16.5.1991
परिवर्तन और प्रवेशता की एक्सरसाइज़
आज आप सभी देश-विदेश के बच्चों का बाबा प्रति याद-प्यार लेते वतन में पहुंची। तो बाबा बहुत ही शक्तिशाली दृष्टि देते हुए, मुस्कराते हुए मिले और मिलते ही पूछा- बच्ची, तुम्हारी दुनिया का क्या हालचाल है? मैंने कहा- बाबा, एक तरफ तो तपस्या चल रही है, दूसरे तरफ इलेक्शन का हंगामा चल रहा है। बाबा ने कहा तुम बच्चे तो कितने निश्चिन्त हो! उन्हें तो इलेक्शन और सलेक्शन (चुनाव, चुने जाने) का फिक्र है लेकिन तुम्हें तो स्वयं भगवान ने सलेक्ट (चुन लिया) कर लिया। तुम्हें इस सलेक्शन के लिए कुछ करना पड़ा? तुमने तो सिर्फ दिल से कहा ‘मेरा बाबा’। इस एक ही दिल के शब्द से बाबा ने सेकण्ड में आप बच्चों को चुन लिया अर्थात् सलेक्ट कर लिया। तो तुम्हारी सलेक्शन कितनी बढ़िया है। भावी बन गई। कहते भी हैं- भावी टाली नहीं जाती। यह भगवान के सलेक्शन की भावी बन गई जो हर कल्प रिपीट होती रहेगी। आपके दिल की भावना ने ड्रामा की भावी बना दी, कितना सरल हुआ! हमने कहा कि बाबा हम तो ऐसे कर भी नहीं सकते जैसे यह लोग इलेक्शन में करते हैं। बाबा ने कहा कि तुम्हारी हिम्मत ऐसा नेता बनने की नहीं है और तुम यह कर भी नहीं सकते। इसलिए जिनमें वो हिम्मत नहीं है, रुचि नहीं है, उन्हें ही बाबा ने सहज सलेक्ट कर लिया।फिर बाबा ने पूछा और क्या समाचार है? मैंने कहा बाबा, चारों ओर तपस्या चल रही है, हर एक अपने-अपने यथा शक्ति तपस्या में आगे बढ़ रहे हैं। मेरा यह शब्द बोलना और बाबा का बहुत ही रहस्ययुक्त मुस्कराना। मैं बाबा को देखती रही, बाबा के दिल में कुछ आ रहा था। मैने कहा -बाबा, आप बहुत मुस्करा रहे हैं। बाबा ने कहा- बच्चों ने लगन तो लगाई है लेकिन अग्नि नहीं लगी है। लगन अग्नि रूप बन जाये, जिसमें यह पुरानी दुनिया स्वाहा हो जाए। लगन तो ठीक है लेकिन अभी अग्नि रूप अर्थात् ज्वाला रूप बन करके इन आत्माओं को मुक्ति दिलाओ। जब आपकी लगन अग्नि रूप बनेगी तब इस अग्नि में यह सब स्वाहा होगा। इसके लिए कितनी तेज पॉवरफुल ज्वाला चाहिए, जिसमें सारी प्रकृति, आत्माओं के पाप कर्म सब परिवर्तन हों! यह गायन है कि यज्ञ-कुण्ड से ज्वाला निकली और उसमें सारी पुरानी दुनिया परिवर्तन हो गई। तो परिवर्तन किस आग में होगा? तेज आग चाहिए ना! आप लोग अभी लगन तक पहुँचे हो या अग्नि तक पहुँचे हो? मैंने कहा – दोनों ही हर एक में यथा शक्ति होंगे। बाबा ने कहा- अब हर एक का ज्वाला रूप वतन तक पहुँचे, वह नहीं पहुँचा है। बाकी हर एक अपने वेस्टेज (व्यर्थ) को बचा रहे हैं, इसलिए बाबा मुबारक रूप चाहिए। देते हैं। समय निकालने का अटेन्शन है. बैठने का अटेन्शन है। लेकिन अभी तपस्या अग्नि फिर बाबा मुस्कराने लगे और कहा कि मेरे सामने सभी बच्चे आ रहे हैं. मैं उनकी रिजल्ट देख रहा है और मुस्करा रहा है। बाबा ने कहा अगर बच्चों को भाषण करने की स्टेज बडी मिले तो खुश होते हैं। हर एक समझता है कि मेरे को बडी स्टेज का चांस मिले। जैसे सेवा की बडी, ऊँचो स्टेज में जाने का प्रयत्न करते हैं. कोशिश करते हैं. सोचते हैं कि हमें भी चांस हो तो हम कर सकते योग की स्टेज में मुझे बडे-ते-बडी. ऊँची स्टेज लेनी है लेकिन इसमें चांस लेने वाले