21.3.1991
कोमल के बजाए कमाल करने वाले बनो
आज आप सबका याद-प्यार लेते हुए बापदादा के पास पहुंची तो बापदादा दूर से ही मुस्कराने हुए. नयनों की मुलाकात कर रहे थे। निमित्त हम थे लेकिन आप सभी भी हमारे में याद-प्यार के रूप लाई हो? मै मुस्कराने लगी तो बाबा ने कहा कि तुम आज विशेष, जो मेरे इस कल्प वृक्ष के बहुत में समाये हुए थे। तो बाबा ने नयनों से सभी का स्वागत किया और पूछा- बच्ची आज विशेष संदेश निकलते हे तो वे बडे सुन्दर और कोमल होते हैं। लेकिन इस मेरे कल्प वृक्ष के अन्दर जो नये पत्ते ही सुन्दर कोमल और नरम नरम हरे पत्ते है, उन्हों का संदेश लाई हो। देखो, जब वृक्ष में नये-नये पत्ते हैं. वे कोमल नहीं हैं। क्योंकि कोमल एक नरम की रीति से कहा जाता है और दूसरा, छोटी दिल वाले को भी कोमल कहते है। जो जल्दी में नरम और गरम हो जाते हैं. जिन्हें दिल में रोना आ जाता है. उसे कोमल कहते हैं। बाबा ने कहा- मेरे यह नये पत्ते कोमल नहीं हैं लेकिन कमाल करने वाले है। बाबा को भी जो नये बच्चे आते हैं उनके लिए बहुत प्यार है। मैंने कहा बाबा, उस दिन जव आप इनसे मिले थे तो इन्हें टोली नहीं मिली. मिस हो गया। किसी को याद नहीं आया। बाबा ने कहा – कोई बात नहीं. अगर भूल गया तो इसमें भी कोई भला होना होगा। इस भूल में क्या भला है. चलो वह तुम्हें दिखाता हूँ। इतने में बाबा ने कहा – यहाँ खड़े होकर दूर से तुमको साकार वतन की सौन दिखाता हूँ।
हम ऊपर वतन में खड़े थे और साकारी वतन का दृश्य नीचे बहुत अच्छा लग रहा था। नीचे एक ग्लोब दिखाई दे रहा था। उस ग्लोब में माउण्ट आबू एक बिन्दू के रूप में था जिस पर लाइट पड रही थी और माउण्ट आबू में पाण्डव भवन, उसमें ओमशान्ति भवन दिखाई दे रहा था। बाबा ने हमे ओमशान्ति भवन बड़ा करके दिखाया। जैसे यहाँ हम क्लास के रूप में सभी बैठे हैं, ऐसे ही सभी को बैठे हुए देखा। ओमशान्ति भवन के बाहर जो रिंग-रोड है, बाबा ने ऊपर से इशारा किया कि सभी बच्चे इस रिंग-रोड पर आ जाओ। हम ऊपर से देख रही थी, सीन बहुत अच्छी दिखाई दे रही थी। रिंग रोड पर बहुत-से छोटे-छोटे विमान खड़े हुए थे, उनका शेप (आकार) मस्तक जैसा था, ऊपर मरगोल जैसे था। बाबा ने ऊपर से ही सभी को इशारा दिया कि सभी एक-एक विमान में बैठ जाओ, नये बच्चे पहले बैठो। तो नये बच्चे विमान पर बैठे और स्टार्ट किया। उस विमान में साकार शरीर नहीं थे, आत्मा बैठे ड्राइव कर रही थी। संकल्प से स्टार्ट किया। सभी का विमान संकल्प से स्टार्ट तो हो गया लेकिन हरेक की स्पीप अलग-अलग थी। कोई तो बिना रुके, बिना मोड़े सीधा ऊपर आ अव्यक्त संदेशरहे थे और कोई-कोई की स्पीड बीच में थोड़ी कम हुई, फिर तेज की और कोई की स्पीड बहुत ढीली थी। धीरे-धीरे सब अपनी स्पीड अनुसार ऊपर आकर पहुँचे। जो पहले आते गये वे आकर आकारी फरिश्ता होकर बाबा की बाहों में जैसे समा गये। धीरे-धीरे सभी आकर पहुँच गये। बाबा की बाँहे बड़ी होती गई। सभी बहुत खुश थे, खुशी उनके चेहरे से दिखाई दे रही थी। बाबा ने पूछा – सभी बच्बों ने यह दिलखुश मिठाई खाई? तो सभी ने कहा- हाँ बाबा।