70 | साकार मुरली | 09-10-2026

09-10-2026 प्रात:मुरलीओम् शान्ति”बापदादा”‘ मधुबन


“मीठे बच्चे – तुम जानते हो कि सभी आत्मायें बेहद के बाप से पढ़ेंगी नहीं लेकिन साथ में जरूर जायेंगी”


प्रश्नः- चक्रवर्ती राजा बनने वाले बच्चों को किस बात का बहुत-बहुत कदर होगा?
उत्तर:- उन्हें पढ़ाई का बहुत कदर होगा। कहाँ भी रहते पढ़ाई जरूर पढेंगे। साथ-साथ मित्र सम्बन्धियों से तोड़ निभाते याद में रहने का अभ्यास करेंगे और सबको यही पैगाम देंगे कि बाप को याद करो तो शान्तिधाम-सुखधाम में चले जायेंगे। इस श्रीमत पर पूरा-पूरा चलने वाले बच्चे ही चक्रवर्ती बनते हैं।
ओम् शान्ति। बाप को, सभी रूहानी बच्चों को साथ-साथ जो भी सृष्टि भर में जीव आत्मायें हैं, उन सब जीव आत्माओं को वापिस ले जाना ही है क्योंकि अब अन्धियारी रात पूरी होती है। पुरानी दुनिया पूरी हो नई दुनिया की स्थापना हो रही है। दुनिया तो है परन्तु पुरानी से नई होती है। सतयुग आदि में बरोबर आदि सनातन देवी-देवता धर्म ही था। अब वह सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी नहीं हैं। बाप समझाते हैं उन्हों ने पुनर्जन्म लेते-लेते अब 84 जन्म पूरे किये हैं। इस समय सब पार्टधारी तमोप्रधान हो गये हैं। चाहते भी हैं रामराज्य, नई दुनिया, नई देहली चाहिए। जैसे बच्चे कहते हैं ना – हमको फलानी नई चीज़ चाहिए। यह भी कहते हैं बाबा नई दुनिया के लिए हमको नये वस्त्र चाहिए। दीप-माला पर मनुष्य नये वस्त्र पहनते हैं। श्रीकृष्ण जयन्ती पर नये वस्त्र पहनने की बात नहीं रहती। खास दीपमाला पर नये वस्त्र पहनने के लिए खरीददारी आदि बहुत करते हैं। दीपमाला पर ज्योत जगाते हैं। तुम्हारी अब ज्योत जगी है, तुम्हें फिर औरों की भी ज्योत जगानी है। उन्हों की है भक्ति मार्ग की दीपमाला, तुम्हारी है ज्ञान की दीपमाला। तुमको कोई कपड़े आदि नहीं बदलने हैं। तुम्हारी जब पूरी ज्योत जग जायेगी तो फिर नई दुनिया में नये वस्त्र मिलेंगे। बाप कहते हैं मैं सबको ले जाऊंगा। कोई चाहे वा न चाहे। बुलाते भी हैं – हे पतित-पावन आओ। वह फिर कहते हैं लिबरेटर आओ। कोई किस भाषा में कहते हैं, कोई किस भाषा में। मैं कल्प-कल्प आकर सबको ले जाता हूँ। सतयुग में तो बहुत थोड़े मनुष्य होते हैं। अब कितने ढेर पार्टधारी हैं। यह हैं जीव आत्मायें। शरीर को जीव कहा जाता है। ऐसे नहीं कि जीव कहता है कि मैं एक आत्मा छोड़ दूसरा लेता हूँ। नहीं, आत्मा कहती है मैं एक शरीर छोड़ दूसरा लेता हूँ। परन्तु यह भी किसको पता नहीं है कि हम 84 जन्म लेते हैं। ऐसे भी नहीं सबको 84 जन्म मिलते हैं। सबका अपना हिसाब है। जो पहले-पहले आते हैं वह जरूर जास्ती जन्म लेंगे। जास्ती से जास्ती 84 जन्म। कम से कम एक जन्म भी होता है। यह बाप बैठ समझाते हैं, सबको तो नहीं पढ़ायेंगे। परन्तु सबको साथ जरूर ले जायेंगे। ड्रामा प्लैन अनुसार मेरा पार्ट है सबको साथ ले जाने का। दुनिया यह नहीं जानती कि पुरानी दुनिया खत्म होने वाली है। बाप आकर जरूर नई दुनिया की स्थापना