चांसलर बहुत हैं। ऐसे ही याद की भी इतनी लगन हो कि मैं याद में ऊँची स्टेज लें। यह भी उमंग-उत्साह रहे कि कम हैं। इसलिए बाबा देख रहे थे कि दोनों तरफ कितने-कितने चांसलर है। यही दृश्य देखकर मुस्करा रहे थे। फिर बाबा ने कहा अच्छा, यह तपस्या जो कर रहे हो, तपस्या माना क्या? तपस्या माना परिवर्तन और परिवर्तन की निशानी है सफलता / तो तपस्या कर रहे हो लेकिन इसकी जो निशानी है – हर कार्य में सफलता, वह सफलता की स्टेज आगे बढ़ रही है? संकल्प, बोल, सम्पर्क-सम्बन्ध में तपस्या की प्रैक्टिकल निशानी सफलता दिखाई दे तब बाबा कहेगा कि तपस्या अभी लगन से अग्नि रूप में परिवर्तन हो रही है। तपस्या में बैठते हो, यह तो ठीक है लेकिन बाबा प्रैक्टिकल में योग का प्रयोग अर्थात् हर कार्य में सफलता देखना चाहते हैं। फिर बाबा ने कहा -चलो, बाबा आज आपको एक्सरसाइज़ दिखाता है।आगे बले तो एक बहुत बड़ा मैदान था, उसमें सामने लिखा हुआ था- परिवर्तन और प्रवेशता। बाबा ने कहा – अभी मैं सभी बच्चों को साकार रूप में इमर्ज करता हूँ। सेकण्ड में सभी इमर्ज हो गये। बहुत अधिक संख्या थी। बाबा ने कहा- सभी तपस्या में बैठ जाओ, सभी तपस्या में बैठ गये। बाबा सामने खड़ा था। बाबा ने कहा अभी जैसे मैं करता जाऊँ, वैसे कैच करके तुम भी फालो फादर करो। ब्रह्मा बाबा का भी साकार रूप था, शिव बाबा नहीं थे। तो क्या देखा? ब्रह्मा बाबा के मस्तक से एक दिव्य, मीठी लाइट निकली। जैसे लेज़र बिम के शो में सीधी किरणें निकलती हैं, ऐसे लाइट की किरण एकदम सीधी निकली और बादलों के भी ऊपर जो बाबा का सम्पूर्ण फ़रिश्ता रूप था, उसमें वो लाइट सीधी जाकर प्रवेश हुई। फिर वहाँ पहुँच कर वो लाइट, लाइट के रास्ते से मूलवतन में चली गई और वहाँ सितारे के माफिक चमकने लगी। थोड़े टाइम के बाद वहाँ से आकारी रूप में आई, फिर एक सेकण्ड में साकारी रूप में आ गई, यह आना और जाना देखा।इसको ही बाबा ने कहा – परिवर्तन और प्रवेशता। फिर बाबा ने कहा अभी तुम बच्चे फालो फ़ादर करो। सभी बच्चे यह एक्सरसाइज़ करने लगे। जिसकी प्रैक्टिस थी वे तो शरीर से निकल फ़रिश्ते-रूप में टिक गये। कोई-कोई को समय लग रहा था। यह सीन बाबा भी देख रहे थे और हम भी बाबा के साथ साक्षी होकर देख रही थी। सभी के भिन्न-भिन्न अनुभव थे। बाबा ने सभी से पूछा-साकार-से-फ़रिश्ता और फ़रिश्ता-से-निराकारी आत्मा रूप में स्थित होने में सेकण्ड से भी कम टाइम लगा या ज्यादा लगा?फिर बाबा ने सुनाया कि – फ़रिश्ता रूप में वही स्थित हो सकता है जिसका देह के साथ लगाव का रिश्ता न हो। यदि व्यर्थ संकल्प भी चलते है तो यह भी बुद्धि का, मन का लगाव है। फरिश्ता माना सिर्फ देह के सम्बन्ध का रिश्ता नहीं लेकिन मन का, बुद्धि का, वैभव का, वस्तु का – यह कोई भी रिश्ता न हो। यदि कोई रिश्ता है तो तपस्या की लगन अग्नि का रूप नहीं बन सकती। कोई-न-कोई लगाव अटका देगा, शरीर से परे होने नहीं देगा। इसलिए तपस्या में पहले तो अपने ये रिश्ते अर्थात् देह के जो लगाव हैं- उसे कट करो। जब यह लगाव कट होगा तब ही देह के सम्बन्ध भी ऑटोमेटिक कट हो जायेंगे। फिर परिवर्तन और प्रवेशता की प्रैक्टिस होगी तो सेकण्ड में साकारी से फ़रिश्ता और फ़रिश्ता