फिर बाबा ने कहा- अच्छा, देखो, बाबा ने तुम्हें विमान में बुलाकर दिलखुश मिठाई खिला दी। अभी हमेशा यह मिठाई खाना और बाबा की बाहों में समा जाना। जब भी कोई बात आये तो यह सीन इमर्ज करना कि मैं बाबा की बाहों में, दिल में समाई हूँ। पुराने बच्चे सभी नीचे थे। नये ऊपर आ गये थे। बाबा ने कहा- बच्चे, इन्तज़ार कर रहे हैं। बच्चे सोच रहे हैं हमारा टर्न कब आयेगा। फिर बाबा ने चुटकी बजाई तो सभी विमान स्टार्ट करके जल्दी-जल्दी पहुँच गये। बाबा ने कहा- आज विशेष नयों का टर्न है, पुरानों को तो सिर्फ दृष्टि लेनी है। नये बच्चे लवलीन थे, पुरानों को देख ही नहीं रहे थे। पुराने सभी ऑटोमेटिकली अर्ध-चन्द्रमा के रूप में खड़े हो गये। बाबा उनहें बहुत मीठी-मोठी दृष्टि दे रहे थे। फिर यह सीन पूरी हो गई।फिर बाबा ने कहा- बच्ची, डबल फॉरेनर्स जो हैं उनकी एक विशेषता बाबा को अच्छी भी लगती है और कभी-कभी थोड़ा खेल भी करते हैं। इन्हों की विशेषता है कि जिसमें भी जायेंगे, पूरा जायेंगे, अधूरा नहीं। यदि ज्ञान के नशे में चढ़ेंगे तो फुल, दूसरे नशे में भी फुल। यह आधे में रहने वाले नहीं है, या तो इधर, या तो उधर। इसलिए जो भी ज्ञान-मार्ग में चलते हैं वह बहुत फास्ट जाते हैं। लक्ष्य यह होता है कि पाना है तो पूरा पाना है। थोड़े में खुश नहीं होते हैं। यह विशेषता बाबा को अच्छी लगती है। लेकिन जब उस तरफ जाते हैं तो भी फुल चले जाते हैं यह देखकर बाबा को थोड़ा रहम आता है। फास्ट जाने की इच्छा रखते हैं, हिम्मत भी है, उमंग-उत्साह भी है। डबल विदेशी बच्चों की दूसरी विशेषता भी है जो छोटी-सी बात को महसूस जल्दी करते हैं। डॉट केयर (अनदेखा) नहीं करते हैं। महसूसता की शक्ति अच्छी है। 92वर्णन भी करेंगे, छिपायेंगे नहीं, इसमें भी अच्छे हैं। लेकिन जो महसूस करते हैं उसको परिवर्तन करने की शक्ति थोड़ी कम है। वह अभी एकस्ट्रा बढ़नी चाहिए, फिर यह बिल्कुल ही फास्ट और फर्स्ट नम्बर में आ सकते हैं। इसलिए डबल विदेशी बच्चों को कहना कि परिवर्तन-शक्ति को बाबा और भी अण्डरलाइन करके कहते हैं कि इसे बढ़ाओ
POWER
BANGURUR
फिर बाबा ने मधुबन निवासियों को और दादियों को याद दिया। परदादी को भी बहुत याद दिया। दादियों प्रति कहा – मोहब्बत की मेहनत कर रही है, इसलिए इन्हों के फील नहीं होता है। मोहब्बत की शक्ति मिल रही है। मधुबन निवासियों के लिए कहा कि इनको एकस्ट्रा लिफ्ट है।