5.4.1990
स्व-परिवर्तन से वायुमण्डल को परिवर्तन करने की सेवा करो
आज जब बापदादा के पास गई तो मीठे बाबा बहुत मीठी दृष्टि से मिलन मनाते हुए बोले -आओ बच्ची, क्या समाचार लाई हो? मैं बोली बाबा, फॉरेन वाले तो अब जा रहे हैं। अब भारत के मुख्य भाई-बहनों की मीटिंग आरम्भ हो रही है। यह सुनकर कुछ सेकण्ड के लिए बाबा जैसे कोई डीप (गहन) विचारों में चले गये और बाद में बोले देखो बच्ची, बापदादा को इन विशेष सर्विसएबल बच्चों प्रति दिल का दुलार है। क्योंकि बाप से बच्चों का प्यार बहुत है। इसलिए दिन-रात सेवा में लगे हुए हैं। बापदादा बच्चों की सेवा की लगन को देख खुश भी होते हैं लेकिन समय के प्रमाण अब स्वयं और सेवा में परिवर्तन देखना चाहते हैं। क्योंकि अब दोनों की गति तीव्र होनी आवश्यक है। इसके लिए जब विशेष आत्माएँ निमित्त बनें तब सबमें वायब्रेशन जाये।
बापदादा यही चाहते हैं कि हर एक को अपने प्रति और दूसरों को सहयोग देने अर्थ दिल से संकल्प उठे और यह लहर फैले। क्योंकि अनेक बार मुरली सुनते, रूह-रूहान करते, उस समय तो समझते हैं कि मेरे में व वायुमण्डल में यह परिवर्तन होना चाहिए। लेकिन ‘चाहिए-चाहिए’ में बापदादा के दिल की चाहना कहो, शुभ आश कहो वह रह गई है। अब ऐसे बच्चे चाहिए। जैसे सेवा के निमित्त बनने की हिम्मत रखी तो बापदादा की मदद से सेवा वृद्धि को प्राप्त हो रही है, ऐसे अब फिर ऐसा ग्रुप निककले जो यह दृढ़ संकल्प करे कि हम स्व-परिवर्तन के श्रेष्ठ वायब्रेशन से वायुमण्डल को परिवर्तन कर दिखायेंगे, इस सेवा के लिए अगर कुछ अपने नाम का, सेवा की रूपरेखा का त्याग भी करना पड़े तो करके ही छोड़ेंगे। ऐसा बाप के प्यार का सबूत देने वाले सपूत बच्चों का ग्रुप बापदादा चाहते हैं जो सिर्फ ‘होना चाहिए’ नहीं कहे लेकिन स्वयं समाधान-स्वरूप ग्रुप हो। ऐसे ग्रुप के ऊपर बापदादा के दिल की दुआओं की बरसात स्वतः बरसेगी और स्वयं को ऑफर करने वालों को बापदादा अपनी तरफ से भी विशेष गिफ्ट के रूप में कुछ एकस्ट्रा मॉर्क्स दे ‘पास-विद्-ऑनर’ बना देते हैं। ऐसे कहते बापदादा आज बहुत प्यार स्वरूप भी थे, साथ-साथ जैसे मॉर्शल अपनी सेना को उमंग दिला रहे हैं यह दोनों ‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ रूप का मेल था। इसके बाद बाबा ने कहा – बच्ची, डिटेल इशारे तो मुरलियों द्वारा दिये ही हैं। इशारे से समझने वाले बच्चों ने इशारे धारण कर ही लिए हैं। ऐसे मिलन मनाए मैं साकार दुनिया में पहुँच गई।
5 अप्रैल 1990 — छोटे प्रश्न और उत्तर
विषय: स्व-परिवर्तन से वायुमण्डल को परिवर्तन करने की सेवा करो
प्रश्न 1. बापदादा को किन बच्चों से विशेष दिल का दुलार है?
उत्तर: विशेष सर्विसएबल बच्चों से।
प्रश्न 2. बापदादा बच्चों की किस विशेषता को देखकर खुश होते हैं?