करेंगे। मनुष्य को रचता और रचना के आदि-मध्य-अन्त का रिचंक मात्र भी नॉलेज नहीं है। हाँ, भक्ति मार्ग का पता है। भक्ति मार्ग की रसम-रिवाज अलग, ज्ञान मार्ग की रसम-रिवाज बिल्कुल ही अलग है। यह तो हो नहीं सकता कि सतयुग से कलियुग तक भक्ति ही हो। गाया भी जाता है ज्ञान दिन, भक्ति रात। अन्धियारी रात में मनुष्य धक्के खाते हैं। बाप कहते हैं ठिक्कर भित्तर में भी जाकर मुझे ढूँढते हैं। कोई हनुमान का साक्षात्कार करते, कोई गणेश का साक्षात्कार करते। अब वह सब भगवान तो नहीं हैं। मेरा अपना शरीर तो कोई है नहीं। माया रावण ने सबको बुद्धू बना दिया है। भारतवासियों को यह भी पता नहीं कि राम राज्य किसको कहा जाता है। यह ध्यान में भी आता है कि लक्ष्मी-नारायण का राज्य इस दुनिया पर था। सिर्फ कह देते हैं – रामराज्य चाहिए। राम कोई रघुपति वाला नहीं। उनके लिए शास्त्रों में बहुत उल्टी बातें लिख दी हैं। मनुष्य मौत से कितना डरते हैं। लाइफ को बचाने के लिए दुआयें माँगते रहते हैं। अभी तो ढेर मरने वाले हैं। उनके लिए क्या कहेंगे! बाप को बुलाया ही इसलिए है कि बाबा हमको पावन दुनिया में ले चलो। शान्तिधाम में शरीरों को तो नहीं ले जाऊंगा। वहाँ तो आत्मायें जायेंगी। यह तो पुराना छी-छी शरीर है। भंभोर को आग लगनी है, इसलिए आग का गोला (बॉम्ब्स) बना रहे हैं। अब वह कहते हैं – बॉम्ब्स न बनायें। अब इतनी भी समझ नहीं है तो जिनके पास जास्ती बॉम्ब्स होंगे, वह जरूर शक्तिशाली हो जायेंगे। फिर दूसरे अपने को बचा कैसे सकेंगे, अगर बाम्ब्स न बनायें तो। अब वह जब सब समुद्र में डालें तब वह भी बनाना बंद करें। परन्तु समुद्र से भी बादल पानी खींचता है, वह बरसात पड़ेगी तो सारा नुकसान हो जायेगा। खेती आदि जल जायेगी इसलिए ड्रामा में युक्ति रची हुई है। पहले ये बॉम्ब्स नहीं थे, अब निकले हैं इसलिए यह सारी धम-धम मच रही है। अब यह तुम जानते हो – यह सब है भावी। तुम्हारे में भी बहुतों को विनाश की भावी का निश्चय नहीं है। अगर होता तो योग में बहुत अच्छी तरह रहते। योगबल से विश्व की बादशाही लेनी है। तुम्हारा सब कुछ गुप्त है, सिखलाने वाला भी गुप्त है। इन आंखों से देखने में नहीं आते हैं। अब तुमने आत्मा को रियलाइज किया है कि मुझ आत्मा में 84 जन्मों का पार्ट भरा हुआ है। अहम् आत्मा अविनाशी हैं। यह है अति गुह्य बात। अखबार में भी लिखा है कि आत्मा क्या है जो शरीर में रहती है? यह कोई बताये तो उनको लाखों रूपया मिल सकता है। आत्मा क्या है, कहाँ से आती है? कैसे पार्ट बजाती है? यह कोई भी नहीं जानते। कोई कहते बुदबुदा है, कोई कहते ब्रह्म-तत्व बड़ी ज्योति है, उसमें आत्मायें लीन हो जायेंगी। अनेक प्रकार की बातें करते रहते हैं। तुम जानते हो आत्मा बिन्दी समान है। उसमें पार्ट बजाने की नूँध है। यह ड्रामा अनादि बना बनाया है, उनका कभी विनाश नहीं होता है। आत्मा भी अविनाशी है। उनको वही पार्ट बजाना है। फ़र्क नहीं पड़ सकता। यह सब बातें उनकी बुद्धि में बैठेंगी, जिनके कल्प पहले बैठी होंगी।