सबके दिल की दुआएँ मिल रही हैं। दुआओं का स्टॉक बहुत जमा होता है। जो भी भोजन खाता है, कारोबार देखता है उनके दिल से मधुबन निवासियों के लिए दुआएँ निकलती हैं। दुआओं का स्टॉक बहुत-बहुत जमा है। (अंकल-आँटी ने बापदादा को कमल का फूल भेजा था) बाबा ने कहा कमल का फूल बाबा के पास पहुँचा। यह बच्चे तो हैं ही कमल लेकिन कमल के साथ अमल करने वाले भी है। यह एग्जाम्पल हैं। जो एग्जाम्पल बनता है वह एग्जाम (परीक्षा) में पास होता है। फिर बाबा ने सभी को बहुत-बहुत याद दी।कोमल के बजाए कमाल करने वाले बनोदिनांक: 21 मार्च 1991प्रस्तावनाइस अव्यक्त दिव्य संदेश में बापदादा ने नये बच्चों को विशेष प्रेरणा दी कि वे केवल कोमल और नरम दिल वाले न बनें, बल्कि कमाल करने वाले बनें।बाबा ने संकल्प की शक्ति से चलने वाले विमानों का सुन्दर दृश्य दिखाया। सभी आत्माएँ अपनी-अपनी गति के अनुसार बाबा के पास पहुँचीं और फ़रिश्ता स्वरूप होकर बाबा की बाहों में समा गईं।डबल विदेशी बच्चों की विशेषताओं में बाबा ने उनकी हिम्मत, उमंग-उत्साह और महसूसता की शक्ति की सराहना की। साथ ही समझाया कि महसूस करने के बाद परिवर्तन करने की शक्ति भी बढ़ानी है।इस संदेश का मुख्य सार है—कमजोरी को पहचानकर परिवर्तन करना, तीव्र पुरुषार्थ करना और बाबा की शिक्षाओं को जीवन में अमल करके उदाहरण बनना।
- नये पत्ते कोमल नहीं, कमाल करने वाले हैं
बापदादा ने कल्पवृक्ष के नये पत्तों का उदाहरण दिया। बाबा ने समझाया कि कोमल शब्द के दो अर्थ हैं—एक नरम और दूसरा छोटी दिल वाला, जो छोटी-छोटी बातों में जल्दी नरम या गरम हो जाता है और जिसके दिल में जल्दी रोना आ जाता है।
लेकिन बाबा के कल्पवृक्ष के नये पत्ते ऐसे कोमल नहीं हैं। वे कमाल करने वाले हैं।
बाबा को नये बच्चों से विशेष प्यार है और उनकी विशेषताओं को देखकर बाबा प्रसन्न होते हैं।
मुख्य शिक्षा: छोटी-छोटी बातों में कमजोर या भावुक होने के बजाय कमाल करने वाला बनना है।
- भूल में भी कल्याण का रहस्य
बाबा को बताया गया कि पिछली मुलाकात में कुछ नये बच्चों को टोली नहीं मिली थी। यह बात भूलवश रह गई थी।
बाबा ने कहा कि यदि भूल हो गई तो उसमें भी कोई भलाई होगी। इसके बाद बाबा ने उस भूल में छिपा हुआ कल्याण एक सुन्दर दृश्य द्वारा दिखाया।
इससे यह प्रेरणा मिलती है कि किसी घटना को केवल कमी के रूप में न देखकर उसमें छिपे कल्याणकारी पक्ष को भी समझना चाहिए।
मुख्य शिक्षा: हर परिस्थिति में कल्याण का भाव और सकारात्मक दृष्टि रखनी है।
- वतन से साकार वतन का दृश्य
बाबा ने ऊपर वतन से नीचे साकार वतन का दृश्य दिखाया। नीचे पृथ्वी का ग्लोब दिखाई दे रहा था। उस ग्लोब में माउंट आबू एक बिन्दु के रूप में था, जिस पर लाइट पड़ रही थी।
माउंट आबू में पाण्डव भवन और उसमें ओमशान्ति भवन दिखाई दिया। बाबा ने ओमशान्ति भवन को बड़ा करके दिखाया, जहाँ सभी बच्चे क्लास के रूप में बैठे हुए थे।
इसके बाद बाबा ने ओमशान्ति भवन के बाहर रिंग रोड की ओर संकेत किया और सभी बच्चों को वहाँ आने के लिए कहा।
मुख्य शिक्षा: बाबा की दृष्टि में सभी बच्चे विशेष हैं और सभी को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