से बिन्दी रूप में स्थित हो जायेंगे, सेकण्ड में अथॉर्टी होकर जायेंगे-आयेंगे। अभी इस एक्सरसाइज़ की आवश्यकता है। अब इस गुह्य रीति से तपस्या करो। केवल मैं आत्मा हूँ, शान्त स्वरूप हूँ यह कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन एक सेकण्ड में जाओ-आओ, अशरीरी हो जाओ – यह अभ्यास करो तब लगन ‘अग्नि’ रूप हो सकती है। लगन में सब पास हैं। नम्बरवार हैं लेकिन फिर भी ठीक हैं। अभी लगन को ‘अग्नि’ रूप बनाने के लिए यह एक्सरसाइज़ बहुत-बहुत आवश्यक है।फिर बाबा ने डबल विदेशी बच्चों को याद किया और उन्हों के प्रति कहा कि तपस्या का अटेन्शन और उमंग विदेश में भी अच्छा है। अभी इस एक्सरसाइज़ को और आगे बढ़ाना है। बाबा ने कहा – डबल विदेशी बच्चों को बाबा मुबारक भी देते हैं क्योंकि इन्हों में महसूसता की शक्ति अच्छी है। महसूसता शक्ति के कारण जो भी भूल जाते हैं, वह कट हो जाती है। ऐसे ही चलाते नहीं हैं, महसूसता शक्ति से अपना बोझ कम कर देते हैं। यह विशेषता है। इसी कारण लिफ्ट मिल जाती है। अभी और भी सूक्ष्म रीति से अपनी भी चेकिंग, सेवा में भी चेकिंग करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे और विशेष अटेन्शन देते हुए आगे बढ़ेंगे तो सफलता को प्राप्त करेंगे। विदेशी बच्चों ने बाबा को महसूसता और परिवर्तन के पत्र लिखे थे। तो बाबा ने यह उनके पत्र के रेसपाण्ड में जवाब दिया। दादी जानकी ने भी विशेष बाबा को थैक्स लिखी थी। बाबा ने कहा- हिम्मत बच्ची की, मदर बाबा की। सर्व परिवार की दुआओं से तन में, मन में, धन में तीनों में आगे बढ़ रही है, बढ़ती रहेगी। फिर बाबा ने कहा – जिन्होंने शुक्रिया-शुक्रिया दिल से गीत गाया है, बाबा भी दिल से गीत गा रहे हैं ‘बच्चे शुक्रिया’। परदादी को भी खास बाबा ने याद दी और कहा – विजयी बन कर आ गई। जब से पैदा हुई है तब से विजय का तिलक है ही। विजयी बन करके सेवा करके आ गई। फिर बाबा ने सभी दादियों को याद दी और कहा निमित्त दादियाँ जो हैं उन्हों पर दुआओं की बारिश होती रहती है, इससे बहुत आगे जा रही है। बेफिक्र है, इसलिए कोई बड़ी बात नहीं है। विशेष टीचर्स का जो एकाउण्ड का काम चल रहा है उसके प्रति बाबा ने कहा कि टीचर्स को यह नहीं समझना चाहिए कि यह कोई ज़रूरी काम नहीं है। अगर इसे ज़रूरी नहीं समझेंगे तो भी फुल का सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा। इसमें भी नॉलेजफुल बनना है। अगर कोई भी कार्य में फुल नहीं तो सक्सेसफुल नहीं। यह काम कोई रमेश भाई का नहीं है, यह भी यज्ञ की सेवा कर रहा है। बाबा, रमेश भाई तथा उनके सभी साथियों की स्नेह की मालिश कर रहा है। फिर सभी को याद-प्यार देते हुए कहा कि – लगन को अग्नि रूप में परिवर्तन करो और ऊँची स्टेज लो।
अव्यक्त मुरली
परिवर्तन और प्रवेशता की एक्सरसाइज़
दिनांक: 16 मई 1991
प्रस्तावना
इस अव्यक्त संदेश में बापदादा ने तपस्या का वास्तविक स्वरूप समझाया है। बाबा ने बताया कि केवल लगन होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगन को अग्नि रूप बनाना है, जिससे पुरानी दुनिया, पुराने संस्कार और आत्माओं के पाप कर्म परिवर्तन हों।
