9 December 1970 | हिंदी · “पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”
“पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”
आज हरेक की दो बातें देख रहे हैं कि हरेक कितना नालेजफुल और कितना पावरफुल बने हैं। उसमें भी मुख्य कैचिंग पॉवर हरेक की कितनी पावरफुल हैं – यह देख रहे हैं। पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर पर है। जैसे आजकल साईस वाले आवाज को कैच करने का भी प्रयत्न करते हैं। लेकिन साइलेन्स की शक्ति से आप लोग क्या कैच करते हो? जैसे वह बहुत पहले के साउन्ड को कैच करते हैं, वैसे आप क्या कैच करते हो? अपने 5000 वर्ष पहले के दैवी संस्कार कैच कर सकते हो? कैचिंग पावर इतनी आई है। वह तो दूसरों की साउन्ड को कैच कर सकते हैं। आप अपने असली संस्कारों को सिर्फ कैच नहीं करते, लेकिन अपना प्रैक्टिकल स्वरूप बनाते हो। सदैव यह स्मृति में रखो कि मैं यही था और फिर बन रहा हूँ। जितना-जितना उन संस्कारों को कैच कर सकेंगे उतना स्वरूप बन सकेंगे। अपनी स्मृति को पावरफुल बनाओ अर्थात् श्रेष्ठ और स्पष्ट बनाओ। जैसे अपने वर्तमान स्वरूप का, वर्तमान संस्कारों का स्पष्ट अनुभव होता है ऐसे अपने आदि स्वरूपों और संस्कारों का भी इतना ही स्पष्ट अनुभव हो। समझा। इतनी कैचिंग पावर चाहिए। जैसे वर्तमान समय में अपनी चलन व कर्तव्य स्पष्ट और सहज स्मृति में रहती है। ऐसे ही अपनी असली चलन सहज और स्पष्ट स्मृति में रहे। सदैव यही दृढ़ संकल्प रहे कि यह मैं ही तो था। 5000 वर्ष की बात इतनी स्पष्ट अनुभव में आये जैसे कल की बात। इसको कहते हैं कैचिंग पावर। अपनी स्मृति को इतना श्रेष्ठ और स्पष्ट बनाकर जाना। भट्ठी में आये हो ना। सदैव अपना आदि स्वरूप और आदि संस्कार सामने दिखाई दे। अपनी स्मृति को पावरफुल बनाने से वृत्ति और दृष्टि स्वत: ही पावरफुल बन जायेंगी। फिर यह कुमार ग्रुप क्या बन जायेंगे? अनुकुमार अर्थात् अनोखे। हरेक के दो नयनों से दो स्वरूप का साक्षात्कार होगा। कौन से दो स्वरूप? सुनाया था ना कि निराकारी और दिव्य गुणधारी। फरिश्ता रूप और दैवी रूप। हरेक ऐसे अनुभव करेंगे वा हरेक से ऐसा अनुभव होगा जैसे कि चलता फिरता लाइट हाउस और माइट हाउस हो। ऐसे अपने स्वरूप का साक्षात्कार होता है? जब 5000 वर्ष की बात को कैच कर सकते हो, अनुभव कर सकते हो तो इस अन्तिम स्वरूप का अनुभव नहीं होता है? अभी जो कुछ कमी रह गई है वह भरकर ऐसे अनुभवी मूर्त बनकर जायेंगे। तो देखना कभी कोई कमी न रह जाये। भट्ठी से ऐसा परिवर्तन करके जाना, जैसे कभी-कभी सतयुगी आत्मायें जब प्रवेश होती हैं तो उन्हों को इस पुरुषार्थी जीवन का बिल्कुल ही नालेज नहीं होता। ऐसे आप लोगों को कमजोरियों और कमियों की नालेज ही मर्ज हो जाये। इसके लिए विशेष इस ग्रुप को दो बातें याद रखनी है। दो बातें दो शब्दों में ही हैं। एक गेस्ट हाउस, दूसरा गेट आउट अर्थात् बाहर निकालना है और आगे के लिए अन्दर आने नहीं देना है। दूसरा इस पुरानी दुनिया को सदैव गेस्ट हाउस समझो। फिर कभी कमजोरी वा कमी का अनुभव नहीं करेंगे। सहज पुरुषार्थ है ना। इस ग्रुप को कमाल कर दिखानी है