उत्तर: उनकी सेवा की लगन को देखकर।
प्रश्न 3. समय के प्रमाण अब किसमें परिवर्तन आवश्यक है?
उत्तर: स्वयं में और सेवा में।
प्रश्न 4. अब स्वयं और सेवा की गति कैसी होनी चाहिए?
उत्तर: तीव्र।
प्रश्न 5. विशेष आत्माओं के निमित्त बनने से क्या होगा?
उत्तर: सबमें वायब्रेशन फैलेगा।
प्रश्न 6. हर एक के दिल से कौन-सा संकल्प उठना चाहिए?
उत्तर: अपने में परिवर्तन करने और दूसरों को सहयोग देने का।
प्रश्न 7. मुरली सुनते और रूह-रूहान करते समय बच्चे क्या समझते हैं?
उत्तर: अपने में और वायुमण्डल में परिवर्तन होना चाहिए।
प्रश्न 8. बापदादा की दिल की चाहना क्या है?
उत्तर: बच्चे केवल “होना चाहिए” न कहें, बल्कि परिवर्तन करके दिखाएँ।
प्रश्न 9. बापदादा कैसा ग्रुप चाहते हैं?
उत्तर: स्व-परिवर्तन के श्रेष्ठ वायब्रेशन से वायुमण्डल बदलने का दृढ़ संकल्प रखने वाला ग्रुप।
प्रश्न 10. वायुमण्डल परिवर्तन करने के लिए किससे शुरुआत करनी है?
उत्तर: स्वयं के परिवर्तन से।
प्रश्न 11. स्व-परिवर्तन के लिए किस प्रकार का संकल्प चाहिए?
उत्तर: दृढ़ और श्रेष्ठ संकल्प।
प्रश्न 12. सेवा के लिए आवश्यकता पड़ने पर किसका त्याग करना पड़ सकता है?
उत्तर: अपने नाम और सेवा की रूपरेखा का।
प्रश्न 13. बापदादा कैसे बच्चों का ग्रुप चाहते हैं?
उत्तर: केवल “होना चाहिए” कहने वाला नहीं, बल्कि समाधान-स्वरूप ग्रुप।
प्रश्न 14. ऐसे ग्रुप पर बापदादा की क्या बरसात होगी?
उत्तर: दिल की दुआओं की बरसात।
प्रश्न 15. स्वयं को सेवा के लिए ऑफर करने वालों को क्या विशेष प्राप्ति होती है?
उत्तर: बापदादा की ओर से अतिरिक्त मार्क्स की गिफ्ट।
प्रश्न 16. अतिरिक्त मार्क्स की गिफ्ट से बापदादा बच्चों को क्या बना देते हैं?
उत्तर: पास विद ऑनर।
प्रश्न 17. बापदादा का उस समय कौन-सा दोहरा स्वरूप था?
उत्तर: स्नेह और शक्ति स्वरूप।
प्रश्न 18. विशेष आत्माओं को अब क्या करके दिखाना है?
उत्तर: स्व-परिवर्तन के श्रेष्ठ वायब्रेशन से वायुमण्डल में परिवर्तन।
प्रश्न 19. केवल “चाहिए-चाहिए” कहने से क्या कमी रह जाती है?
उत्तर: संकल्प को वास्तविक परिवर्तन में लाने की कमी।
प्रश्न 20. इस संदेश की मुख्य शिक्षा क्या है?
उत्तर: पहले स्वयं में परिवर्तन लाकर श्रेष्ठ वायब्रेशन द्वारा वायुमण्डल को परिवर्तन करने की सेवा करना।
दैनिक अभ्यास: आज स्वयं से पूछें—मैंने अपने में कौन-सा परिवर्तन किया और अपने श्रेष्ठ वायब्रेशन से किसको सहयोग दिया?
ओम् शान्ति।
📝 22. अव्यक्त दिव्य संदेश | 05.04.1990
20 Questions × 5 Marks = 100 Marks