- संकल्प से चलने वाले विमान
रिंग रोड पर बहुत-से छोटे-छोटे विमान खड़े थे। उनका आकार मस्तक जैसा था और ऊपर का भाग गोलाकार था।
बाबा ने सभी बच्चों को एक-एक विमान में बैठने का संकेत दिया। विशेष रूप से नये बच्चों को पहले बैठने के लिए कहा।
इन विमानों में साकार शरीर नहीं थे, बल्कि आत्माएँ बैठी थीं। सभी ने अपने संकल्प से विमान स्टार्ट किए।
सभी के विमान तो स्टार्ट हो गए, लेकिन हर आत्मा की गति अलग-अलग थी।
मुख्य शिक्षा: संकल्प की शक्ति से आगे बढ़ना है और अपनी गति को तीव्र बनाना है।
- पुरुषार्थ की अलग-अलग गति
बाबा ने देखा कि कुछ आत्माएँ बिना रुके और बिना मुड़े सीधे ऊपर पहुँच रही थीं। कुछ की गति बीच में कम हुई, फिर उन्होंने उसे तेज कर दिया। कुछ की गति बहुत धीमी थी।
इस प्रकार सभी आत्माएँ अपनी-अपनी गति के अनुसार ऊपर पहुँचीं।
जो आत्माएँ पहले पहुँचीं, वे आकारी फ़रिश्ता बनकर बाबा की बाहों में समा गईं। धीरे-धीरे सभी बच्चे पहुँचते गए और बाबा की बाहें जैसे और बड़ी होती गईं।
मुख्य शिक्षा: पुरुषार्थ में रुकावट आने पर गति कम न होने दें, बल्कि पुनः तीव्र गति से आगे बढ़ें।
- बाबा की बाहों में समाने की अनुभूति
जब सभी बच्चे बाबा के पास पहुँचे, तो वे बहुत खुश थे। उनकी खुशी उनके चेहरों से स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
बाबा ने पूछा कि सभी बच्चों ने दिलखुश मिठाई खाई है? सभी ने उत्तर दिया—हाँ बाबा।
बाबा ने कहा कि हमेशा यह मिठाई खाते रहना और बाबा की बाहों में समाए रहना।
जब भी कोई परिस्थिति या बात सामने आए, तो यह दृश्य इमर्ज करना है कि मैं बाबा की बाहों में और दिल में समाया हुआ हूँ।
मुख्य शिक्षा: हर परिस्थिति में बाबा के स्नेह और समीपता का अनुभव करना है।
- नये और पुराने बच्चों का मिलन
बाबा ने बताया कि उस समय नये बच्चे पहले ऊपर पहुँच गए थे और पुराने बच्चे नीचे थे। पुराने बच्चे अपने टर्न की प्रतीक्षा कर रहे थे।
बाबा ने चुटकी बजाई तो पुराने बच्चों के विमान भी स्टार्ट हो गए और वे शीघ्र ऊपर पहुँच गए।
नये बच्चे बाबा के प्यार में लवलीन थे। पुराने बच्चे अर्धचन्द्राकार रूप में खड़े थे और बाबा उन्हें बहुत मीठी दृष्टि दे रहे थे।
मुख्य शिक्षा: अपने टर्न की प्रतीक्षा करते हुए भी पुरुषार्थ में तत्पर रहना है।
- डबल विदेशियों की विशेषता — पूरा करना
बापदादा ने डबल विदेशी बच्चों की एक विशेषता बताई कि वे जिस बात में भी जाते हैं, उसमें पूरा जाते हैं, अधूरा नहीं रहते।
यदि ज्ञान के नशे में आते हैं तो पूरे नशे में आते हैं, लेकिन यदि किसी दूसरे नशे में जाते हैं तो उसमें भी पूरी तरह चले जाते हैं।
वे थोड़े में खुश रहने वाले नहीं हैं। उनका लक्ष्य होता है कि पाना है तो पूरा पाना है।