इसलिए सदैव लक्ष्य रखना है कि अब फिर 21 जन्म के लिए रेस्ट करना है। लेकिन अभी एक सेकण्ड में भी मन्सा, वाचा, कर्मणा सर्विस से रेस्ट नहीं। तब ही बेस्ट बनेंगे। समझा। क्योंकि यह है हार्ड वर्कर ग्रुप। हार्ड वर्कर ग्रुप में रेस्ट नहीं। कभी रेस्ट नहीं करता और वेस्ट नहीं करता। इसलिए इस हार्ड वर्कर्स ग्रुप वा रूहानी सेवाधारी संगठन को सेवा के सिवाए और कुछ सूझे ही नहीं। यह है नाम का काम। यह भी याद रखना – सेवा प्रति स्वयं को ही ऑफर करना है तब बाप दादा से ऑफरीन मिलेगी। हार्ड वर्कर्स वा रूहानी सेवाधारी ग्रुप को सदैव यह स्लोगन याद रखना है। समाना और सामना करना हमारा निशाना है। यह है इस ग्रुप का स्लोगन। सामना माया से करना है न कि दैवी परिवार से। समाना क्या है? अपने पुराने संस्कारों को समाना है। नालेजफुल के साथ-साथ पावरफुल भी बनना है तब ही सर्विसएबुल बनेंगे। अच्छा।
तिलक समारोह देख राज-तिलक समारोह याद आता है? अभी यह तिलक सम्पूर्ण स्थिति में रहने के लिए है। फिर मिलेगा राज-तिलक। यह तिलक है प्रतिज्ञा और प्रत्यक्षता का तिलक। इतनी पावर है? रूहानी सेवाधारी ग्रुप के लिए यह खास शिक्षा दे रहे हैं। अपने को जितना अधिकारी समझते हो उतना ही सत्कारी बनो। पहले सत्कार देना फिर अधिकार लेना। सत्कार और अधिकार दोनों साथ-साथ हो। अगर सत्कार को छोड़ सिर्फ अधिकार लेंगे तो क्या हो जायेगा? जो कुछ किया वह बेकार हो जायेगा। इसलिए दोनों बातों को साथ-साथ रखना है। अच्छा।
“पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”
आज हरेक की दो बातें देख रहे हैं कि हरेक कितना नालेजफुल और कितना पावरफुल बने हैं। उसमें भी मुख्य कैचिंग पॉवर हरेक की कितनी पावरफुल हैं – यह देख रहे हैं। पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर पर है। जैसे आजकल साईस वाले आवाज को कैच करने का भी प्रयत्न करते हैं। लेकिन साइलेन्स की शक्ति से आप लोग क्या कैच करते हो? जैसे वह बहुत पहले के साउन्ड को कैच करते हैं, वैसे आप क्या कैच करते हो? अपने 5000 वर्ष पहले के दैवी संस्कार कैच कर सकते हो? कैचिंग पावर इतनी आई है। वह तो दूसरों की साउन्ड को कैच कर सकते हैं। आप अपने असली संस्कारों को सिर्फ कैच नहीं करते, लेकिन अपना प्रैक्टिकल स्वरूप बनाते हो। सदैव यह स्मृति में रखो कि मैं यही था और फिर बन रहा हूँ। जितना-जितना उन संस्कारों को कैच कर सकेंगे उतना स्वरूप बन सकेंगे। अपनी स्मृति को पावरफुल बनाओ अर्थात् श्रेष्ठ और स्पष्ट बनाओ। जैसे अपने वर्तमान स्वरूप का, वर्तमान संस्कारों का स्पष्ट अनुभव होता है ऐसे अपने आदि स्वरूपों और संस्कारों का भी इतना ही स्पष्ट अनुभव हो। समझा। इतनी कैचिंग पावर चाहिए। जैसे वर्तमान समय में अपनी चलन व कर्तव्य स्पष्ट और सहज स्मृति में रहती है। ऐसे ही अपनी असली चलन सहज और स्पष्ट स्मृति में रहे। सदैव यही दृढ़ संकल्प रहे कि यह मैं ही तो था। 