बाबा कहते हैं – इतने ढेर मनुष्यों को मैं कैसे पढ़ाऊंगा। हाँ, इतना बच्चे समझेंगे कि बाप कहते हैं मामेकम् याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। सबको पैगाम मिलेगा, बाप यह मन्त्र देते हैं सबके लिए। बाबा समझाते हैं तुम बच्चों को दैवीगुण धारण करने हैं। अवगुणों को छोड़ना है। देह-अभिमान को छोड़ो। फिर भी छोड़ते नहीं हैं। उन बिचारों को क्या मिलेगा? एक दो से प्यार से नहीं चलते हैं। तुमको बहुत मीठा बनना है। बाप प्यार का सागर है। तुम भी उनके बच्चे हो तो तुमको बहुत प्यारा बनना है। कभी कोई कितना भी गुस्सा करे, स्तुति-निंदा आदि सब कुछ सहन करना है। कोई देवाला मारता है तो समझते हैं – बाबा अब सहायता करे। अरे यह तो तुम्हारा कर्मभोग है, सो तो तुमको सहन करना है। बाप इसमें क्या करे। बाप आया हुआ है सब आत्माओं को ले जाने। यह भी तुम बच्चे ही जानते हो। दुनिया में सब घोर अन्धियारे में हैं। भक्तिमार्ग में जरूर भक्तों का मान होना चाहिए। शंकराचार्य आदि यह सब भगत हैं। उन्हों को कहेंगे पवित्र भगत। भक्ति कल्ट तो है ना। जो पवित्र रहते हैं, उन्हों के बड़े-बड़े अखाड़े बने हुए हैं। उनका मान कितना है। रिलीजस किताबों का भी बहुत मान है। उनको बड़ी-बड़ी परिक्रमा दिलाते हैं। भक्ति का मान बहुत है। ज्ञान का किसको पता भी नहीं है। तुम जब देवता बनते हो तो तुम्हारी कितनी महिमा होती है। ऐसा कोई नहीं होगा जिनके माँ बाप किसी न किसी मन्दिर आदि में नहीं जाते होंगे। कुछ न कुछ भक्ति के चिन्ह घर में जरूर होते हैं। हे भगवान कहना, यह भी भक्ति मार्ग है। अब तुम बेहद बाप के बने हो। यह बाप, यह दादा, इसलिए त्रिमूर्ति के चित्र पर समझाना बड़ा अच्छा है। भल कोई कहे दादा को क्यों रखा है? अरे प्रजापिता ब्रह्मा तो जरूर यहाँ चाहिए ना। यह तो झाड़ में नीचे तपस्या में बैठे हैं। परन्तु वह बदलते रहते हैं। यह जो मुख्य हैं वह सदैव कायम हैं। इसमें बच्चों को बहुत मीठा बनना है। चलन बड़ी रॉयल होनी चाहिए। बात कम करनी चाहिए। पहले-पहले बाप का परिचय देना है। जास्ती तीक-तीक करना फालतू है। बहुत थोड़ा बोलो। तुमने भी भक्ति मार्ग में बहुत बोला है, रड़ी मारी है। कितने धक्के खाये हैं। अब तुमको सिम्पल समझाते हैं – सिर्फ बाबा को याद करो तो योगबल से विश्व के मालिक बन सकते हो। आगे चल यह पता पड़ेगा, नम्बरवार कौन-कौन क्या बनते हैं। प्रजा का हिसाब थोड़ेही निकालेंगे। वह तो लाखों करोड़ों हो जायेंगे। जो ब्राह्मण बनेंगे वही सूर्यवंशी चन्द्रवंशी बनेंगे। आगे चलकर बहुत याद करने लग पड़ेंगे। जब मौत सामने आयेगा फिर वैराग्य आयेगा। यह वही महाभारत लड़ाई है। सभी आत्मायें हिसाब-किताब चुक्तू कर जायेंगी, इसको कयामत का समय कहा जाता है। इतने सब शरीर खत्म होंगे। नेचुरल कैलेमिटीज होनी है, यह भी ड्रामा में नूँध है। नई बात नही हैं। फैमन ( अकाल) के कारण मनुष्य भूखों मरते हैं।

