11.1.1989
18 जनवरी
अव्यक्त फरिश्ता स्वरूप बनने का दिवस आज बापदादा ने अपने स्नेह की डोर से खींचते अपने पास बुला लिया और जैसे ही में वतन में
पहुंची तो बापदादा दूर से बाहों की माला द्वारा स्वागत करते हुए बोले आओ बच्ची, सगमयुग की मीठा साज सुनते समीप जाते बाप की प्रकाशमय, अलौकिक बह मूल्यवान बाहों की माला से बाप अमूल्य रत्न, बाप की नरे-रतन, जहान को नर देने वाली, जहान की नूर बच्ची, आओ। ऐसे मीठा-के हृदय में समा गई। कुछ समय तो अपने श्रेष्ठ भाग्य को ही देख-देख स्नेह की लहरों में लहराती रही और ऐसा ही अनुभव हो रहा था कि बाप में समा कर एक हो गये हैं। कुछ समय के बाद जब इस मिलन लहर से दसरी लहर में आई तो सचमुच ऐसे लगा कि बेचारे भक्तों ने इसी हमारे अनुभव को ही कह दिया है कि आत्मा परमात्मा में लीन हो एक हो जाती है। ओहो, कितना मधुर मोठा अनुभव है. उस समाने का! समान बनने का !! वह तो आप सब भी अनुभव करते हैं लेकिन 18 जनवरी को विशेष यह अनुभव करना जी। इतना अतीन्द्रिय सुख, आन्तरिक आनन्द है जो बात मत पूछो। सब कुछ मिलता है इलाही। अस्तु। यह तो प्रेम मिलन में चली गई। अब आओ तो आगे बढ़े। कुछ समय के बाद बाबा बोले – बच्ची, आज विशेष क्या समाचार लाई हो? मैं मुस्करा ही रही थी तो बाबा बोले – तुम्हारे से ज़्यादा समाचार मेरे पास पहले पहुँचा हुआ है। मैं तो देखती, सुनती रह गई। बाबा बोले – आओ तो समाचार सुनाऊँ। ऐसे कहते ही क्या देखा कि बाबा के आगे एक बहुत बड़े-से-बड़ा गुलदस्ता इमर्ज हुआ, लेकिन आज का गुलदस्ता बहुत ही विचित्र था। पत्ते भी थे, फूल भी भिन्न-भिन्न थे लेकिन न्यारे थे। आगे जाकर देखा तो क्या देखा कि सभी बच्चों ने जो बापदादा को न्यू ईयर और मीटिंग के संदेश के रिटर्न में स्नेह के पत्र लिखे थे जो सब मुख्य भाई-बहनों के थे और हर एक ने अपने दिल के स्नेह का आवाज़ लिखा है, वह सब पत्र फूल के रूप में सजे हुए थे और फूल भी वह थे जिसका शेप (आकार) जैसे माइक का आवाज़ फैलाने वाले बड़े हॉर्न होते हैं ऐसे रूप में फूल थे। बाबा बोले इन फूलों को देखो तो जैसे ही मैं फूल को हाथ लगाने लगी तो वह फूल खिलते पत्र का रूप बन गया लेकिन मीटिंग वाले भाई-बहनों से बहुत ज़्यादा वह पत्र थे। तो बाबा बोले बच्ची यह न्यू ईयर पर देश-विदेश के सब बच्चों ने जो बाप को स्नेह के व मिलन मनाने की अर्जी के मीठे उल्हनों के पत्र और दृढ़ संकल्प किया वह बाबा के पास पत्र पुष्प बन इस गुलदस्ते के रूप में पहुँच गये हैं। बाप भी सभी बच्चों को यही रिटर्न संदेश दे रहे हैं कि सबके पुष्प पत्र, स्व के पुरुषार्थ अर्थ और सेवा के उमंग-उत्साह के पाये, बाप भी बच्चों से मिलन मनाने बिना रह नहीं