बाबा को उनकी यह विशेषता अच्छी लगती है, क्योंकि उनमें आगे बढ़ने की तीव्र इच्छा होती है।
मुख्य शिक्षा: पूरी हिम्मत और उमंग से श्रेष्ठ लक्ष्य की ओर बढ़ना है, लेकिन दिशा सदैव सही रखनी है।
- महसूसता की शक्ति
डबल विदेशियों की दूसरी विशेषता बाबा ने महसूसता की शक्ति बताई।
वे छोटी-सी बात को भी जल्दी महसूस कर लेते हैं और उसे अनदेखा नहीं करते। अपनी अनुभूति को छिपाते भी नहीं, बल्कि उसका वर्णन करते हैं।
यह महसूसता की शक्ति उनकी विशेषता है।
लेकिन बाबा ने समझाया कि केवल कमी को महसूस करना पर्याप्त नहीं है। उसे बदलने की शक्ति भी आवश्यक है।
मुख्य शिक्षा: अपनी कमजोरी को महसूस करने के साथ उसे परिवर्तन करने की शक्ति भी बढ़ानी है।
- परिवर्तन-शक्ति बढ़ाओ
बाबा ने विशेष रूप से डबल विदेशी बच्चों को परिवर्तन-शक्ति बढ़ाने का संदेश दिया।
वे अपनी कमी को जल्दी पहचान लेते हैं, लेकिन उसे बदलने में अभी और पुरुषार्थ की आवश्यकता है।
यदि महसूसता के साथ परिवर्तन-शक्ति भी बढ़ जाए, तो वे बहुत तेज गति से आगे बढ़ सकते हैं और फर्स्ट नम्बर में आ सकते हैं।
इसलिए बाबा ने परिवर्तन-शक्ति को विशेष रूप से अण्डरलाइन करके बढ़ाने की प्रेरणा दी।
मुख्य शिक्षा: कमी को पहचानकर उसे तुरंत बदलने का अभ्यास करना है।
- दादियों की मोहब्बत और मेहनत
बापदादा ने मधुबन निवासियों और दादियों को विशेष याद दी। परदादी को भी बहुत याद-प्यार दिया।
दादियों के बारे में बाबा ने कहा कि वे मोहब्बत की मेहनत कर रही हैं, इसलिए उन्हें अपनी मेहनत का विशेष अनुभव नहीं होता। उन्हें मोहब्बत की शक्ति मिल रही है।
इससे प्रेम और स्नेह की शक्ति का महत्त्व स्पष्ट होता है।
मुख्य शिक्षा: मोहब्बत की शक्ति से सेवा और पुरुषार्थ सहज बन जाता है।
- मधुबन निवासियों को दुआओं की लिफ्ट
बाबा ने मधुबन निवासियों के लिए कहा कि उन्हें एकस्ट्रा लिफ्ट प्राप्त है।
मधुबन में जो भी भोजन करता है या कारोबार देखता है, उसके दिल से मधुबन निवासियों के लिए दुआएँ निकलती हैं।
इस प्रकार मधुबन निवासियों के लिए दुआओं का बहुत बड़ा स्टॉक जमा होता है।
मुख्य शिक्षा: दूसरों की दुआओं का महत्त्व समझकर स्वयं भी सबको सुख और सहयोग देना है।
- कमल के साथ अमल करने वाले बनो
अंकल और आंटी ने बापदादा के लिए कमल का फूल भेजा था। बाबा ने कहा कि कमल का फूल बाबा के पास पहुँच गया।
बाबा ने समझाया कि ये बच्चे तो कमल हैं ही, लेकिन कमल के साथ अमल करने वाले भी हैं।
अर्थात् केवल कमल समान बनना पर्याप्त नहीं, बल्कि अपने जीवन में श्रेष्ठ शिक्षाओं को अमल में लाना भी आवश्यक है।
बाबा ने कहा कि जो एग्जाम्पल बनता है, वही एग्जाम में पास होता है।
मुख्य शिक्षा: केवल श्रेष्ठता की बात नहीं करनी, बल्कि श्रेष्ठ जीवन का उदाहरण बनना है।
मुरली पर आधारित 30 छोटे प्रश्न और उत्तर
भाग 1: कोमलता और कमाल
प्रश्न 1. बाबा ने नये बच्चों की तुलना किससे की?