बाप जानते हैं मेरे बच्चे बहुत दु:खी हैं। सबको दु:खों से छुड़ाकर वापिस ले जाऊंगा। बाप कहते हैं – यह सब आपस में लड़ेंगे। मक्खन फिर भी तुमको मिलना है, सारे विश्व के तुम मालिक बनते हो। मुख में चन्द्रमा का साक्षात्कार करते थे ना! मुख में यह विश्व का गोला आ जाता है। तुम प्रिन्स प्रिन्सेज बनते हो। सारी सृष्टि जैसे तुम्हारी मुट्ठी में है। मुख में भी, मुट्ठी में भी दिखाते हैं। अब स्वर्ग का गोला तुम्हारे मुख में है। तुम जानते हो योगबल से हम विश्व के मालिक बनते हैं। योग से हेल्थ और ज्ञान से वेल्थ मिलती है। तुम चक्रवर्ती राजा बनते हो। परन्तु बच्चों को इतना कदर नहीं है – पढ़ाई का। भल बदली हो जाती है परन्तु बाप कहते हैं कहाँ भी रहो लेकिन पढ़ो जरूर। पवित्र रहो, खान-पान शुद्ध रखो। सबसे तोड़ भी निभाना है। यह दुनिया दु:ख देने वाली है। मुख्य है काम कटारी चलाना, वह भी मुश्किल छोड़ते हैं। कुछ कहो तो ट्रेटर बन जाते हैं। फिर अबलाओं पर कितने विघ्न आते हैं। यह आर्य समाजी तो अभी आये हैं। पिछाड़ी की टाली है। देवताओं को मानने वाले नहीं हैं। महावीर, हनुमान का नाम है, वीरता दिखाई है। जैनियों ने भी महावीर नाम रख दिया है। अभी अर्थ तो तुम समझते हो। तुम बच्चे भी महावीर हो जो रावण पर जीत पाते हो। यह है सारी योगबल की बात। तुम बाप को याद करते हो, उससे तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। फिर शान्ति-सुख में चले जायेंगे। यह पैगाम सबको देना है। यह स्थापना बड़ी वन्डरफुल है, इनको कोई नहीं जानते। तुम्हारे में भी नम्बरवार हैं। कोई भी अन्दर विकार नहीं होने चाहिए। आत्मा को बाप ज्ञान दे रहे हैं। आत्मा विकारी बनती है, सब कुछ आत्मा ही करती है। तो अब बाप की श्रीमत पर पूरा चलना चाहिए। सतगुरू के सम्मुख रहकर निंदा कराई तो ठौर नहीं पा सकेंगे। कोई भी पाप करना यह निंदा हुई। टीचर की मत पर नहीं चलेंगे तो ठौर नहीं पायेंगे, नापास हो जायेंगे। टीचर की शिक्षा लेते रहेंगे तो पास विद् ऑनर होंगे। वह हैं हद की बातें, यह हैं बेहद की बातें। भगवान कौन है, दुनिया में यह किसको मालूम नहीं है। माया भी सतो रजो तमो होती है। अब माया भी तमोप्रधान है। देखो, क्या-क्या करते रहते हैं। कोई में बुद्धि नहीं है कि हम किसको आग लगाते हैं। यह भी ड्रामा में नूँध है। जो कुछ होता है ड्रामा अनुसार होता है। यादवों का प्लैन, कौरवों का प्लैन और पाण्डवों का प्लैन, क्या-क्या करत भये। पाण्डवों को ऊंच ते ऊंच प्लैन बताने वाला है बाप। नई दुनिया में लक्ष्मी-नारायण का राज्य था। अभी पुरानी दुनिया का विनाश होना है। तुम मोस्ट बील्वेड बाप से मोस्ट बील्वेड बच्चे वर्सा ले रहे हो। बाप बिगर कोई कह न सके कि हम तुमको साथ ले जायेंगे। वह कह देते सब परमात्मा ही परमात्मा हैं। फिर यह कहना आयेगा कैसे। यह सब बातें तुम बच्चे ही जानते हो और न जाने कोई। अच्छा।

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

  1. विनाश की भावी को जान पूरा-पूरा श्रीमत पर चलना है। याद के बल से विश्व की बादशाही लेने का पुरुषार्थ करना है, अपनी जगी हुई ज्योत से सबकी ज्योत जगाकर सच्ची दीपावली मनानी है।
  2. स्तुति-निंदा सब कुछ सहन करते हुए बाप समान प्यार का सागर बनना है। चलन बड़ी रॉयल रखनी है। बात बहुत कम करनी है।