सकते क्योंकि बाप के लिए भी संसार ही बच्चे हैं। बाप तो बच्चों की जीवन का सदा सारथी और साथी है। बच्चे दिल से बुलाते – ओ बाबा और बाबा अव्यक्त रूप में पहुँचा की पहुँचा और बच्चों को कहा – बोलो बच्चे, क्या हुक्म है। हजूर हाज़िर है!! सच्चे दिल का आवाज़ दिलाराम के पास उस रफ्तार से पहुँचता है जो सेकण्ड से भी कम फास्ट गति है!!! हर एक बच्चे को बापदादा एक-एक शुभ संकल्प का व एक निःस्वार्थ सहयोग की भावना का फल इतना देता जो गिनती नहीं हो सकती, अनगिनत है और इतने समय में देता जो उससे फास्ट गति की कोई भेद में नहीं है। संगम पर दाता का खुला भण्डार है, लेने वाला जितना ले, उन पर है। इसके बाद बाबा ने कहा – बच्चों ने न्यू ईयर तो मनाया, बहुत अच्छा मनाया, लेकिन तुम्हारा न्यू चैप्टर का नया दिल 18 जनवरी है, क्योंकि
- अट्ठारह जनवरी के दिन ही ब्रह्मा बाप ने संगमयुग की अन्तिम कर्मातीत स्टेट का सिम्बल (लक्ष्य) तुम बच्चों के आगे स्पष्ट दिया। न देह की, न सम्बन्ध की, न पदार्थ की तीनों सीढ़ी पार कर मंज़िल का सम्पन्न स्वरूप, सिद्धि स्वरूप दिखाया।
- अट्ठारह जनवरी को ही ब्रह्मा बाप शिव दादा ने शक्तियों को सकाार रूप में सेवा की ज़िम्मेवारी की विलपॉवर दे, निमित्त बनाया। स्थापना के आदि में धन की शक्ति विल की और अन्त में सेवा की विल पॉवर दी अर्थात् निमित्त बनने की पॉवर विल की।
- अट्ठारह जनवरी ही ब्रह्मा बाप के साकार रूप से साक्षी बन न्यारा और अति प्यारा बन, अव्यक्त फ़रिश्ता स्वरूप बनने का दिवस है।
- अट्ठारहजनवरी ही ब्रह्मा के व्यक्त बंधन से मुक्त हो, अव्यक्त रूप से तीव्रगति की सेवा के निमित्त बनने का दिव्य दिवस है। जिसका सबूत आप बच्चे प्रत्यक्ष रूप में देख रहे हैं जो साकार रूप से महावाक्य उच्चारे और उस समय मुश्किल लगते थे, वही अब कितने सहज साकार रूप में हो रहे हैं।
- अट्ठारह जनवरी ही तुम बच्चों को अन्तर्मुखी अव्यक्त स्थिति द्वारा अव्यक्त मिलन मनाने, अव्यक्त से रूह-रूहान करने, अव्यक्त बाप से कनेक्शन द्वारा करेन्ट लेने की विशेष अनुभूति का अभ्यास बढ़ाने वाले अर्थात् उड़ती कला की ओर ले जाने वाले हैं।
ऐसे स्व-पुरुषार्थ में सेवा में समर्थी दिलाने वाला यह स्मृति दिवस है। इसलिए नये चैप्टर के नये उमंग-उत्साह के दिवस को उसी विधि से मनाना अर्थात् सर्व सिद्धि को प्राप्त करना। ऐसे ही बापदादा ने याद-प्यार देते, दिव्य दिवस का महत्त्व सुनाते, बधाई और विदाई दी।
रूप से क्या अनुभव करना है?
उत्तर: अतीन्द्रिय सुख, आन्तरिक आनन्द और बाप के साथ के मधुर मिलन का अनुभव।
भाग 2: स्नेह के पत्रों का गुलदस्ता
प्रश्न 7. बापदादा के सामने कैसा गुलदस्ता प्रकट हुआ?
उत्तर: पत्तों और विभिन्न प्रकार के फूलों से सजा एक विचित्र गुलदस्ता।
प्रश्न 8. गुलदस्ते के फूल किस रूप में थे?
उत्तर: माइक के आवाज़ फैलाने वाले बड़े हॉर्न के आकार जैसे।
प्रश्न 9. वे फूल वास्तव में क्या थे?
उत्तर: न्यू ईयर और मीटिंग के संदेश के उत्तर में बच्चों द्वारा लिखे गए स्नेह के पत्र।
प्रश्न 10. बच्चों के पत्रों में क्या व्यक्त किया गया था?
उत्तर: दिल का स्नेह, मिलन मनाने की अर्जी, मीठे उल्हने और दृढ़ संकल्प।
प्रश्न 11. बापदादा ने बच्चों के पत्रों को किस रूप में स्वीकार किया?
उत्तर: पत्र-पुष्पों के गुलदस्ते के रूप में।
प्रश्न 12. बापदादा बच्चों को मिलन के विषय में क्या संदेश देते हैं?