5000 वर्ष की बात इतनी स्पष्ट अनुभव में आये जैसे कल की बात। इसको कहते हैं कैचिंग पावर। अपनी स्मृति को इतना श्रेष्ठ और स्पष्ट बनाकर जाना। भट्ठी में आये हो ना। सदैव अपना आदि स्वरूप और आदि संस्कार सामने दिखाई दे। अपनी स्मृति को पावरफुल बनाने से वृत्ति और दृष्टि स्वत: ही पावरफुल बन जायेंगी। फिर यह कुमार ग्रुप क्या बन जायेंगे? अनुकुमार अर्थात् अनोखे। हरेक के दो नयनों से दो स्वरूप का साक्षात्कार होगा। कौन से दो स्वरूप? सुनाया था ना कि निराकारी और दिव्य गुणधारी। फरिश्ता रूप और दैवी रूप। हरेक ऐसे अनुभव करेंगे वा हरेक से ऐसा अनुभव होगा जैसे कि चलता फिरता लाइट हाउस और माइट हाउस हो। ऐसे अपने स्वरूप का साक्षात्कार होता है? जब 5000 वर्ष की बात को कैच कर सकते हो, अनुभव कर सकते हो तो इस अन्तिम स्वरूप का अनुभव नहीं होता है? अभी जो कुछ कमी रह गई है वह भरकर ऐसे अनुभवी मूर्त बनकर जायेंगे। तो देखना कभी कोई कमी न रह जाये। भट्ठी से ऐसा परिवर्तन करके जाना, जैसे कभी-कभी सतयुगी आत्मायें जब प्रवेश होती हैं तो उन्हों को इस पुरुषार्थी जीवन का बिल्कुल ही नालेज नहीं होता। ऐसे आप लोगों को कमजोरियों और कमियों की नालेज ही मर्ज हो जाये। इसके लिए विशेष इस ग्रुप को दो बातें याद रखनी है। दो बातें दो शब्दों में ही हैं। एक गेस्ट हाउस, दूसरा गेट आउट अर्थात् बाहर निकालना है और आगे के लिए अन्दर आने नहीं देना है। दूसरा इस पुरानी दुनिया को सदैव गेस्ट हाउस समझो। फिर कभी कमजोरी वा कमी का अनुभव नहीं करेंगे। सहज पुरुषार्थ है ना। इस ग्रुप को कमाल कर दिखानी है इसलिए सदैव लक्ष्य रखना है कि अब फिर 21 जन्म के लिए रेस्ट करना है। लेकिन अभी एक सेकण्ड में भी मन्सा, वाचा, कर्मणा सर्विस से रेस्ट नहीं। तब ही बेस्ट बनेंगे। समझा। क्योंकि यह है हार्ड वर्कर ग्रुप। हार्ड वर्कर ग्रुप में रेस्ट नहीं। कभी रेस्ट नहीं करता और वेस्ट नहीं करता। इसलिए इस हार्ड वर्कर्स ग्रुप वा रूहानी सेवाधारी संगठन को सेवा के सिवाए और कुछ सूझे ही नहीं। यह है नाम का काम। यह भी याद रखना – सेवा प्रति स्वयं को ही ऑफर करना है तब बाप दादा से ऑफरीन मिलेगी। हार्ड वर्कर्स वा रूहानी सेवाधारी ग्रुप को सदैव यह स्लोगन याद रखना है। समाना और सामना करना हमारा निशाना है। यह है इस ग्रुप का स्लोगन। सामना माया से करना है न कि दैवी परिवार से। समाना क्या है? अपने पुराने संस्कारों को समाना है। नालेजफुल के साथ-साथ पावरफुल भी बनना है तब ही सर्विसएबुल बनेंगे। अच्छा।
तिलक समारोह देख राज-तिलक समारोह याद आता है? अभी यह तिलक सम्पूर्ण स्थिति में रहने के लिए है। फिर मिलेगा राज-तिलक। यह तिलक है प्रतिज्ञा और प्रत्यक्षता का तिलक। इतनी पावर है? रूहानी सेवाधारी ग्रुप के लिए यह खास शिक्षा दे रहे हैं। अपने को जितना अधिकारी समझते हो उतना ही सत्कारी बनो। पहले सत्कार देना फिर अधिकार लेना। सत्कार और अधिकार दोनों साथ-साथ हो। अगर सत्कार को छोड़ सिर्फ अधिकार लेंगे तो क्या हो जायेगा? जो कुछ किया वह बेकार हो जायेगा। इसलिए दोनों बातों को साथ-साथ रखना है।
अव्यक्त मुरली अध्याय
9 दिसम्बर 1970
पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर
इस अव्यक्त मुरली में बापदादा पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर अर्थात् ग्रहण करने की शक्ति बताते हैं। आत्मा जितनी अपनी आदि स्थिति और दैवी संस्कारों को स्पष्ट रूप से अनुभव करेगी, उतना ही उन संस्कारों का व्यावहारिक स्वरूप बनेगी।
केवल नॉलेजफुल बनना पर्याप्त नहीं है; नॉलेजफुल के साथ पावरफुल बनना भी आवश्यक है। अपनी स्मृति को श्रेष्ठ और स्पष्ट बनाकर, पुरानी कमजोरियों को समाप्त करके तथा निरन्तर रूहानी सेवा में तत्पर रहकर ही श्रेष्ठ परिवर्तन सम्भव है।
1. पुरुषार्थ का मुख्य आधार — कैचिंग पॉवर
बापदादा प्रत्येक आत्मा की दो बातें देख रहे हैं—वह कितनी नॉलेजफुल बनी है और कितनी पावरफुल बनी है। इनमें विशेष रूप से कैचिंग पॉवर को देखा जा रहा है।
जैसे साइंस वाले पुराने समय की आवाज को कैच करने का प्रयास करते हैं, वैसे ही आत्मा को अपनी साइलेन्स की शक्तिसे अपने 5000वर्ष पहले के दैवी संस्कारों को कैच करना है।
लेकिन आत्मा का कार्य केवल संस्कारों को कैच करना नहीं है। उन संस्कारों को अपने जीवन में धारण करके उनका प्रैक्टिकल स्वरूप बनना है।
मुख्य शिक्षा: जितनी कैचिंग पॉवर होगी, उतना ही श्रेष्ठ स्वरूप बन सकेंगे।
2. अपने आदि स्वरूप और संस्कारों की स्पष्ट स्मृति
बापदादा समझाते हैं कि अपनी स्मृति को पावरफुल बनाओ अर्थात् श्रेष्ठ और स्पष्ट बनाओ।
जैसे वर्तमान जीवन की चलन और कर्तव्य सहज रूप से स्मृति में रहते हैं, वैसे ही अपने आदि स्वरूप और आदि संस्कारों का भी स्पष्ट अनुभव होना चाहिए।
दृढ़ संकल्प रहे—“यह मैं ही तो था और फिर बन रहा हूँ।”
5000 वर्ष पहले के दैवी संस्कारों की बात इतनी स्पष्ट अनुभव में आए, जैसे कल की बात हो। यही कैचिंग पॉवर की विशेषता है।
मुख्य शिक्षा: अपनी आदि स्मृति को श्रेष्ठ, स्पष्ट और शक्तिशाली बनाना है।
3. स्मृति से वृत्ति और दृष्टि में परिवर्तन
जब आत्मा की स्मृति पावरफुल बनती है, तब उसकी वृत्ति और दृष्टि भी स्वतः पावरफुल बनने
लगती हैं।
स्मृति केवल मन में किसी बात को याद करना नहीं, बल्कि अपने स्वरूप और संस्कारों को अनुभव करना है। जब आत्मा अपने श्रेष्ठ स्वरूप में स्थित होती है, तब उसका प्रभाव उसकी वृत्ति, दृष्टि और व्यवहार में दिखाई देता है।
मुख्य शिक्षा: स्मृति को शक्तिशाली बनाओ, वृत्ति और दृष्टि स्वतः श्रेष्ठ बनेंगी।
4. निराकारी और दिव्य गुणधारी स्वरूप
बापदादा पूछते हैं कि कुमार ग्रुप क्या बन जाएगा? अनुकुमार अर्थात् अनोखे कुमार।
हर एक के दो नयनों से दो स्वरूपों का साक्षात्कार हो—निराकारी स्वरूप और दिव्य गुणधारी स्वरूप। इन्हें फरिश्ता रूप और दैवी रूप के रूप में भी बताया गया है।
ऐसी स्थिति बनानी है कि हर आत्मा चलता-फिरता लाइट हाउस और माइट हाउस अनुभव हो।
बापदादा प्रेरणा देते हैं कि जब 5000 वर्ष पहले के स्वरूप को अनुभव कर सकते हो, तो अपने अन्तिम श्रेष्ठ स्वरूप का अनुभव क्यों नहीं कर सकते? जो कमी रह गई है, उसे भरकर अनुभवी
मूर्त बनना है।
मुख्य शिक्षा: अपने निराकारी और दिव्य गुणधारी स्वरूप का अनुभव करके चलना है।
5. कमजोरियों और कमियों को समाप्त करना
भट्ठी से ऐसा परिवर्तन करके जाना है कि पुरानी कमजोरियों और कमियों की पहचान ही मर्ज हो
जाए।
बापदादा इसके लिए दो शब्दों की विशेष शिक्षा देते हैं—