उत्तर: कल्पवृक्ष के नये पत्तों से।
प्रश्न 2. कोमल शब्द के दो अर्थ क्या बताए गए?
उत्तर: नरम और छोटी दिल वाला।
प्रश्न 3. छोटी दिल वाला व्यक्ति कैसा होता है?
उत्तर: जो छोटी-छोटी बातों में जल्दी नरम या गरम हो जाता है।
प्रश्न 4. बाबा के अनुसार नये पत्ते कैसे हैं?
उत्तर: कोमल नहीं, बल्कि कमाल करने वाले।
प्रश्न 5. इस संदेश का मुख्य सूत्र क्या है?
उत्तर: कोमल के बजाए कमाल करने वाले बनो।
भाग 2: वतन का दृश्य और विमान
प्रश्न 6. बाबा ने ऊपर वतन से किसका दृश्य दिखाया?
उत्तर: साकार वतन का।
प्रश्न 7. ग्लोब में माउंट आबू किस रूप में दिखाई दिया?
उत्तर: एक बिन्दु के रूप में, जिस पर लाइट पड़ रही थी।
प्रश्न 8. माउंट आबू में कौन-सा भवन दिखाया गया?
उत्तर: पाण्डव भवन और ओमशान्ति भवन।
प्रश्न 9. रिंग रोड पर क्या खड़े हुए थे?
उत्तर: छोटे-छोटे विमान।
प्रश्न 10. विमानों को किस शक्ति से स्टार्ट किया गया?
उत्तर: संकल्प की शक्ति से।
भाग 3: पुरुषार्थ की गति
प्रश्न 11. सभी आत्माओं के विमानों की गति कैसी थी?
उत्तर: अलग-अलग थी।
प्रश्न 12. कुछ आत्माएँ कैसे ऊपर पहुँचीं?
उत्तर: बिना रुके और बिना मुड़े सीधे ऊपर।
प्रश्न 13. जो आत्माएँ पहले पहुँचीं, वे किस स्वरूप में थीं?
उत्तर: आकारी फ़रिश्ता स्वरूप में।
प्रश्न 14. बाबा ने बच्चों को कौन-सी मिठाई खिलाई?
उत्तर: दिलखुश मिठाई।
प्रश्न 15. परिस्थिति आने पर कौन-सा दृश्य इमर्ज करना है?
उत्तर: मैं बाबा की बाहों में और दिल में समाया हुआ हूँ।
भाग 4: नये और पुराने बच्चे
प्रश्न 16. उस दृश्य में पहले किसका टर्न था?
उत्तर: नये बच्चों का।
प्रश्न 17. पुराने बच्चे किस रूप में खड़े थे?
उत्तर: अर्धचन्द्राकार रूप में।
प्रश्न 18. बाबा पुराने बच्चों को क्या दे रहे थे?
उत्तर: बहुत मीठी दृष्टि।
प्रश्न 19. बाबा ने पुराने बच्चों के विमान कैसे स्टार्ट करवाए?
उत्तर: चुटकी बजाकर।
प्रश्न 20. नये बच्चे बाबा के किस भाव में लवलीन थे?