उत्तर: बाप भी बच्चों से मिलन मनाए बिना नहीं रह सकते, क्योंकि बच्चों का संसार ही बाप का संसार है।
भाग 3: सच्चे दिल की पुकार
प्रश्न 13. बापदादा बच्चों के जीवन में किस रूप में रहते हैं?
उत्तर: सदा सारथी और साथी के रूप में।
प्रश्न 14. बच्चे दिल से बाबा को पुकारते हैं तो क्या होता है?
उत्तर: बाबा अव्यक्त रूप में पहुँच जाते हैं और कहते हैं, “बोलो बच्चे, क्या हुक्म है। हजूर हाज़िर है!”
प्रश्न 15. सच्चे दिल की आवाज़ कहाँ पहुँचती है?
उत्तर: दिलाराम बाप के पास।
प्रश्न 16. बापदादा प्रत्येक शुभ संकल्प और निःस्वार्थ सहयोग का क्या फल देते हैं?
उत्तर: अनगिनत फल देते हैं, वह भी अत्यन्त तीव्र गति से।
प्रश्न 17. संगमयुग में दाता का भण्डार कैसा है?
उत्तर: खुला भण्डार है; लेने वाला जितना ले, यह उस पर है।
भाग 4: 18 जनवरी का विशेष महत्त्व
प्रश्न 18. बापदादा ने 18 जनवरी को बच्चों का नया चैप्टर क्यों कहा?
उत्तर: क्योंकि यह अव्यक्त फरिश्ता स्वरूप बनने और नए उमंग-उत्साह से आगे बढ़ने का स्मृति दिवस है।
प्रश्न 19. 18 जनवरी को ब्रह्मा बाप ने कौन-सा लक्ष्य स्पष्ट किया?
उत्तर: संगमयुग की अन्तिम कर्मातीत स्टेट का लक्ष्य।
प्रश्न 20. कर्मातीत स्टेट में किन तीन सीढ़ियों को पार करना है?
उत्तर: देह, सम्बन्ध और पदार्थ की तीनों सीढ़ियों को।
प्रश्न 21. ब्रह्मा बाप ने शक्तियों को 18 जनवरी को क्या दिया?
उत्तर: साकार रूप में सेवा की जिम्मेवारी निभाने के लिए विलपॉवर दी और निमित्त बनाया।
प्रश्न 22. स्थापना के आदि में और अन्त में कौन-सी शक्तियाँ विल की गईं?
उत्तर: आदि में धन की शक्ति और अन्त में सेवा की विलपॉवर।
प्रश्न 23. 18 जनवरी को किस स्वरूप में बनने का दिवस बताया गया है?
उत्तर: साक्षी बन न्यारा और अति प्यारा बनकर अव्यक्त फरिश्ता स्वरूप बनने का दिवस।
प्रश्न 24. ब्रह्मा के व्यक्त बन्धन से मुक्त होने का क्या परिणाम है?
उत्तर: अव्यक्त रूप से तीव्र गति की सेवा के निमित्त बनना।
प्रश्न 25. अव्यक्त मिलन के लिए किस स्थिति का अभ्यास बढ़ाना है?
उत्तर: अन्तर्मुखी अव्यक्त स्थिति का।
भाग 5: अव्यक्त कनेक्शन और उड़ती कला
प्रश्न 26. अव्यक्त बाप से कनेक्शन द्वारा क्या प्राप्त होता है?
उत्तर: करेन्ट लेने की विशेष अनुभूति होती है।
प्रश्न 27. अव्यक्त स्थिति में रहकर कौन-से अनुभव करने हैं?
उत्तर: अव्यक्त मिलन मनाना, अव्यक्त से रूह-रूहान करना और बाप से कनेक्शन द्वारा करेन्ट लेना।
प्रश्न 28. 18 जनवरी का स्मृति दिवस किसमें समर्थी देता है?
उत्तर: स्व-पुरुषार्थ और सेवा में समर्थी देता है।
प्रश्न 29. इस दिव्य दिवस को किस विधि से मनाना है?
उत्तर: नए उमंग-उत्साह के साथ, ऐसी विधि से कि सर्व सिद्धियों की प्राप्ति हो।
प्रश्न 30. 18 जनवरी की मुख्य शिक्षा क्या है?
उत्तर: बाप के स्नेह में समाकर, साक्षी और न्यारे बनकर, अव्यक्त फरिश्ता स्वरूप धारण करना तथा सेवा में तीव्र गति से आगे बढ़ना।
📝 20. अव्यक्त दिव्य संदेश | 11.01.1989
20 Questions × 5 Marks = 100 Marks