गेस्ट हाउस: इस पुरानी दुनिया को सदैव गेस्ट हाउस समझना है।
गेट आउट: कमजोरी और कमी को बाहर निकालना है तथा उसे दोबारा अन्दर आने नहीं देना है।
जब पुरानी दुनिया को गेस्ट हाउस समझेंगे और कमजोरियों को बाहर निकालने में सावधान रहेंगे, तब सहज पुरुषार्थ कर सकेंगे।
मुख्य शिक्षा: कमजोरी को केवल पहचानना नहीं,उसे बाहर निकालकर दोबारा प्रवेश नहीं करने देना है।
6. अभी सेवा, आगे 21 जन्मों का रेस्ट
बापदादा कहते हैं कि अभी 21 जन्मों के लिए रेस्ट करना है, लेकिन वर्तमान समय में एक सेकण्ड भी मनसा, वाचा और कर्मणा सेवा से रेस्ट नहीं करना है।
अर्थात् अभी पुरुषार्थ और सेवा में आलस्य नहीं करना है। इसी प्रकार श्रेष्ठ पुरुषार्थ से बेस्ट
बनना है।
इस ग्रुप को हार्ड वर्कर ग्रुप कहा गया है। हार्ड वर्कर न रेस्ट करता है और न वेस्ट करता है। रूहानी सेवाधारी संगठन को सेवा के सिवाय और
कुछ नहीं सूझना चाहिए।
मुख्य शिक्षा: अभी निरन्तर सेवा करनी है, समय और शक्ति को व्यर्थ नहीं गँवाना है।
7. सेवा के लिए स्वयं को ऑफर करना
बापदादा समझाते हैं कि सेवा के प्रति स्वयं को ऑफर करना है, तभी बापदादा से ऑफरीन
अर्थात् सौगात मिलेगी।
रूहानी सेवाधारी ग्रुप को अपना लक्ष्य स्पष्ट रखना है। सेवा के लिए तत्पर रहना और अपनी क्षमताओं को श्रेष्ठ कार्य में लगाना ही इस ग्रुप के नाम का काम है।
मुख्य शिक्षा: सेवा के प्रति स्वयं को समर्पित करना है।
8. समाना और सामना करना — हमारा निशाना
बापदादा रूहानी सेवाधारी ग्रुप को विशेष स्लोगन देते हैं—
“समाना और सामना करना हमारा निशाना है।”
यहाँ सामना माया से करना है, दैवी परिवार से नहीं। और समाना अपने पुराने संस्कारों को है।
पुराने संस्कारों को समाप्त करने का पुरुषार्थ करना है और माया की चुनौतियों का सामना शक्ति के साथ करना है। नॉलेजफुल बनने के साथ पावरफुल भी बनना है, तभी सच्चे सर्विसएबुल बनेंगे।
मुख्य शिक्षा: पुराने संस्कारों को समाना और माया का सामना करना है।
9. तिलक समारोह और
राज-तिलक
बापदादा तिलक समारोह को देखकर राज-तिलक समारोह की याद दिलाते हैं।
वर्तमान तिलक सम्पूर्ण स्थिति में रहने के लिए है। इसे प्रतिज्ञा और प्रत्यक्षता का तिलक बताया गया है। इस तिलक की मर्यादा यह है कि आत्मा अपनी प्रतिज्ञा को जीवन में प्रमाणित करे और श्रेष्ठ स्थिति में रहे।
मुख्य शिक्षा: प्रतिज्ञा का तिलक धारण करके अपनी श्रेष्ठ स्थिति को प्रत्यक्ष करना है।
10. सत्कार और अधिकार दोनों साथ-साथ
बापदादा कहते हैं कि अपनेको जितनाअधिकारी समझते हो, उतना ही सत्कारी भी बनो।
पहले सत्कार देना और फिर अधिकार लेना है। सत्कारऔर अधिकारदोनों साथ-साथ होने चाहिए।
यदि केवल अधिकार लिया और सत्कार छोड़ दिया, तो जो कुछ किया वह बेकार हो जाएगा। इसलिए अपने अधिकार के साथ दूसरों को सम्मान देने की भावना भी रखनी है।
मुख्य शिक्षा: अधिकार प्राप्त करने के साथ सत्कार देने का गुण भी धारण करना है।
मुरली पर आधारित 30 छोटे प्रश्न और उत्तर
भाग 1: कैचिंग पॉवर और पुरुषार्थ
प्रश्न 1. बापदादा प्रत्येक आत्मा की कौन-सी दो बातें देख रहे हैं?