तपस्या का अर्थ है—परिवर्तन। इसकी प्रैक्टिकल निशानी है—हर कार्य में सफलता। बाबा ने विशेष रूप से परिवर्तन और प्रवेशता की एक्सरसाइज़ कराई, जिसमें साकार शरीर से फ़रिश्ता रूप और फ़रिश्ता रूप से निराकारी बिन्दु रूप में स्थित होने का अभ्यास कराया।
इस संदेश में देह, मन, बुद्धि, वैभव और वस्तुओं के लगाव को समाप्त करने तथा एक सेकण्ड में अशरीरी होने का अभ्यास करने की प्रेरणा दी गई है।
1. भगवान द्वारा सलेक्शन — सबसे बड़ा भाग्य
बापदादा ने पूछा कि दुनिया में लोग इलेक्शन और सलेक्शन की चिन्ता करते हैं, लेकिन आप बच्चे कितने निश्चिन्त हैं।
दुनिया में चुनाव जीतने के लिए प्रयास करना पड़ता है, लेकिन बच्चों को भगवान ने स्वयं सलेक्ट कर लिया है।
बच्चों ने केवल दिल से कहा—“मेरा बाबा।” इसी एक दिल के शब्द से बाबा ने सेकण्ड में बच्चों को चुन लिया।
यह सलेक्शन ऐसी भावी बन गई है जो हर कल्प रिपीट होती रहेगी।
मुख्य शिक्षा: भगवान के सलेक्शन का भाग्य प्राप्त करके निश्चिन्त रहना है।
2. लगन को अग्नि रूप बनाओ
बाबा ने बताया कि बच्चों ने लगन तो लगाई है, लेकिन अभी वह अग्नि रूप नहीं बनी है।
लगन को ऐसी ज्वाला रूप बनाना है जिसमें पुरानी दुनिया स्वाहा हो जाए और आत्माओं को मुक्ति मिले।
इस अग्नि में केवल अपने संस्कार ही नहीं, बल्कि प्रकृति और आत्माओं के पाप कर्म भी परिवर्तन हों—ऐसी शक्तिशाली ज्वाला की आवश्यकता है।
बाबा ने पूछा कि आप लोग अभी लगन तक पहुँचे हो या अग्नि रूप तक?
मुख्य शिक्षा: लगन को शक्तिशाली ज्वाला बनाकर विश्व परिवर्तन की सेवा करनी है।
3. तपस्या में केवल समय देना पर्याप्त नहीं
बाबा ने देखा कि बच्चे तपस्या के लिए समय निकाल रहे हैं और बैठने का अटेन्शन भी रख रहे हैं।
लेकिन अभी तपस्या की अग्नि रूप शक्ति वतन तक नहीं पहुँची है।
बाबा ने समझाया कि केवल समय निकालना और बैठना ही तपस्या की सम्पूर्णता नहीं है। तपस्या का प्रभाव शक्तिशाली ज्वाला के रूप में दिखाई देना चाहिए।
मुख्य शिक्षा: तपस्या में बैठने के साथ उसकी शक्ति और प्रभाव भी बढ़ाना है।
4. ऊँची स्टेज लेने की लगन
बाबा ने बताया कि जैसे सेवा में बड़ी और ऊँची स्टेज पर जाने का उमंग रहता है, वैसे ही याद की यात्रा में भी ऊँची स्टेज लेने का उमंग होना चाहिए।
हर आत्मा चाहती है कि उसे बड़ी सेवा का अवसर मिले, लेकिन याद की ऊँची स्टेज लेने के लिए उतने ही चांसलर नहीं दिखाई देते।
बाबा ने दोनों बातों का अन्तर देखते हुए समझाया कि योग की स्टेज में भी ऊँचा लक्ष्य और उमंग रखना आवश्यक है।
मुख्य शिक्षा: सेवा की ऊँची स्टेज के साथ याद की ऊँची स्टेज लेने का भी लक्ष्य रखना है।
5. तपस्या का अर्थ — परिवर्तन
बाबा ने तपस्या का अर्थ स्पष्ट किया—तपस्या माना परिवर्तन।
परिवर्तन की निशानी है सफलता।
यदि तपस्या हो रही है तो उसका प्रभाव संकल्प, बोल, सम्पर्क और सम्बन्ध में दिखाई देना चाहिए।
हर कार्य में सफलता की स्टेज आगे बढ़े, तभी बाबा कहेंगे कि तपस्या लगन से अग्नि रूप में परिवर्तन हो रही है।
मुख्य शिक्षा: तपस्या की प्रैक्टिकल निशानी हर कार्य में सफलता है।
6. योग का प्रयोग — हर कार्य में सफलता
बाबा ने समझाया कि केवल तपस्या में बैठना पर्याप्त नहीं है। योग का प्रयोग हर कार्य में दिखाई देना चाहिए।