उत्तर: बाबा के प्यार में।
भाग 5: डबल विदेशियों की विशेषताएँ
प्रश्न 21. डबल विदेशी बच्चों की पहली विशेषता क्या बताई गई?
उत्तर: वे जिस बात में जाते हैं, उसमें पूरा जाते हैं।
प्रश्न 22. उनका लक्ष्य कैसा होता है?
उत्तर: पाना है तो पूरा पाना है।
प्रश्न 23. डबल विदेशी बच्चों की दूसरी विशेषता क्या है?
उत्तर: महसूसता की शक्ति।
प्रश्न 24. महसूसता की शक्ति की पहचान क्या है?
उत्तर: छोटी-सी बात को भी जल्दी महसूस करना और उसे अनदेखा न करना।
प्रश्न 25. महसूस करने के साथ कौन-सी शक्ति बढ़ानी है?
उत्तर: परिवर्तन-शक्ति।
भाग 6: दुआएँ और अमल
प्रश्न 26. बाबा ने दादियों की मेहनत को किस शक्ति से जुड़ा बताया?
उत्तर: मोहब्बत की शक्ति से।
प्रश्न 27. मधुबन निवासियों को कौन-सी एकस्ट्रा लिफ्ट प्राप्त है?
उत्तर: सबके दिल से निकलने वाली दुआओं की।
प्रश्न 28. बाबा के पास कौन-सा फूल भेजा गया था?
उत्तर: कमल का फूल।
प्रश्न 29. बाबा ने कमल के साथ क्या बनने की प्रेरणा दी?
उत्तर: अमल करने वाले बनने की।
प्रश्न 30. बाबा के अनुसार एग्जाम में कौन पास होता है?
उत्तर: जो एग्जाम्पल बनता है।
स्व-चिंतन के प्रश्न
क्या मैं छोटी-छोटी बातों में जल्दी भावुक या कमजोर हो जाता हूँ?
क्या मैं कोमलता के बजाय कमाल करने वाला बन रहा हूँ?
क्या मेरे संकल्प की गति तीव्र है या बीच-बीच में धीमी पड़ जाती है?
क्या मैं हर परिस्थिति में बाबा की बाहों में समाए रहने का अनुभव करता हूँ?
क्या मैं अपने लक्ष्य में पूरा जाता हूँ या बीच में अधूरा छोड़ देता हूँ?
क्या मैं अपनी कमजोरियों को ईमानदारी से महसूस करता हूँ?
क्या महसूस करने के बाद उन्हें बदलने का पुरुषार्थ भी करता हूँ?
क्या मेरे जीवन में परिवर्तन-शक्ति बढ़ रही है?
क्या मैं दूसरों की दुआओं का पात्र बनने योग्य कर्म करता हूँ?
क्या मैं केवल कमल समान हूँ या बाबा की शिक्षाओं को अमल में लाकर एग्जाम्पल भी बनता हूँ?
निष्कर्ष
21 मार्च 1991 के इस अव्यक्त दिव्य संदेश का मुख्य संदेश है कि कोमल के बजाए कमाल करने वाले बनो।
बाबा ने नये बच्चों की विशेषता, संकल्प की गति और बाबा की बाहों में समाने की अनुभूति द्वारा तीव्र पुरुषार्थ का लक्ष्य दिया। डबल विदेशी बच्चों की महसूसता की शक्ति की सराहना करते हुए परिवर्तन-शक्ति बढ़ाने की प्रेरणा दी।
दूसरों की दुआओं का खजाना जमा करना है, मोहब्बत की शक्ति से सेवा करनी है और कमल समान बनने के साथ बाबा की शिक्षाओं को अमल में लाकर एग्जाम्पल बनना है।
मुख्य स्मृति-मंत्र
“कमजोरी को महसूस करो, परिवर्तन-शक्ति से बदलो और कमाल करके एग्जाम्पल बनो।”
📝 37. अव्यक्त दिव्य संदेश | 20.2.1991
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