उत्तर: आत्मा कितनी नॉलेजफुल और कितनी पावरफुल बनी है।
प्रश्न 2. पुरुषार्थ का मुख्य आधार क्या है?
उत्तर: कैचिंग पॉवर।
प्रश्न 3. साइंस वाले किसे कैच करने का प्रयत्न करते हैं?
उत्तर: आवाज को।
प्रश्न 4. आत्मा को साइलेन्स की शक्ति से क्या कैच करना है?
उत्तर: अपने 5000 वर्ष पहले के दैवी संस्कार।
प्रश्न 5. आत्मा का कार्य केवल संस्कारों को कैच करना है?
उत्तर: नहीं, उन संस्कारों का प्रैक्टिकल स्वरूप बनना भी है।
भाग 2: स्मृति, वृत्ति और दृष्टि
प्रश्न 6. अपनी स्मृति को कैसा बनाना है?
उत्तर: श्रेष्ठ, स्पष्ट और पावरफुल।
प्रश्न 7. अपने आदि संस्कारों की स्मृति कैसी होनी चाहिए?
उत्तर: इतनी स्पष्ट जैसे कल की बात हो।
प्रश्न 8. कौन-सा दृढ़ संकल्प रखना है?
उत्तर: “यह मैं ही तो था और फिर बन रहा हूँ।”
प्रश्न 9. स्मृति पावरफुल बनने से क्या स्वतः पावरफुल बनती हैं?
उत्तर: वृत्ति और दृष्टि।
प्रश्न 10. दो स्वरूप कौन-से हैं?
उत्तर: निराकारी स्वरूप और दिव्य गुणधारी स्वरूप।
भाग 3: श्रेष्ठ स्वरूप और परिवर्तन
प्रश्न 11. निराकारी और दिव्य गुणधारी स्वरूप को अन्य किन नामों से बताया गया है?
उत्तर: फरिश्ता रूप और दैवी रूप।
प्रश्न 12. हर एक को किसके समान अनुभव होना है?
उत्तर: चलते-फिरते लाइट हाउस और माइट हाउस के समान।
प्रश्न 13. भट्ठी से कैसा परिवर्तन करके जाना है?
उत्तर: कमजोरियों और कमियों को समाप्त करके।
प्रश्न 14. कमजोरी को बाहर निकालने के लिए कौन-से दो शब्द दिए गए हैं?
उत्तर: गेस्ट हाउस और गेट आउट।
प्रश्न 15. पुरानी दुनिया को क्या समझना है?
उत्तर: गेस्ट हाउस।
भाग 4: सेवा और पुरुषार्थ
प्रश्न 16. गेट आउट का क्या अर्थ है?
उत्तर: कमजोरी और कमी को बाहर निकालना तथा दोबारा अन्दर नहीं आने देना।
प्रश्न 17. अभी कितने जन्मों के लिए रेस्ट करना है?
उत्तर: 21 जन्मों के लिए।
प्रश्न 18. अभी किन तीन प्रकार की सेवा से रेस्ट नहीं करना है?
