ्यास के लिए कौन-सी विधि बताई?
उत्तर: पहले रूह-रूहान, फिर योग में उसका प्रैक्टिकल प्रयोग।
खण्ड E
शुभ भावना और सर्व सम्बन्ध
प्रश्न 26. शुभ भावना देने के समय किसका अनुभव बढ़ाना है?
उत्तर: अपनी स्थिति और आत्माओं के संस्कारों में समीपता का।
प्रश्न 27. शुभ भावना और शुभ कामना को किसमें उपयोग करना है?
उत्तर: योग और प्रैक्टिकल जीवन में।
प्रश्न 28. बाबा के सर्व सम्बन्धों का रस कब अनुभव करना है?
उत्तर: दिनचर्या और कर्म के अनुसार सारे दिन।
प्रश्न 29. सर्व सम्बन्धों की अनुभूति के लिए क्या करना है?
उत्तर: उस विषय पर रूह-रूहान करके उसकी गहराई में जाना है।
प्रश्न 30. इस संदेश का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उत्तर: संकल्प शक्ति बढ़ाकर स्व-उन्नति और सेवा की उन्नति एक साथ करना।
भाग 3
आत्मचिंतन के प्रश्न
1. क्या मैं अपनी संकल्प शक्ति का पर्याप्त उपयोग करता हूँ?
2. क्या मेरी खुशी के साथ आन्तरिक शक्ति भी बढ़ रही है?
3. क्या मैं सेवा के लिए दूसरों के सहयोग पर निर्भर रहता हूँ?
4. क्या मैं शुभ भावना और शुभ कामना का नियमित अभ्यास करता हूँ?
5. क्या मैं अपने वायदे और कायदे से होने वाले सूक्ष्म लाभों को पहचानता हूँ?
6. क्या मेरी स्व-उन्नति और सेवा की उन्नति में बैलेंस है?
7. क्या मैं बाबा के सर्व सम्बन्धों का रस अपनी दिनचर्या में अनुभव करता हूँ?
निष्कर्ष
इस अव्यक्त दिव्य संदेश का मुख्य आधार संकल्प शक्ति है। बाबा चाहते हैं कि बच्चे केवल वाणी की सेवा तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी सूक्ष्म और शक्तिशाली संकल्प शक्ति को भी सेवा में उपयोग करें।
शुभ भावना, शुभ कामना, बाबा के सर्व सम्बन्धों की अनुभूति और स्वयं की ऊँची स्थिति के अभ्यास से स्व-उन्नति तथा सेवा की उन्नति को साथ-साथ आगे बढ़ाना है।
आज का दृढ़ संकल्प:
मैं अपनी संकल्प शक्ति को पहचानकर उसे शुभ भावना, शुभ कामना और योग के माध्यम से प्रैक्टिकल में उपयोग करूँगा। मैं स्व-उन्नति और सेवा की उन्नति का बैलेंस रखकर सूक्ष्म सेवा में आगे बढ़ूँगा।
अस्वीकरण
यह अध्याय 11 अगस्त 1990 के उपलब्ध अव्यक्त दिव्य संदेश पर आधारित अध्ययन-सामग्री है। प्रश्न-उत्तर और मुख्य बिन्दु दिए गए मूल पाठ के अनुसार व्यवस्थित किए गए हैं।
📝 26. अव्यक्त दिव्य संदेश | 11.08.1990
20 Questions × 5 Marks = 100 Marks