संकल्प में परिवर्तन, बोल में परिवर्तन और सम्पर्क-सम्बन्ध में परिवर्तन—ये सभी तपस्या के प्रैक्टिकल परिणाम हैं।
बाबा योग की प्राप्तियों को जीवन के प्रत्येक कार्य में प्रयोग होते देखना चाहते हैं।
मुख्य शिक्षा: योग की शक्ति को व्यवहार में प्रयोग करके सफलता प्राप्त करनी है।
7. परिवर्तन और प्रवेशता की एक्सरसाइज़
बाबा ने सभी बच्चों को एक बहुत बड़े मैदान में इमर्ज किया। मैदान के सामने लिखा था—“परिवर्तन और प्रवेशता”।
सभी बच्चों को तपस्या में बैठाया गया। बाबा ने कहा कि जैसे मैं करता जाऊँगा, वैसे ही तुम कैच करके फॉलो फादर करना।
ब्रह्मा बाबा का साकार रूप सामने था। उनके मस्तक से एक दिव्य और मीठी लाइट निकली। वह सीधी किरण के रूप में ऊपर सम्पूर्ण फ़रिश्ता रूप में प्रवेश हुई।
फिर वह लाइट मूलवतन में पहुँची और वहाँ सितारे के समान चमकने लगी। कुछ समय बाद वहाँ से आकारी रूप में आई और फिर एक सेकण्ड में साकारी रूप में आ गई।
इसी को बाबा ने परिवर्तन और प्रवेशता की एक्सरसाइज़ कहा।
मुख्य शिक्षा: साकार से फ़रिश्ता और फ़रिश्ता से निराकारी आत्मा रूप में स्थित होने का अभ्यास करना है।
8. फॉलो फादर का अभ्यास
बाबा ने सभी बच्चों को ब्रह्मा बाबा के समान एक्सरसाइज़ करने के लिए कहा।
जिन बच्चों को अभ्यास था, वे सहज ही शरीर से परे होकर फ़रिश्ता रूप में स्थित हो गए। कुछ बच्चों को इसमें समय लगा।
सभी के अनुभव अलग-अलग थे।
बाबा ने पूछा कि साकार से फ़रिश्ता और फ़रिश्ता से निराकारी आत्मा रूप में स्थित होने में सेकण्ड से भी कम समय लगा या अधिक?
मुख्य शिक्षा: फॉलो फादर करते हुए इस एक्सरसाइज़ को सहज और तीव्र बनाना है।
9. फ़रिश्ता स्थिति की पहचान
बाबा ने समझाया कि फ़रिश्ता रूप में वही स्थित हो सकता है जिसका देह के साथ लगाव का रिश्ता न हो।
केवल स्थूल शरीर का सम्बन्ध ही लगाव नहीं है। व्यर्थ संकल्प भी बुद्धि और मन का लगाव है।
फ़रिश्ता बनने के लिए मन, बुद्धि, वैभव और वस्तुओं के प्रति भी लगाव नहीं होना चाहिए।
यदि किसी प्रकार का लगाव बाकी है तो वह आत्मा को शरीर से परे होने में अटका सकता है।
मुख्य शिक्षा: फ़रिश्ता स्थिति के लिए सभी प्रकार के लगाव समाप्त करने हैं।
10. पहले लगाव को कट करो
बाबा ने विशेष रूप से कहा कि तपस्या में सबसे पहले अपने देह के लगाव को समाप्त करना है।
जब मन, बुद्धि, वैभव और वस्तुओं के लगाव समाप्त होंगे, तब देह के सम्बन्ध भी ऑटोमेटिक कट होते जाएँगे।
कोई न कोई लगाव आत्मा को अटका देता है और अशरीरी होने नहीं देता।
मुख्य शिक्षा: अशरीरी बनने के लिए पहले सभी प्रकार के लगावों को समाप्त करना है।
11. एक सेकण्ड में साकार से निराकारी बनो
बाबा ने कहा कि केवल यह समझना कि मैं आत्मा हूँ और शान्त स्वरूप हूँ, कोई बड़ी बात नहीं है।
वास्तविक अभ्यास यह है कि एक सेकण्ड में साकार से फ़रिश्ता और फ़रिश्ता से बिन्दु रूप में स्थित हो जाएँ।
इसी प्रकार सेकण्ड में अथॉरिटी होकर आना-जाना सीखना है।
बाबा ने इस एक्सरसाइज़ को तपस्या की अग्नि रूप स्थिति प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक बताया।
मुख्य शिक्षा: एक सेकण्ड में अशरीरी होकर बिन्दु रूप में स्थित होने का अभ्यास करना है।