वरदान:- समय पर हर गुण वा शक्ति को यूज़ करने वाले अनुभवी मूर्त भव
ब्राह्मण जीवन की विशेषता है अनुभव। अगर एक भी गुण वा शक्ति की अनुभूति नहीं तो कभी न कभी विघ्न के वश हो जायेंगे। अभी अनुभूति का कोर्स शुरू करो। हर गुण वा शक्ति रूपी खजाने को यूज करो। जिस समय जिस गुण की आवश्यकता है उस समय उसका स्वरूप बन जाओ। नॉलेज की रीति से बुद्धि के लाकर में खजाने को रख नहीं दो, यूज़ करो तब विजयी बन सकेंगे और वाह रे मैं का गीत सदा गाते रहेंगे।
स्लोगन:- नाज़ुकपन के संकल्पों को समाप्त कर शक्तिशाली संकल्प रचने वाले ही डबल लाइट रहते हैं।
ये अव्यक्त इशारे – परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो

जो स्वयं के प्रति इच्छा मात्रम् अविद्या है, अखण्ड दानी है, वही परोपकारी है। जैसे बाप ने स्वयं का समय भी सेवा में दिया। स्वयं निर्मान बन बच्चों को मान दिया। पहले बच्चे – नाम बच्चे का काम अपना। काम के नाम की प्राप्ति का भी त्याग किया। नाम में भी परोकारी बने। ऐसे फालो फादर करो।

लेकिन आज की मुरली में मेरे विचार से मंथन के लिए सबसे शक्तिशाली बात है:
⭐ “पढ़ाई का कदर करो — क्योंकि यही पढ़ाई तुम्हें चक्रवर्ती राजा बनाती है!”
मुरली स्पष्ट कहती है कि चक्रवर्ती राजा बनने वाले बच्चों को पढ़ाई का बहुत-बहुत कदर होगा; वे कहीं भी रहें पढ़ाई जरूर पढ़ेंगे, साथ-साथ याद में रहने का अभ्यास करेंगे और दूसरों को भी बाप की याद का पैगाम देंगे। Pasted markdown

  1. आज की मुरली के मुख्य मंथन-बिंदु
    ① पढ़ाई का कदर — आज का मुख्य संदेश
    आज की मुरली में “पढ़ाई” को सामान्य जानकारी या केवल रोज की मुरली सुनने तक सीमित नहीं रखा गया है।
    मुरली का संकेत है:
    पढ़ाई का कदर → पढ़ाई में नियमितता → याद का अभ्यास → श्रीमत पर चलना → ऊँची प्राप्ति।
    इसलिए आत्म-परीक्षण:
    “क्या मुझे मुरली सुनने का शौक है, या वास्तव में पढ़ाई का कदर है?”

② कहीं भी रहो, पढ़ाई मत छोड़ो
मुरली कहती है कि कहाँ भी रहते पढ़ाई जरूर पढ़ेंगे। Pasted markdown
अर्थात् स्थान बदलने से पढ़ाई की प्राथमिकता नहीं बदलनी चाहिए।
आज के समय में इसका व्यावहारिक मंथन हो सकता है:
क्लास में नहीं पहुँच सके → मुरली पढ़ो/सुनो → समझो → धारण करो → जीवन में लगाओ।
③ केवल पढ़ना नहीं — याद में रहना भी
आज की मुरली पढ़ाई के साथ-साथ मित्र-सम्बन्धियों से तोड़ निभाते हुए याद में रहने के अभ्यास की बात करती है।
अर्थात्:
पढ़ाई बुद्धि में आए और याद स्थिति में आए।

④ अपनी जगी हुई ज्योत से दूसरों की ज्योत जगाना
आज की मुरली में बहुत सुंदर दीपावली का उदाहरण है:
भक्ति मार्ग की दीपमाला के विपरीत ज्ञान की दीपमाला।
मुरली कहती है कि तुम्हारी ज्योत जगी है और अब दूसरों की भी ज्योत जगानी है। Pasted markdown
यहाँ से “पढ़ाई” का अगला चरण निकलता है:
मैं पढ़ूँ → मैं समझूँ → मेरी ज्योत जगे → दूसरे की ज्योत जगाऊँ।
यह अंतिम क्रम हमारी मंथनात्मक व्याख्या है।
⑤ केवल ज्ञान नहीं — दैवीगुण भी
आज की मुरली में कहा गया है:

  • दैवीगुण धारण करने हैं।
  • अवगुण छोड़ने हैं।
  • देह-अभिमान छोड़ना है।
  • बहुत मीठा बनना है।
  • क्रोध, स्तुति-निंदा आदि को सहन करना है। Pasted markdown
    इसलिए पढ़ाई की पहचान केवल ज्ञान बोलने से नहीं, गुणों के परिवर्तन से भी है।
    ⑥ कम बोलो, रॉयल चलन रखो
    आज की मुरली में विशेष रूप से कहा गया है कि:
    “चलन बड़ी रॉयल होनी चाहिए। बात कम करनी चाहिए।” Pasted markdown

इसलिए पढ़ाई का कदर केवल कितने घंटे पढ़ा, इससे नहीं बल्कि व्यवहार कितना बदला, इससे भी देखा जा सकता है।
⑦ योगबल से विश्व की बादशाही
मुरली में योगबल और विश्व की बादशाही का संबंध जोड़ा गया है। बच्चों को याद के बल से पुरुषार्थ करके विश्व की बादशाही लेने की बात कही गई है। Pasted markdown
धारणा में भी यही बात दोहराई गई है:
“याद के बल से विश्व की बादशाही लेने का पुरुषार्थ करना है।” Pasted markdown

⭐ 2. आज की एक प्रमुख बात
“पढ़ाई का कदर — क्या मैं वास्तव में इस पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता बना रहा हूँ?”
आज की मुरली में चक्रवर्ती राजा बनने वालों की पहचान के रूप में पढ़ाई का कदर बताया गया है। Pasted markdown
यहीं से आज का सबसे अच्छा आत्म-प्रश्न निकलता है:
“मैं रोज़ मुरली सुनता हूँ — लेकिन क्या मेरी ज़िन्दगी बता रही है कि मुझे इस पढ़ाई का कदर है?”
3. मूल मुरली की बात
09-10-2026 की मूल मुरली में:

  • चक्रवर्ती राजा बनने वालों को पढ़ाई का बहुत कदर होगा।
  • वे कहीं भी रहकर पढ़ाई करेंगे।
  • याद में रहने का अभ्यास करेंगे।
  • बाप की याद का पैगाम दूसरों को देंगे।
  • श्रीमत पर पूरा चलने वाले बच्चे चक्रवर्ती बनते हैं।
  • दैवीगुण धारण करने और अवगुण छोड़ने हैं।
  • मीठा बनना है।
  • स्तुति-निंदा सहन करनी है।
  • चलन रॉयल और बात कम रखनी है।
  • याद के बल से विश्व की बादशाही लेने का पुरुषार्थ करना है। Pasted markdown
    विशेष रूप से
    मुरली कहती है:
    “भल बदली हो जाती है परन्तु बाप कहते हैं कहाँ भी रहो लेकिन पढ़ो जरूर।” Pasted markdown
  1. अब इसी एक बात की अन्य मुरलियों से तुलना
    📖 तुलना 1 — 24 जनवरी 2012
    24-01-2012 की साकार मुरली में भी पढ़ाई के कदर और उसके परिणाम पर बहुत स्पष्ट जोर मिलता है। वहाँ कहा गया कि योग से हेल्थ और ज्ञान से वेल्थ मिलती है तथा इस पढ़ाई से चक्रवर्ती राजा बनते हैं, लेकिन बच्चों को इस पढ़ाई का पर्याप्त कदर नहीं है। साथ ही कहीं भी रहकर पढ़ाई पढ़ने, शुद्ध खान-पान और पवित्र रहने की बात आती है। Brahma Kumaris
    09-10-2026 से तुलना
    09-10-2026:
    पढ़ाई का बहुत-बहुत कदर करो; कहीं भी रहो पढ़ो।
    24-01-2012:
    इसी पढ़ाई से चक्रवर्ती राजा बनने की प्राप्ति बताई गई और पढ़ाई के कदर की कमी की ओर ध्यान दिलाया गया। Brahma Kumaris
    हमारी तुलनात्मक समझ
    यहाँ दोनों मुरलियों में “पढ़ाई” और “भविष्य की प्राप्ति” का संबंध दिखाई देता है।
    लेकिन इसे इस तरह नहीं कहना चाहिए कि दोनों मुरलियाँ बिल्कुल एक ही संदर्भ में बोली गई हैं। आज की मुरली में विशेष जोर कदर + नियमितता + याद + पैगाम पर है।
    📖 तुलना 2 — 11 अक्टूबर 2022
    11-10-2022 की मुरली में स्पष्ट रूप से कहा गया कि जब बुद्धि में यह निश्चय हो कि परमात्मा स्वयं पढ़ाने वाले हैं, तब रोज़ पढ़ाई पढ़कर अपना सौभाग्य ऊँचा बनाना चाहिए। यदि क्लास में नहीं आ सकते तो घर में मुरली पढ़ने की बात भी कही गई है। Brahma Kumaris Murli
    09-10-2026 से तुलना
    09-10-2026:
    “कहाँ भी रहो लेकिन पढ़ो जरूर।”
    11-10-2022:
    क्लास में न आ सको तो भी घर में मुरली पढ़ो। Brahma Kumaris Murli
    हमारी तुलनात्मक समझ
    दोनों को जोड़ने पर एक व्यावहारिक बात समझ आती है:
    स्थान या परिस्थिति पढ़ाई की नियमितता का बहाना नहीं बननी चाहिए।