उत्तर: मनसा, वाचा और कर्मणा सेवा से।
प्रश्न 19. हार्ड वर्कर ग्रुप की विशेषता क्या है?
उत्तर: न रेस्ट करना और न वेस्ट करना।
प्रश्न 20. रूहानी सेवाधारी संगठन को किस कार्य में तत्पर रहना है?
उत्तर: रूहानी सेवा में।
भाग 5: समाना और सामना
प्रश्न 21. सेवा के प्रति क्या करना है?
उत्तर: स्वयं को ऑफर करना है।
प्रश्न 22. रूहानी सेवाधारी ग्रुप का स्लोगन क्या है?
उत्तर: “समाना और सामना करना हमारा निशाना है।”
प्रश्न 23. सामना किससे करना है?
उत्तर: माया से, दैवी परिवार से नहीं।
प्रश्न 24. समाना किसे है?
उत्तर: अपने पुराने संस्कारों को।
प्रश्न 25. सर्विसएबुल बनने के लिए नॉलेजफुल के साथ क्या बनना है?
उत्तर: पावरफुल।
भाग 6: तिलक, प्रतिज्ञा और सत्कार
प्रश्न 26. वर्तमान तिलक किस स्थिति में रहने के लिए है?
उत्तर: सम्पूर्ण स्थिति में रहने के लिए।
प्रश्न 27. इस तिलक को किन दो बातों का तिलक बताया गया है?
उत्तर: प्रतिज्ञा और प्रत्यक्षता का तिलक।
प्रश्न 28. अपने को जितना अधिकारी समझते हैं, उतना ही क्या बनना है?
उत्तर: सत्कारी।
प्रश्न 29. अधिकार लेने से पहले क्या करना है?
उत्तर: सत्कार देना है।
प्रश्न 30. सत्कार और अधिकार के बारे में बापदादा की क्या शिक्षा है?
उत्तर: दोनों को साथ-साथ रखना है।
स्व-चिंतन के प्रश्न
क्या मेरी कैचिंग पॉवर इतनी स्पष्ट है कि मैं अपनेश्रेष्ठ आदि संस्कारों को अनुभव कर सकूँ?
क्या मैं केवल ज्ञान सुनता हूँ या उसे अपने प्रैक्टिकल स्वरूप में भी लाता हूँ?
क्या मेरी स्मृति के साथ मेरी वृत्ति और दृष्टि भी पावरफुल बन रही हैं?
मेरी कौन-सी पुरानी कमजोरी अभी भी बार-बार सामने आती है?
क्या मैं कमजोरी को गेस्ट हाउस में रखता हूँ या गेट आउट करता हूँ?
क्या मैं मनसा, वाचा और कर्मणा से सेवा करने में तत्पर रहता हूँ?
क्या मैं माया का सामना करता हूँ और अपने पुराने संस्कारों को समाता हूँ?
क्या मैं अपने अधिकार के साथ दूसरों को सत्कार भी देता हूँ?
निष्कर्ष
9 दिसम्बर 1970 की इस अव्यक्त मुरली का मुख्य संदेश है कि पुरुषार्थ की सफलता कैचिंग पॉवर पर निर्भर है। अपनी स्मृति को श्रेष्ठ और स्पष्ट बनाकर आदि संस्कारों का अनुभव करना है और उन्हें जीवन में प्रकट करना है।
पुरानी कमजोरियों को “गेट आउट” करना है, पुरानी दुनिया को “गेस्ट हाउस” समझना है और मनसा, वाचा, कर्मणा से निरन्तर सेवा करनी है। माया का सामना करते हुए अपने पुराने संस्कारों को समाना है। साथ ही नॉलेजफुल और पावरफुल बनकर अधिकार तथा सत्कार—दोनों को साथ रखना है।
मुख्य स्लोगन
“समाना और सामना करना हमारा निशाना है।”
स्मृति-मंत्र: मैं अपनी श्रेष्ठ स्मृति, शक्तिशाली वृत्ति और दिव्य दृष्टि से अपने आदि संस्कारों को प्रैक्टिकल स्वरूप में लाने वाली आत्मा हूँ।
📝 84. अव्यक्त मुरली |9 December 1970
20 Questions × 5 Marks = 100 Marks