12. लगन को अग्नि रूप बनाने का साधन
बाबा ने कहा कि लगन में सभी पास हैं और नम्बरवार हैं, लेकिन अब लगन को अग्नि रूप बनाना है।
इसके लिए परिवर्तन और प्रवेशता की एक्सरसाइज़ बहुत आवश्यक है।
जब आत्मा सहज रूप से साकार, आकारी और निराकारी स्थिति में आ-जा सकेगी, तब तपस्या की शक्ति और प्रभाव बढ़ेगा।
मुख्य शिक्षा: निरन्तर अभ्यास से लगन को अग्नि रूप बनाना है।
13. डबल विदेशी बच्चों की विशेषता — महसूसता की शक्ति
बाबा ने डबल विदेशी बच्चों की तपस्या के प्रति अटेन्शन और उमंग-उत्साह की सराहना की।
उनमें महसूसता की शक्ति अच्छी है। वे अपनी भूलों को महसूस करके उनका बोझ कम कर लेते हैं।
बाबा ने कहा कि इसी विशेषता के कारण उन्हें लिफ्ट मिलती है।
अब उन्हें इस एक्सरसाइज़ को और आगे बढ़ाना है तथा स्वयं की और सेवा की सूक्ष्म चेकिंग करते हुए आगे बढ़ना है।
मुख्य शिक्षा: महसूसता की शक्ति के साथ सूक्ष्म चेकिंग और परिवर्तन का अभ्यास बढ़ाना है।
14. हिम्मत बच्ची की, मदद बाबा की
बाबा ने दादी जानकी के प्रति विशेष स्नेह व्यक्त किया।
बाबा ने कहा—हिम्मत बच्ची की, मदद बाबा की।
सर्व परिवार की दुआओं से वे तन, मन और धन तीनों में आगे बढ़ रही हैं और बढ़ती रहेंगी।
बाबा ने उन बच्चों को भी याद किया जिन्होंने दिल से शुक्रिया का गीत गाया था और कहा कि बाबा भी दिल से बच्चों को शुक्रिया कहते हैं।
मुख्य शिक्षा: हिम्मत रखकर आगे बढ़ो, बाबा और परिवार की दुआओं से मदद मिलती रहेगी।
15. विजयी बनकर सेवा करो
बाबा ने परदादी को विशेष याद दिया और कहा कि वे विजयी बनकर आई हैं। जन्म से ही उनके मस्तक पर विजय का तिलक है और वे विजयी बनकर सेवा करके आई हैं।
सभी निमित्त दादियों पर दुआओं की बारिश होती रहती है। इसी दुआओं से वे आगे बढ़ रही हैं।
मुख्य शिक्षा: विजय का तिलक धारण करके सेवा में आगे बढ़ना है।
16. टीचर्स के एकाउण्ड की सेवा भी यज्ञ सेवा है
बाबा ने विशेष रूप से टीचर्स के एकाउण्ड के काम के बारे में समझाया।
टीचर्स को यह नहीं समझना चाहिए कि एकाउण्ड का काम कोई जरूरी काम नहीं है। यदि उसे जरूरी नहीं समझेंगे तो फुल का सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा।
हर कार्य में नॉलेजफुल बनना आवश्यक है। यदि कोई भी कार्य पूर्ण नहीं है तो सफलता भी पूर्ण नहीं होगी।
बाबा ने रमेश भाई और उनके साथियों के कार्य को भी यज्ञ की सेवा बताया और उन्हें स्नेह दिया।
मुख्य शिक्षा: हर जिम्मेदारी को यज्ञ सेवा समझकर पूर्णता से निभाना है।
17. अन्तिम संदेश — लगन को अग्नि रूप बनाओ
बापदादा ने सभी बच्चों को याद-प्यार देते हुए विशेष प्रेरणा दी कि लगन को अग्नि रूप में परिवर्तन करो और ऊँची स्टेज लो।
केवल तपस्या में बैठना नहीं, बल्कि तपस्या की शक्ति से स्वयं में और सेवा में परिवर्तन लाना है।
साकार से फ़रिश्ता और फ़रिश्ता से बिन्दु रूप में स्थित होने की एक्सरसाइज़ को निरन्तर अभ्यास में लाना है।
मुख्य शिक्षा: तपस्या को प्रैक्टिकल परिवर्तन और सफलता के रूप में दिखाना है।
मुरली पर आधारित 30 छोटे प्रश्न और उत्तर
भाग 1: भगवान का सलेक्शन और तपस्या
प्रश्न 1. बाबा ने बच्चों को किस प्रकार सलेक्ट किया?