यह हमारी तुलना है; इसे मूल मुरली का संयुक्त वाक्य नहीं माना जाना चाहिए।
📖 तुलना 3 — 15 जुलाई 2025
15-07-2025 की साकार मुरली में बच्चों को भविष्य के लिए पढ़ाई, श्रीमत पर चलने और बाप की याद में रहने से बुद्धि का ताला खुलने की बात कही गई है। वहाँ पढ़ाई और बाप से योग को ऊँचे पद की प्राप्ति से भी जोड़ा गया है। Brahma Kumaris
09-10-2026 से तुलना
09-10-2026:
पढ़ाई का कदर रखने वाले चक्रवर्ती राजा बनते हैं।
15-07-2025:
श्रीमत, बाप की याद और पढ़ाई से बुद्धि का ताला खुलता है तथा ऊँचे पद की ओर प्रगति होती है। Brahma Kumaris
हमारी तुलनात्मक समझ
यहाँ “पढ़ाई” को केवल ज्ञान जमा करने के बजाय बुद्धि परिवर्तन और जीवन परिवर्तन से जोड़कर देखना अधिक उपयोगी है।
📖 तुलना 4 — 22 अगस्त 2023
22-08-2023 की मुरली में बहुत सीधी चेतावनी मिलती है कि जो बच्चे मुरली मिस करते हैं और जिन्हें पढ़ाई का कदर नहीं, वे बख्तावर नहीं बन सकते। Brahma Kumaris Murli
09-10-2026 से तुलना
09-10-2026:
चक्रवर्ती बनने वालों को पढ़ाई का बहुत कदर होगा।
22-08-2023:
पढ़ाई का कदर न रखने और मुरली मिस करने से बख्तावर बनने में बाधा बताई गई। Brahma Kumaris Murli
हमारी तुलनात्मक समझ
यह तुलना आज के लिए बहुत सीधा आत्म-परीक्षण बनाती है:
“मेरी मुरली के प्रति नियमितता क्या मेरे पढ़ाई के कदर को दिखाती है?”

  1. चारों मुरलियों का संक्षिप्त तुलनात्मक सार
    दिनांक पढ़ाई के विषय में मुख्य जोर
    09-10-2026 पढ़ाई का कदर, कहीं भी रहो पढ़ो, याद में रहो
    24-01-2012 पढ़ाई से चक्रवर्ती राजा बनने की प्राप्ति
    11-10-2022 रोज़ पढ़ो; क्लास न हो सके तो घर में मुरली पढ़ो
    22-08-2023 पढ़ाई का कदर न रखने और मुरली मिस करने से बख्तावर नहीं बन सकते
    15-07-2025 पढ़ाई + याद + श्रीमत से बुद्धि का ताला खुलता है और ऊँची प्राप्ति होती है
  2. क्या इन मुरलियों में विरोधाभास है?
    ❌ नहीं।
    सभी मुरलियों में “पढ़ाई” का महत्व है, लेकिन समझाने का संदर्भ अलग-अलग है।
    09-10-2026
    मुख्य जोर है:
    पढ़ाई का कदर + कहीं भी रहकर पढ़ना + याद + श्रीमत + पैगाम।
    24-01-2012
    मुख्य जोर:
    पढ़ाई से प्राप्ति और चक्रवर्ती राजा बनने का पुरुषार्थ।
    11-10-2022
    मुख्य जोर:
    परिस्थिति चाहे जो हो, रोज़ पढ़ाई जारी रखना।
    22-08-2023
    मुख्य जोर:
    पढ़ाई को हल्के में लेने और मुरली मिस करने से बचना।
    इसलिए इन्हें विरोधी कथन न मानकर एक ही विषय के अलग-अलग पहलुओं की याद दिलाने वाली शिक्षाएँ समझना अधिक उचित है।
    🌟 7. आज की मुरली का मंथन-सूत्र
    “पढ़ाई सुनना अलग है… पढ़ाई का कदर करना अलग है।”
    पढ़ाई का कदर दिखाई देगा:
    नियमितता में → याद में → धारणा में → व्यवहार में → सेवा में।
    और आज की मुरली के अनुसार अगला कदम है:
    “मेरी ज्योत जगी — अब दूसरे की ज्योत कैसे जगाऊँ?” Pasted markdown