उत्तर: बच्चों ने दिल से “मेरा बाबा” कहा और बाबा ने उन्हें सेकण्ड में सलेक्ट कर लिया।
प्रश्न 2. भगवान के सलेक्शन को क्या कहा गया?
उत्तर: हर कल्प रिपीट होने वाली भावी।
प्रश्न 3. बाबा ने बच्चों की लगन के बारे में क्या कहा?
उत्तर: लगन तो है, लेकिन अभी अग्नि रूप नहीं बनी है।
प्रश्न 4. लगन को किस रूप में परिवर्तन करना है?
उत्तर: ज्वाला या अग्नि रूप में।
प्रश्न 5. तपस्या का अर्थ क्या बताया गया?
उत्तर: परिवर्तन।
भाग 2: तपस्या की प्रैक्टिकल निशानी
प्रश्न 6. तपस्या की प्रैक्टिकल निशानी क्या है?
उत्तर: सफलता।
प्रश्न 7. किन बातों में तपस्या का परिवर्तन दिखाई देना चाहिए?
उत्तर: संकल्प, बोल, सम्पर्क और सम्बन्ध में।
प्रश्न 8. बाबा योग का प्रयोग कहाँ देखना चाहते हैं?
उत्तर: हर कार्य में।
प्रश्न 9. केवल तपस्या में बैठना पर्याप्त क्यों नहीं है?
उत्तर: क्योंकि तपस्या का प्रभाव प्रैक्टिकल जीवन में सफलता के रूप में दिखाई देना चाहिए।
प्रश्न 10. सेवा की ऊँची स्टेज के साथ किस स्टेज का लक्ष्य रखना है?
उत्तर: याद की ऊँची स्टेज का।
भाग 3: परिवर्तन और प्रवेशता की एक्सरसाइज़
प्रश्न 11. बाबा ने मैदान में कौन-से शब्द लिखे हुए दिखाए?
उत्तर: परिवर्तन और प्रवेशता।
प्रश्न 12. ब्रह्मा बाबा के मस्तक से क्या निकला?
उत्तर: दिव्य और मीठी लाइट।
प्रश्न 13. लाइट सबसे पहले कहाँ प्रवेश हुई?
उत्तर: ऊपर सम्पूर्ण फ़रिश्ता रूप में।
प्रश्न 14. फ़रिश्ता रूप से लाइट कहाँ गई?
उत्तर: मूलवतन में।
प्रश्न 15. मूलवतन में लाइट किसके समान चमकी?
उत्तर: सितारे के समान।
भाग 4: फ़रिश्ता और बिन्दु रूप
प्रश्न 16. मूलवतन से लौटकर लाइट पहले किस रूप में आई?
उत्तर: आकारी रूप में।
प्रश्न 17. इसके बाद किस रूप में आई?
उत्तर: साकारी रूप में।
प्रश्न 18. बाबा ने बच्चों को किसका अनुसरण करने के लिए कहा?
उत्तर: फॉलो फादर।
प्रश्न 19. फ़रिश्ता स्थिति में कौन सहज स्थित हो सकता है?
उत्तर: जिसका देह के साथ लगाव का रिश्ता न हो।
प्रश्न 20. फ़रिश्ता बनने के लिए किन लगावों को समाप्त करना है?
उत्तर: देह, मन, बुद्धि, वैभव और वस्तुओं के लगाव।
भाग 5: अशरीरी अभ्यास और परिवर्तन
प्रश्न 21. अशरीरी बनने के लिए सबसे पहले क्या करना है?
उत्तर: देह के लगाव को कट करना है।
प्रश्न 22. केवल “मैं आत्मा हूँ, शान्त स्वरूप हूँ” समझना पर्याप्त है?