“पढ़ाई का कदर करो… यही बनाती है चक्रवर्ती राजा!”
उपशीर्षक
09-10-2026 साकार मुरली | पढ़ाई • याद • श्रीमत • दैवीगुण • योगबल • विश्व की बादशाही
मुख्य प्रश्न
“क्या मैं रोज़ मुरली पढ़ता हूँ, या सचमुच इस पढ़ाई का कदर करता हूँ?”
एक और गहरा प्रश्न
“मेरी पढ़ाई ने मेरी ज्योत कितनी जगाई है—और अब उससे कितनी आत्माओं की ज्योत जग रही है?”
9. प्रमुख बिंदु

  1. चक्रवर्ती राजा बनने वालों को पढ़ाई का कदर होता है।
  2. कहाँ भी रहो, पढ़ाई जरूर पढ़ो।
  3. पढ़ाई के साथ याद में रहने का अभ्यास करो।
  4. श्रीमत पर पूरा चलना है।
  5. दैवीगुण धारण और अवगुणों का त्याग करना है।
  6. बहुत मीठा बनना है।
  7. स्तुति-निंदा सहन करनी है।
  8. चलन रॉयल और बात कम रखनी है।
  9. योगबल से ऊँची प्राप्ति का पुरुषार्थ करना है।
  10. अपनी जगी हुई ज्योत से दूसरों की ज्योत जगानी है।
  11. पढ़ाई को केवल सुनना नहीं—जीवन में धारण करना है।
  12. समय, स्थान और परिस्थिति के कारण पढ़ाई को छोड़ना नहीं है।
    🌿 आज का अंतिम आत्म-परीक्षण
    “अगर कोई मेरे जीवन को देखकर मेरी पढ़ाई का मूल्यांकन करे, तो क्या उसे दिखाई देगा कि मुझे वास्तव में इस पढ़ाई का कदर है?”

और इससे भी गहरा:
“मेरी ज्योत जगी है—लेकिन क्या मेरे कारण किसी और की ज्योत भी जगी?”
⚠️ उपयुक्त डिस्क्लेमर
डिस्क्लेमर:
यह “मुरली मंथन” मुख्य रूप से 09-10-2026 की साकार मुरली पर आधारित है। अन्य दिनांकित मुरलियों का उपयोग केवल “पढ़ाई का कदर, नियमित पढ़ाई और पढ़ाई से प्राप्ति” विषय को तुलनात्मक रूप से समझने के लिए किया गया है। मूल मुरली की बात और हमारी तुलनात्मक व्याख्या को स्पष्ट रूप से अलग रखा गया है। विभिन्न मुरलियों के समय, संदर्भ, श्रोता और समझाने के उद्देश्य अलग हो सकते हैं; इसलिए केवल शब्दों के अंतर के आधार पर किसी विरोधाभास का निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। तालिका और “पढ़ाई → याद → धारणा → सेवा” जैसे क्रम अध्ययनात्मक/मंथनात्मक व्याख्या हैं, मूल मुरली का शब्दशः उद्धरण नहीं। इस प्रस्तुति का उद्देश्य किसी व्यक्ति या समूह का मूल्यांकन करना नहीं, बल्कि मुरली के संदेश के आधार पर स्वयं की पढ़ाई, याद, धारणा, गुण और पुरुषार्थ की जाँच करना है।

📝 70 | साकार मुरली | 09-10-2026

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