उत्तर: नहीं, एक सेकण्ड में अशरीरी होने का अभ्यास करना है।
प्रश्न 23. एक सेकण्ड में किन स्थितियों में आना-जाना सीखना है?
उत्तर: साकार, फ़रिश्ता और बिन्दु रूप में।
प्रश्न 24. लगन को अग्नि रूप बनाने के लिए कौन-सी एक्सरसाइज़ आवश्यक है?
उत्तर: परिवर्तन और प्रवेशता की एक्सरसाइज़।
प्रश्न 25. इस एक्सरसाइज़ को कब से करना है?
उत्तर: अभी से निरन्तर अभ्यास करना है।
भाग 6: विशेष शिक्षाएँ और सेवा
प्रश्न 26. डबल विदेशी बच्चों की विशेष शक्ति क्या बताई गई?
उत्तर: महसूसता की शक्ति।
प्रश्न 27. बाबा ने दादी जानकी के लिए क्या कहा?
उत्तर: हिम्मत बच्ची की, मदद बाबा की।
प्रश्न 28. परदादी के लिए बाबा ने कौन-सी विशेषता बताई?
उत्तर: वे विजयी बनकर सेवा करके आई हैं।
प्रश्न 29. टीचर्स के एकाउण्ड के काम को क्या समझना है?
उत्तर: यज्ञ की सेवा और जरूरी जिम्मेदारी।
प्रश्न 30. बाबा का अन्तिम संदेश क्या था?
उत्तर: लगन को अग्नि रूप में परिवर्तन करो और ऊँची स्टेज लो।
स्व-चिंतन के प्रश्न
- क्या मेरी लगन केवल याद तक सीमित है या अग्नि रूप बन रही है?
- क्या मेरी तपस्या का प्रभाव मेरे संकल्प, बोल और व्यवहार में दिखाई देता है?
- क्या मैं हर कार्य में योग का प्रयोग करके सफलता प्राप्त कर रहा हूँ?
- क्या मैं साकार से फ़रिश्ता और फ़रिश्ता से बिन्दु रूप में स्थित होने का अभ्यास करता हूँ?
- क्या मेरे मन और बुद्धि में व्यर्थ संकल्प चलते रहते हैं?
- क्या मुझे शरीर, सम्बन्ध, वैभव या वस्तुओं में कोई लगाव रोकता है?
- क्या मैं एक सेकण्ड में अशरीरी होने का अभ्यास कर सकता हूँ?
- क्या मैं अपनी भूलों को महसूस करके उनका बोझ कम करता हूँ और परिवर्तन भी करता हूँ?
- क्या मैं सेवा के साथ-साथ अपनी सूक्ष्म चेकिंग भी करता हूँ?
- क्या मैं प्रत्येक जिम्मेदारी को यज्ञ सेवा समझकर पूर्णता से निभाता हूँ?
निष्कर्ष
16 मई 1991 के इस अव्यक्त दिव्य संदेश का मुख्य संदेश है कि लगन को अग्नि रूप में परिवर्तन करो और परिवर्तन तथा प्रवेशता की एक्सरसाइज़ करो।
तपस्या का अर्थ केवल बैठना या समय निकालना नहीं है। तपस्या की प्रैक्टिकल निशानी संकल्प, बोल, सम्पर्क, सम्बन्ध और हर कार्य में सफलता है।
देह, मन, बुद्धि, वैभव और वस्तुओं के सभी लगाव समाप्त करके एक सेकण्ड में साकार से फ़रिश्ता और फ़रिश्ता से बिन्दु रूप में स्थित होने का अभ्यास करना है। स्वयं की और सेवा की सूक्ष्म चेकिंग करते हुए ऊँची स्टेज प्राप्त करनी है।
मुख्य स्मृति-मंत्र
“लगन को अग्नि रूप बनाऊँगा, सभी लगावों से न्यारा रहूँगा और एक सेकण्ड में साकार से फ़रिश्ता, फ़रिश्ता से बिन्दु रूप में स्थित होने का अभ्यास करूँगा।”
नोट: यह अध्याय आपके द्वारा दिए गए मूल अव्यक्त संदेश पर आधारित है। प्रश्नोत्तर उसी पाठ की शिक्षाओं को सरल रूप में प्रस्तुत करते हैं।
📝 38. अव्यक्त दिव्य संदेश | 16.5.1991
20 Questions × 5 Marks = 100 Marks
